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तीसरी मंजिल की छत से बुजुर्ग ने दी जान
Updated Thu, 17 Aug 2017 02:35 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में चौथी मंजिल
से गिरकर बुजुर्ग महिला की मौत
आत्महत्या, हत्या या हादसे में उलझी पुलिस, मौके पर चप्पल और दुपट्टा पड़ा मिला
क्रासर
बरेली के मिशन अस्पताल से सेवानिवृत्त होकर बहू-बेटे के साथ रहती थीं
बेटा सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रयोगशाला सहायक और बहू स्टाफ नर्स हैं
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर के ब्लाक सी -6 में टाइप तीन फ्लैट की चौथी मंजिल से बुजुर्ग महिला के अचानक गिरने से बुधवार सुबह सनसनी मच गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया मगर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब भी आत्महत्या, हत्या या हादसे में उलझी है। मौके पर एक चप्पल और दुपट्टा भी पड़ा मिला। महिला बरेली के क्लैरा स्वैन मिशन अस्पताल से सेवानिवृत्त होने के बाद वहीं आवासीय कमरे में रहती थीं। बेटा अक्तूबर में उन्हें यहां अपने साथ लाया था।
सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रयोगशाला सहायक सुरेश बहादुर इस फ्लैट में परिवार के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी नीलिमा पीटर इसी अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। बुधवार सुबह पौने दस बजे नीलिमा ड्यूटी पर थीं। सुरेश भी अस्पताल जाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक चीखने की आवाज सुनकर बाहर निकले तो भूतल पर अपनी मां मनी बहादुर (67) को लहूलुहान देखकर सन्न रह गए। उनका सिर फट गया था और पैर टूट गए थे। वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। आनन-फानन में मनी को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सुरेश ने पुलिस को बताया कि मनी बहादुर बरेली के क्लैरा स्वैन मिशन अस्पताल में कार्यरत थीं। सेवानिवृत्ति के बाद वह अस्पताल के आवासीय परिसर में ही रहती थीं। इकलौता होने के कारण वह अक्तूबर 2016 में उन्हें अपने साथ यहां ले आया था। पिता बीबी सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। सुरेश के अनुसार वह रोज टहलने जाती थीं किन कारणों से छत से गिर गईं यह समझ से परे है। उन्होंने किसी प्रकार के विवाद से भी इन्कार किया। मेडिकल चौकी प्रभारी विजय सिंह मेहता का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। परिवार में कोई विवाद की बातें सामने नहीं आई हैं। घटना के समय सुरेश की दोनों बेटियां भी स्कूल गई थीं। एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव का कहना है कि बुजुर्ग ने आत्महत्या की या कुछ और कारण हैं, इस बारे में पुलिस गहराई से छानबीन कर रही है।
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ढाई साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर भी दे चुके हैं जान
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता ने भी दस जनवरी 2015 पहले डी टाइप-3 के चार नंबर फ्लैट की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या की थी। घटना के एक दिन पहले डॉक्टर की पत्नी रेनू गुप्ता अपने भाई के साथ गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद स्थित मायके चली गई थी। नौ दिन बाद रेनू गुप्ता ने कोतवाली थाने में तहरीर दी। उनके द्वारा तीन सुसाइड नोट लिखे गए थे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। सुसाइड नोट में डॉक्टर ने दिल्ली के तत्कालीन उप राज्यपाल नजीब जंग, जामिया मिलिया की डीन डॉ. रागिनी, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डाू. आरसी पुरोहित सहित विभाग के अन्य डॉक्टरों के नाम अंकित किए थे। आरोप था कि अंडरवर्ल्ड से मिलकर कुछ लोगों ने उनकी पेन ड्राइव के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट गायब कराए गए थे। इस मामले में पुलिस ने काफी दिनों तक जांच की लेकिन आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। अंत में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमा खारिज कर दिया।
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मेडिकल कॉलेज में चौथी मंजिल
से गिरकर बुजुर्ग महिला की मौत
आत्महत्या, हत्या या हादसे में उलझी पुलिस, मौके पर चप्पल और दुपट्टा पड़ा मिला
क्रासर
बरेली के मिशन अस्पताल से सेवानिवृत्त होकर बहू-बेटे के साथ रहती थीं
बेटा सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रयोगशाला सहायक और बहू स्टाफ नर्स हैं
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर के ब्लाक सी -6 में टाइप तीन फ्लैट की चौथी मंजिल से बुजुर्ग महिला के अचानक गिरने से बुधवार सुबह सनसनी मच गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया मगर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब भी आत्महत्या, हत्या या हादसे में उलझी है। मौके पर एक चप्पल और दुपट्टा भी पड़ा मिला। महिला बरेली के क्लैरा स्वैन मिशन अस्पताल से सेवानिवृत्त होने के बाद वहीं आवासीय कमरे में रहती थीं। बेटा अक्तूबर में उन्हें यहां अपने साथ लाया था।
सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रयोगशाला सहायक सुरेश बहादुर इस फ्लैट में परिवार के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी नीलिमा पीटर इसी अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। बुधवार सुबह पौने दस बजे नीलिमा ड्यूटी पर थीं। सुरेश भी अस्पताल जाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक चीखने की आवाज सुनकर बाहर निकले तो भूतल पर अपनी मां मनी बहादुर (67) को लहूलुहान देखकर सन्न रह गए। उनका सिर फट गया था और पैर टूट गए थे। वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। आनन-फानन में मनी को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सुरेश ने पुलिस को बताया कि मनी बहादुर बरेली के क्लैरा स्वैन मिशन अस्पताल में कार्यरत थीं। सेवानिवृत्ति के बाद वह अस्पताल के आवासीय परिसर में ही रहती थीं। इकलौता होने के कारण वह अक्तूबर 2016 में उन्हें अपने साथ यहां ले आया था। पिता बीबी सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। सुरेश के अनुसार वह रोज टहलने जाती थीं किन कारणों से छत से गिर गईं यह समझ से परे है। उन्होंने किसी प्रकार के विवाद से भी इन्कार किया। मेडिकल चौकी प्रभारी विजय सिंह मेहता का कहना है कि इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। परिवार में कोई विवाद की बातें सामने नहीं आई हैं। घटना के समय सुरेश की दोनों बेटियां भी स्कूल गई थीं। एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव का कहना है कि बुजुर्ग ने आत्महत्या की या कुछ और कारण हैं, इस बारे में पुलिस गहराई से छानबीन कर रही है।
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ढाई साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर भी दे चुके हैं जान
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता ने भी दस जनवरी 2015 पहले डी टाइप-3 के चार नंबर फ्लैट की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या की थी। घटना के एक दिन पहले डॉक्टर की पत्नी रेनू गुप्ता अपने भाई के साथ गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद स्थित मायके चली गई थी। नौ दिन बाद रेनू गुप्ता ने कोतवाली थाने में तहरीर दी। उनके द्वारा तीन सुसाइड नोट लिखे गए थे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। सुसाइड नोट में डॉक्टर ने दिल्ली के तत्कालीन उप राज्यपाल नजीब जंग, जामिया मिलिया की डीन डॉ. रागिनी, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डाू. आरसी पुरोहित सहित विभाग के अन्य डॉक्टरों के नाम अंकित किए थे। आरोप था कि अंडरवर्ल्ड से मिलकर कुछ लोगों ने उनकी पेन ड्राइव के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट गायब कराए गए थे। इस मामले में पुलिस ने काफी दिनों तक जांच की लेकिन आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। अंत में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमा खारिज कर दिया।
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