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वन विभाग की आग बुझाने पर चार्ज वसूलता है अग्निशमन विभाग
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हल्द्वानी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने जिले के तीन एफएसओ को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि वे जंगलों में लगने वाली आग बुझाने पर शासनादेश के तहत चार्ज वसूलेंगे। यानी अग्नि शमन विभाग मुफ्त में आग बुझाने के लिए नहीं जाएगा। वन विभाग के बुलावे पर अग्निशमन अधिकारी सहयोगी की भूमिका में रहेंगे।
सीएफओ संजीवा कुमार ने नौ मई को पत्र के माध्यम से एफएसओ रामनगर, मल्लीताल और हल्द्वानी को अवगत कराया है कि वन विभाग के स्वामित्व वाले क्षेत्रों में अग्निकांड की अत्यधिक घटनाएं हो रही हैं। वनाग्नि रोकने का प्रथम दायित्व वन विभाग का है। इस महत्वपूर्ण कार्य में अग्निशमन विभाग सहयोग की भूमिका निभाएगा। अग्निशमन विभाग का दायित्व रिहायशी इलाकों की आग बुझाना है। ग्रामीण या शहरी इलाकों में सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी। शासनादेश संख्या 1120 आ.(8) 192, 27 दिसंबर 82 के तहत वन विभाग की आग बुझाने पर निर्धारित दर पर अग्निशमन अधिकारी सरकारी पैसा प्रत्येक दशा में भुगतान कराएंगे। वसूली के लिए अग्निशमन अधिकारी प्रति घंटा पंपिंग चार्ज, वाहनों के आने-जाने का व्यय, मोबिल आयल की लागत, दुर्घटनास्थल पर अधिकारियों और कर्मचारियों के ठहरने का वेतन भत्ता वसूलने के लिए बिल तैयार करेंगे। एफएसओ बिल को 15 दिन के अंदर सीएफओ कार्यालय को भेजेंगे।
अग्निशमन विभाग मुफ्त में नहीं बुझाएगा जंगलों की आग
इसके लिए चार्ज वसूला जाएगा, सीएफओ ने एफएसओ को भेजी शासनादेश की कॉपी
व्यावसायिक संस्थान से भी खर्च वसूलने का प्रावधान
हल्द्वानी। सीएफओ ने बताया कि व्यवसायिक संस्थान में आग बुझाने पर डीजल पेट्रोल सहित अन्य खर्च संस्थान प्रमुख से वसूलेगा। इस मामले में भी शासनादेश है।
जंगल के अंदर गाड़ियां भेजना मुश्किल था
हल्द्वानी। अग्निशमन अधिकारी का कहना है कि गौलापार जंगल में रात के समय आग लगने पर अग्निशमन विभाग के कर्मचारी अलर्ट थे। अंदर गाड़ियां भेजना मुश्किल था। सीएफओ संजीवा कुमार ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारियों ने बर्निंग कंट्रोल के तहत खुद आग को काबू में कर लिया। पत्तियों में लगी आग काफी कम समय में बुझा ली गई। इस कारण अग्निशमन विभाग की जरूरत नहीं पड़ी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वन विभाग की आग लगने पर अधिकारियों से संपर्क किया था लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था। इधर सीएफओ संजीवा कुमार का कहना है कि जंगल के अंदर 30 मीटर तक ही पाइप फैलाया जा सकता था। घटनास्थल तक पाइप पहुंचाना मुश्किल था। यदि आग रोड की तरफ बढ़ती तो अग्निशमन विभाग तत्काल नियंत्रित करने के लिए आगे काम कर सकता था।
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सीएफओ संजीवा कुमार ने नौ मई को पत्र के माध्यम से एफएसओ रामनगर, मल्लीताल और हल्द्वानी को अवगत कराया है कि वन विभाग के स्वामित्व वाले क्षेत्रों में अग्निकांड की अत्यधिक घटनाएं हो रही हैं। वनाग्नि रोकने का प्रथम दायित्व वन विभाग का है। इस महत्वपूर्ण कार्य में अग्निशमन विभाग सहयोग की भूमिका निभाएगा। अग्निशमन विभाग का दायित्व रिहायशी इलाकों की आग बुझाना है। ग्रामीण या शहरी इलाकों में सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी। शासनादेश संख्या 1120 आ.(8) 192, 27 दिसंबर 82 के तहत वन विभाग की आग बुझाने पर निर्धारित दर पर अग्निशमन अधिकारी सरकारी पैसा प्रत्येक दशा में भुगतान कराएंगे। वसूली के लिए अग्निशमन अधिकारी प्रति घंटा पंपिंग चार्ज, वाहनों के आने-जाने का व्यय, मोबिल आयल की लागत, दुर्घटनास्थल पर अधिकारियों और कर्मचारियों के ठहरने का वेतन भत्ता वसूलने के लिए बिल तैयार करेंगे। एफएसओ बिल को 15 दिन के अंदर सीएफओ कार्यालय को भेजेंगे।
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अग्निशमन विभाग मुफ्त में नहीं बुझाएगा जंगलों की आग
इसके लिए चार्ज वसूला जाएगा, सीएफओ ने एफएसओ को भेजी शासनादेश की कॉपी
व्यावसायिक संस्थान से भी खर्च वसूलने का प्रावधान
हल्द्वानी। सीएफओ ने बताया कि व्यवसायिक संस्थान में आग बुझाने पर डीजल पेट्रोल सहित अन्य खर्च संस्थान प्रमुख से वसूलेगा। इस मामले में भी शासनादेश है।
जंगल के अंदर गाड़ियां भेजना मुश्किल था
हल्द्वानी। अग्निशमन अधिकारी का कहना है कि गौलापार जंगल में रात के समय आग लगने पर अग्निशमन विभाग के कर्मचारी अलर्ट थे। अंदर गाड़ियां भेजना मुश्किल था। सीएफओ संजीवा कुमार ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारियों ने बर्निंग कंट्रोल के तहत खुद आग को काबू में कर लिया। पत्तियों में लगी आग काफी कम समय में बुझा ली गई। इस कारण अग्निशमन विभाग की जरूरत नहीं पड़ी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वन विभाग की आग लगने पर अधिकारियों से संपर्क किया था लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा था। इधर सीएफओ संजीवा कुमार का कहना है कि जंगल के अंदर 30 मीटर तक ही पाइप फैलाया जा सकता था। घटनास्थल तक पाइप पहुंचाना मुश्किल था। यदि आग रोड की तरफ बढ़ती तो अग्निशमन विभाग तत्काल नियंत्रित करने के लिए आगे काम कर सकता था।
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