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गौला नदी के सभी 11 निकासी गेटों को बंद कराया

Mon, 04 Feb 2019 02:26 AM IST
madan singh Madan Singh
Updated Mon, 04 Feb 2019 02:26 AM IST
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गौला नदी के सभी 11 निकासी गेटों को बंद कराया
खनन - फोटो : अमर उजाला
हल्द्वानी/लालकुआं/हल्दूचौड़। खनन व्यवसायियों ने स्टोन क्रशर संचालकों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए रविवार को हड़ताल कर दी। गौला नदी के सभी 11 निकासी गेटों को बंद करा दिया गया। शीशमहल से लालकुआं तक आने वाले ग्यारह उप खनिज निकासी गेटों में कोई भी वाहन उप खनिज निकासी को लेकर नदी में नहीं उतरा। महापंचायत कर आरपार की लड़ाई का ऐलान किया गया।
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गौला नदी से उप खनिज निकासी कर रहे वाहन स्वामी हल्दूचौड़ के सामुदायिक मिलन केंद्र डूंगरपुर पर एकत्र होकर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने विधायक नवीन दुम्का को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में प्रधान इंदर बिष्ट, डॉ. बालम बिष्ट, विपिन जोशी, संजय राणा, बीडी खोलिया, किशन सिंह लटवाल, मनोज मठपाल, गोपाल सिंह अधिकारी, एनके कपिल, राजेंद्र बिष्ट, शेखर राठौर, जीवन, संजय कबड़वाल, गणेश गर्ब्याल, कीर्ति पाठक, रविंद्र सिंह जग्गी, भुवन दुर्गापाल, भगवान सिंह धामी, अरशद, पम्मी शेट्ठी आदि थे।
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गौला संघर्ष समिति ने हल्द्वानी और लालकुआं क्षेत्र के 25 स्टोन क्रशरों को बंद करा दिया। हालांकि कुछ स्टोन क्रशर दोपहर बाद खुले रहे जिसे संघर्ष समिति ने बंद कराया। स्टोन क्रशर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जगदीश पिमोली ने बताया कि स्टोन क्रशरों की बंदी से भी करीब छह करोड़ का करोबार प्रभावित हुआ।
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खनन व्यवसायियों की हड़ताल, बंद कराए 25 स्टोन क्रशर
गौला नदी में कोई खनन वाहन नहीं उतरा, महापंचायत में दिखाया गुस्सा, विधायक को घेरा
7500 वाहन स्वामियों ने डंपर और ट्रैक्टर ट्राली खडे़ किए
11 निकासी गेटों को बंद कराकर विरोध जताया गया गौला नदी में
06 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ उप खनिज की निकासी न होने से
1.50 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ वन निगम और वन विभाग को


आज भी बंद रहेगी निकासी
लालकुआं (नैनीताल)। रेता बजरी कारोबारियों ने क्रशर संचालकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि गौला से उपखनिज ढोने वाले वाहनों का किराया कम कर रहे है और दिन प्रतिदिन उपखनिज के दाम बढ़ा रहे हैं। उनका कहना था कि एक बार 11 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा कम होने के बाद वाहन स्वामियों ने कोई विरोध नहीं किया लेकिन क्रशर स्वामियों ने मनमानी करते हुए फिर से पांच रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा कम कर दिया है इसलिए सोमवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।

बाजार भाव के अनुसार किराया तय किया जाएगा
लालकुआं। देवभूमि क्रशर एसोसिएशन ने प्रेसनोट जारी कर कहा है कि इस बार गौला नदी में उपखनिज कम आने से क्रशरों में 25 से 30 प्रतिशत मिट्टी आ रही है। यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों में दूसरे राज्यों से रेता बजरी आने के कारण तैयार माल का दाम भी कम मिल रहा है। वर्तमान में फिर से रेता बजरी का बाजार कमजोर पड़ने के कारण परिस्थितियां बदल गई। बावजूद इसके वह वर्तमान में 39 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा दे रहे हैं। वह बाजार की मांग के अनुसार ही भाड़ा बड़ा और घटा रहे है।


गुस्सा
-लालकुआं में पाल स्टोन क्रशर पर गौला संघर्ष समिति और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई।
-गौला संघर्ष समिति ने खान विभाग के उप निदेशक राजपाल लेघा के स्थानांतरण की मांग उठाई। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप निदेशक की स्टोन क्रशर स्वामियों से मिली भगत है।
-गौला मजदूर खनन संघर्ष समिति ने शीशमहल गेट पर प्रदर्शन किया। इस मौके पर राजेंद्र बिष्ट, योगेंद्र सिंह, रोहित साह, पंकज तिवारी, हरीश भगत, संतोष, हरीश भंडारी, कमल पांडे आदि मौजूद थे।
-चोरगलिया के खनन व्यवसायियों ने ग्राम प्रधान सुरजीत कौर के आवास पर बैठक में तय किया कि सोमवार से नंधौर के सभी गेट अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगे। इस दौरान प्रधान सुुरजीत कौर, दुुर्गालाल, छत्रपति बेलवाल, पूरन बोरा, विनोद बजेठा, मोहन बजेठा, रमेश कांडपाल, त्रिलोक सिंह बिष्ट आदि थे।


गांवों वालों का उप खनिज लूट रहे दूसरे जिले वाले
हल्द्वानी। निहाल नदी में अवैध खनन का खेल केवल ओवरलोड और नदी के पार तक खुदाई तक सीमित नहीं है। यहां पर नाम तो क्षेत्र के किसानों का है, लेकिन ऊधमसिंह नगर जिले के वाहन स्वामियों के ट्रैक्टर भी नदी में चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इन वाहनों को नदी में इंट्री मिलती है। ग्राम चौसला के समीप निहाल नदी में अवैध खनन जोरों पर है। वन विभाग के अधिकारियों की सह पर ट्रैक्टर स्वामी ओवरलोड उप खनिज निकाल रहे हैं।

दूसरे जिले और क्षेत्र के वाहन भी ढो रहे उप खनिज
नियमानुसार निहाल नदी में आसपास के गांवों के निवासियों को ही उप खनिज की निकासी की अनुमति है। लेकिन ऊधमसिंह नगर जिले के भी वाहनों का संचालन हो रहा है। बताया जा रहा है कि बाजपुर क्षेत्र की गाड़ियां भी यहां चल रही है। यहां के कुछ लोगों ने किसानों से किराये पर ट्रैक्टर ट्राली लिया है। निहाल नदी में इन वाहनों से उप खनिज निकासी हो रही है। सूत्रों की मानें तो इन वाहनों की संख्या 50 के करीब है।

उप खनिज निकासी के वाहनों का पंजीकरण तक नहीं
जिले की नदियों से रेता, बजरी और आरबीएम निकासी के लिए वाहनों का व्यावसायिक पंजीकरण जरूरी है। लेकिन निहाल नदी में यह नियम लागू नहीं होता है। यहां पर बगैर व्यावसायिक पंजीकरण के ही वाहन दौड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि किसी भी वाहन का व्यावसायिक पंजीकरण नहीं है।


चार माह खोलने की मांग
आसपास के ग्रामीणों के मुताबिक निहाल नदी को चार माह तक खोलने का आदेश है। नदी में नवंबर से फरवरी तक खनन होना चाहिए। लेकिन अधिकारी इस नियम का पालन नहीं करते हैं। जिस कारण निहाल नदी में उप खनिज की लूट मच रही है। ग्रामीणों के मुताबिक वन विभाग निहाल नदी को पूरी तैयारी के साथ उप खनिज निकासी के लिए खोले। जिससे सरकार को भी आय हो और नियमों के तहत खनन हो सके।
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