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चेक बाउंस मामले में छह माह की सजा अर्थदंड
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Decision of court
- फोटो : amar ujala
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हल्द्वानी। न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (सीनियर डिविजन) संगीता आर्य की अदालत ने चेक बाउंस मामले में सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को छह माह की साधारण कारावास के साथ दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
अधिवक्ता प्रकाश चंद्र जोशी और हेम चंद्र उपाध्याय के अनुसार किशनपुर रैक्वाल निवासी पंकज बोरा ने 19 मई 2011 को लोन से ट्रक खरीदा था। पंकज ने ट्रक खरीदने के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड बंशीकुंज केनाल रोड तिकोनिया से दो लाख 90 हजार का लोन लिया था। उसने पांच जुलाई 2013 को पांच लाख 25 हजार 500 रुपये का चेक दिया था। कंपनी की तरफ से कहा गया कि 13 जुलाई 2013 को पंकज द्वारा दिया गया चेक बैंक में पेश करने पर उसे अपर्याप्त धनराशि का हवाला देते हुए अनादरित कर दिया गया। पंकज की तरफ से किश्त के रूप में लोन की रकम के विरुद्ध तीन लाख 20 हजार रुपये जमा किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों को तर्कों को सुनने के बाद पंकज बोरा को परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 का दोषी पाया। अदालत ने इस अपराध के लिए अभियुक्त को छह के साधारण कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। अभियुक्त द्वारा जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतना होगा। अभियुक्त द्वारा परिवादी के पक्ष में जारी चेक की रकम पांच लाख 25 हजार में से दो लाख पांच हजार 500 रुपये के साथ दंड संहिता की धारा 367(1) (ख) के तहत प्रतिकर के रुप में 4110 रुपये जोड़कर कुल दो लाख नौ हजार 500 रुपये 13 जून 19 से एक माह के भीतर अदा करना होगा। प्रतिकर अदा नहीं करने पर अभियुक्त को छह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
चेक बाउंस मामले में छह महीने की सजा
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अधिवक्ता प्रकाश चंद्र जोशी और हेम चंद्र उपाध्याय के अनुसार किशनपुर रैक्वाल निवासी पंकज बोरा ने 19 मई 2011 को लोन से ट्रक खरीदा था। पंकज ने ट्रक खरीदने के लिए श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड बंशीकुंज केनाल रोड तिकोनिया से दो लाख 90 हजार का लोन लिया था। उसने पांच जुलाई 2013 को पांच लाख 25 हजार 500 रुपये का चेक दिया था। कंपनी की तरफ से कहा गया कि 13 जुलाई 2013 को पंकज द्वारा दिया गया चेक बैंक में पेश करने पर उसे अपर्याप्त धनराशि का हवाला देते हुए अनादरित कर दिया गया। पंकज की तरफ से किश्त के रूप में लोन की रकम के विरुद्ध तीन लाख 20 हजार रुपये जमा किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों को तर्कों को सुनने के बाद पंकज बोरा को परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 का दोषी पाया। अदालत ने इस अपराध के लिए अभियुक्त को छह के साधारण कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। अभियुक्त द्वारा जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतना होगा। अभियुक्त द्वारा परिवादी के पक्ष में जारी चेक की रकम पांच लाख 25 हजार में से दो लाख पांच हजार 500 रुपये के साथ दंड संहिता की धारा 367(1) (ख) के तहत प्रतिकर के रुप में 4110 रुपये जोड़कर कुल दो लाख नौ हजार 500 रुपये 13 जून 19 से एक माह के भीतर अदा करना होगा। प्रतिकर अदा नहीं करने पर अभियुक्त को छह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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चेक बाउंस मामले में छह महीने की सजा