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Nainital News: सीपीयूः न चमक रही न धमक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Feb 2023 11:11 PM IST
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CPU: neither shining nor shining
हल्द्वानी। सीपीयू जब हल्द्वानी में आई तो अलग ही चमक-धमक थी। शहर की सड़कों पर नीली वर्दी देखते ही बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चलाने वाले दूर से ही रास्ता बदल देते थे। बिना हेलमेट घर से निकलने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता था। तब सीपीयू का अलग ही रौब था। समय बदला आज न सीपीयू अपने उद्देश्य को गंभीरता से ले रही है और न ही लोगों में उनकी कोई धमक रही। वजह यह है कि सीपीयू अपने उद्देश्य से ही भटक गई है। राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट पुलिस फोर्स का अवार्ड जीतने वाली सीपीयू अब महज वीआईपी ड्यूटी में तैनात रहने, चालान काटने और जाम खुलवाने तक सीमित रह गई है।
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वर्ष 2013 में 1979 बैच के आईपीएस अफसर बीएस सिद्धू को उत्तराखंड का नया डीजीपी नियुक्त किया गया था। डीजीपी का पदभार संभालने के बाद सिद्धू ने अपराध नियंत्रण और यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सिटी पेट्रोलिंग यूनिट (सीपीयू) का गठन किया था। बातचीत के दौरान पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू ने बताया कि सीपीयू की टीमों को चार-चार घंटे के अंतराल पर ड्यूटी में लगाया जाता था। चार घंटे तक सीपीयू का काम केवल शहर में गश्त करना था। वारदात के बाद फरार हो रहे आरोपियों का पीछा करना और उन्हें पकड़ना था। शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करके पालन कराने की भी जिम्मेदारी थी। शुरुआती वर्षों में सीपीयू ने बेहतर से बेहतर प्रदर्शन किया। नतीजा यह निकला कि रोड होल्डअप, चेन स्नेचिंग, लूट, चोरी समेत कई बड़े अपराधों पर अंकुश लगा और शहरों में शांति व्यवस्था कायम हुई। बीएस सिद्धू ने बताया कि वर्ष 2016 में उत्तराखंड सीपीयू को बेस्ट ट्रैफिक पुलिस फोर्स ऑफ इंडिया का अवार्ड भी मिला। इतनी कामयाबी के बाद अब सीपीयू के दागदार होने का सिलसिला शुरू हुआ। आए दिन विवादों में घिरे सीपीयू कर्मियों की शिकायतें पहुंचने लगीं। आलम यह हुआ की कार्यप्रणाली पर सवाल तक खड़े हो गए।
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अलग दिखने के लिए तय हुई थी काली वर्दी
पूर्व डीजीपी ने बताया कि सीपीयू कर्मियों के लिए अलग वर्दी की व्यवस्था इसलिए की गई ताकि उन्हें दूर से पहचाना जा सके। उनका प्रमुख कार्य शहर में लगातार गश्त करना था। ड्यूटी समय के दौरान अगर कोई अधिकारी उन्हें किसी जगह पर रुका या खड़ा देखता था तो उनसे जवाब तलब भी किया जाता था। पुलिस वर्दी में सीपीयू कर्मी की पहचान मुश्किल हो सकती थी। इसलिए उन्हें अलग वर्दी, आधुनिक सुविधाओं से लैस बाइक दी गई थी।
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चालान के खर्च से मद निकालने की थी योजना
सीपीयू का गठन जब किया गया तो उनपर होने वाले खर्च के बारे में भी सोचा गया था। इस पर पूर्व डीजीपी ने बताया कि शुरुआत में योजना बनाई गई थी कि सीपीयू जो चालान काटेगी उसकी राशि से ही उसका संचालन किया जाएगा। हालांकि इस पर आपत्ति होने के बाद पुलिस बजट से इसका संचालन किया गया और चालान की राशि को राजकोष में जमा कराया जाने लगा।
गश्त खत्म अब सीपीयू कर्मी करते हैं वीआईपी ड्यूटी
पहले जहां सीपीयू शहर में गश्त करने का काम करती थी। तो शहर वासियों में सुरक्षा और अपराधियों के दिलों में डर का माहौल बना रहता था। वहीं अब उनकी ड्यूटी में भी बदलाव आ गया है। अब सीपीयू को शहर से दूर कर दिया गया है। सीपीयू की ड्यूटी अब हाइवे और उसके चौराहों पर लगती है। जहां सीपीयू कर्मी केवल जाम खुलवाते और चालान काटते ही नजर आते हैं।

नैनीताल सीपीयू में तैनात कार्मिकों की संख्या
बिना इंचार्ज के काम कर रही सीपीयू में छह एसआईए एक हेड कांस्टेबलए 8 कांस्टेबल तैनात हैं। हल्द्वानी सीपीयू का प्रभारी नहीं होने से इसका प्रभार ट्रैिफक इंस्पेक्टर रमेश मेहरा को सौंपा गया है। जिले में सीपीयू के पास गश्त के लिए केवल एक बुलेरो और 13 बाइक हैं।
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