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दुराचार के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Sun, 30 Apr 2017 12:07 AM IST
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हाईकोर्ट ने नारी निकेतन में रह रही बहरी और गूंगी युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में याचिकाकर्ता के जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
नारी निकेतन देहरादून में कार्यरत गुरुदास ने हाइकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
मामले के अनुसार 27 नवंबर 2015 को देहरादून एसआई कृष्ण जयारा ने पुलिस स्टेशन नेहरू कालोनी में एफआईआर दर्ज की थी। नारी निकेतन देहरादून में रह रही बहरी और गूंगी युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सुर्खियों मेें छाने के बाद इस मामले में एक स्पेशल कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने जांच में पाया था कि वह युवती 2010 से नारी निकेतन में रह रही थी।
यह दुष्कर्म की घटना नारी निकेतन में ही की गई थी। भ्रूण का डीएनए परीक्षण कराया गया जो पॉजिटिव निकला। सरकार की ओर से कहा गया था कि याचिकाकर्ता नारी निकेतन में ही कार्यरत था और उसी ने वहां पर रह रही पीड़िता के साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने बहुत की घिनौना कार्य किया है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने शनिवार को पक्षों की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
नारी निकेतन देहरादून में कार्यरत गुरुदास ने हाइकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
मामले के अनुसार 27 नवंबर 2015 को देहरादून एसआई कृष्ण जयारा ने पुलिस स्टेशन नेहरू कालोनी में एफआईआर दर्ज की थी। नारी निकेतन देहरादून में रह रही बहरी और गूंगी युवती के साथ दुष्कर्म का मामला सुर्खियों मेें छाने के बाद इस मामले में एक स्पेशल कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने जांच में पाया था कि वह युवती 2010 से नारी निकेतन में रह रही थी।
यह दुष्कर्म की घटना नारी निकेतन में ही की गई थी। भ्रूण का डीएनए परीक्षण कराया गया जो पॉजिटिव निकला। सरकार की ओर से कहा गया था कि याचिकाकर्ता नारी निकेतन में ही कार्यरत था और उसी ने वहां पर रह रही पीड़िता के साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया है। सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने बहुत की घिनौना कार्य किया है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने शनिवार को पक्षों की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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