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जेलों की सुविधाओं को लेकर कमेटी का गठन कर सुझावों पर करें अमल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 08 Dec 2021 11:24 PM IST
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Court Order of Uttarakhand Highcourt
Wooden gavel and books on wooden table, law concept - फोटो : Court-00000.jpg
नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों की दुर्दशा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उनमें सुधारों के संबंध में कई दिशा निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी 24 घंटे के लिए बदहाल जेलों में अपने बच्चों को रखकर देखें।
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कोर्ट ने कहा कि जेलों की दशा को देखकर नहीं लगता कि हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। प्रदेश में जेलों की हालत सेलुलर या अहमदनगर जेलों से कम नहीं है। नैनीताल जेल और हल्द्वानी सब जेल की स्थिति भी वैसी ही है।
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कोर्ट ने चेरापल्ली तेलंगाना जेल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कैदियों के लिए सभी सुविधाएं हैं। कोर्ट ने पूछा कि छोटे अपराध में संलिप्त कैदियों को पैरोल पर क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है? जो कैदी आधी से अधिक सजा काट चुके हैं और जिनका आचरण अच्छा है, उन्हें भी पैरोल पर छोड़ने पर विचार किया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी कैमरे व अन्य सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान गृह सचिव रंजीत सिन्हा व जेल महानिदेशक पुष्कर ज्योति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हाईकोर्ट में पेश हुए।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि जेलों में सुविधाओं को लेकर एक कमेटी का गठन कर सुझावों पर अमल किया जाए और इसकी रिपोर्ट हर माह के तीसरे सप्ताह में कोर्ट में पेश की जाए।
जेलों के पूर्ण बजट जारी करे सरकार : हाईकोर्ट
नैनीताल। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह जेलों के लिए पूर्ण बजट जारी करे। कोर्ट ने छह माह के भीतर सभी रिक्त पदों को भरने और नई जेलों का निर्माण अत्याधुनिक तरीके से करने के आदेश भी सरकार को दिए। अदालत ने सितारगंज स्थित खुली जेल में औद्योगिक संस्थान खोलने के निर्देश भी दिए।
कोर्ट ने छह जिलों में नई जिला जेलों का निर्माण कराने के लिए भी कहा। हाईकोर्ट ने गृह सचिव और आईजी जेल से कहा कि जेलों के लिए जो भी जरूरतें हैं उनका प्रस्ताव बनाकर सरकार को दें। इस प्रस्ताव पर सरकार को निर्णय लेना ही होगा। कोर्ट ने कहा कि इसकी रिपोर्ट हर माह कोर्ट में दाखिल करें।
महिलाओं के लिए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेलों में महिलाओं के रहने और खाने पीने की पूर्ण व्यवस्था करे। महिला जेल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति करें। कोर्ट ने पैरोल और सजायाफ्ता कैदियों के लिए सरकार को आदेश दिया कि वह पुराने नियमों में संशोधन कर नए नियम बनाएं।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में किसी भी जेल की स्थिति ठीक नहीं है। इनमें स्थितियां 90 के दशक की तरह हैं। इन जेलों में अब भी लकड़ी से चूल्हा जलाकर खाना बन रहा है। कोर्ट ने कहा कि सजायाफ्ता कैदियों व अन्य कैदियों के जो सांविधानिक अधिकार हैं, उनका पालन सरकार को करना होगा।
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