{"_id":"648b62f23ae20ec1050aa4b4","slug":"court-order-for-veeru-manral-murder-case-nainital-news-c-97-1-hld1029-634-2023-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: बीडीसी सदस्य मनराल हत्याकांड में चारों दोषियों को आजीवन कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: बीडीसी सदस्य मनराल हत्याकांड में चारों दोषियों को आजीवन कारावास
Fri, 16 Jun 2023 12:44 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 16 Jun 2023 12:44 AM IST
विज्ञापन
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने रामनगर में हुए बीडीसी सदस्य वीरेंद्र मनराल उर्फ वीरू हत्याकांड में चार आरोपियों को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को पचास-पचास हजार रुपये अर्थदंड और अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
बता दें कि पहली सितंबर 2018 को मदनपुरबोरा छोई रामनगर निवासी दीवान सिंह मनराल पुत्र शेर सिंह मनराल निवासी ने रामनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह पहली सितंबर को अपने भाई वीरेंद्र मनराल उर्फ वीरू और कुलदीप सिंह मनराल पुत्र गोपाल सिंह मनराल के साथ मामले की पैरवी के लिए अपर सत्र न्यायाधीश रामनगर के न्यायालय में आए थे। इसी दौरान वहां देवेंद्र सिंह उर्फ बाउ भी मौजूद था। रिपोर्टकर्ता के मुताबिक जैसे ही वह तीनों लोग न्यायालय से बाहर आए तो वहां मौजूद संजय ऊर्फ सोनू कांडपाल पुत्र राधा बल्लभ कांडपाल निवासी ग्राम गैबुआ कालाढूंगी के कहने पर देवेंद्र सिंह ऊर्फ बाऊ ने बीडीसी सदस्य वीरेंद्र सिंह मनराल को तमंचे से गोली मार दी। घटना को अंजाम देने के बाद सोनू कांडपाल और देवेंद्र सिंह ऊर्फ बाऊ कार से भाग गए। कार में दर्शन सिंह व गुरप्रीत सिंह पहले से सवार थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच थाना रामनगर से स्थानांतरित होकर मल्लीताल के तत्कालीन एसएचओ विपिन चंद्र पंत को सौंपी गई। विवेचक ने मामले के आरोपी देवेंद्र सिंह उर्फ बाऊ, दर्शन सिंह, गुरमीत और संजय उर्फ सोनू आदि के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में सौंपे। इस बीच पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था।
बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए 19 गवाह न्यायालय में पेश किए। शर्मा ने यह भी तर्क रखा कि घटना के दौरान चारों आरोपियों की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी। मामले में पांच चश्मदीद गवाहों ने भी अभियोजन की ओर से रखे गए तथ्यों को साबित किया। बचाव पक्ष की ओर से भी न्यायालय में अपने तर्क रखे गए।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की बहस व गवाहों के बयान सुनने, अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने हत्यारोपी देवेंद्र सिंह बाऊ को धारा 302, 120 बी के तहत आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड अदा न करने पर तीन वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने धारा 25 आयुध अधिनियम के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास व तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर अभियुक्त को छह माह का कठोर कारावास भुगतना होगा। इसी तरह न्यायालय ने हत्याकांड के सह अभियुक्त दर्शन सिंह, गुरप्रीत सिंह व संजय ऊर्फ सोनू कांडपाल को धारा 120 बी और धारा 302 का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर तीनों आरोपियों को तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय के इस आदेश के बाद चारों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया है।
मृतक की माता को प्रतिकर धनराशि दिलाने के भी आदेश
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने अपने निर्णय में उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना 2013 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को आदेश दिया है कि वह नियमानुसार शासन से मृतक की माता को प्रतिकर धनराशि दिलवाए।
विज्ञापन
बता दें कि पहली सितंबर 2018 को मदनपुरबोरा छोई रामनगर निवासी दीवान सिंह मनराल पुत्र शेर सिंह मनराल निवासी ने रामनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह पहली सितंबर को अपने भाई वीरेंद्र मनराल उर्फ वीरू और कुलदीप सिंह मनराल पुत्र गोपाल सिंह मनराल के साथ मामले की पैरवी के लिए अपर सत्र न्यायाधीश रामनगर के न्यायालय में आए थे। इसी दौरान वहां देवेंद्र सिंह उर्फ बाउ भी मौजूद था। रिपोर्टकर्ता के मुताबिक जैसे ही वह तीनों लोग न्यायालय से बाहर आए तो वहां मौजूद संजय ऊर्फ सोनू कांडपाल पुत्र राधा बल्लभ कांडपाल निवासी ग्राम गैबुआ कालाढूंगी के कहने पर देवेंद्र सिंह ऊर्फ बाऊ ने बीडीसी सदस्य वीरेंद्र सिंह मनराल को तमंचे से गोली मार दी। घटना को अंजाम देने के बाद सोनू कांडपाल और देवेंद्र सिंह ऊर्फ बाऊ कार से भाग गए। कार में दर्शन सिंह व गुरप्रीत सिंह पहले से सवार थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच थाना रामनगर से स्थानांतरित होकर मल्लीताल के तत्कालीन एसएचओ विपिन चंद्र पंत को सौंपी गई। विवेचक ने मामले के आरोपी देवेंद्र सिंह उर्फ बाऊ, दर्शन सिंह, गुरमीत और संजय उर्फ सोनू आदि के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में सौंपे। इस बीच पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया था।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए 19 गवाह न्यायालय में पेश किए। शर्मा ने यह भी तर्क रखा कि घटना के दौरान चारों आरोपियों की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी। मामले में पांच चश्मदीद गवाहों ने भी अभियोजन की ओर से रखे गए तथ्यों को साबित किया। बचाव पक्ष की ओर से भी न्यायालय में अपने तर्क रखे गए।
विज्ञापन
दोनों पक्षों की बहस व गवाहों के बयान सुनने, अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने हत्यारोपी देवेंद्र सिंह बाऊ को धारा 302, 120 बी के तहत आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड अदा न करने पर तीन वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने धारा 25 आयुध अधिनियम के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास व तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर अभियुक्त को छह माह का कठोर कारावास भुगतना होगा। इसी तरह न्यायालय ने हत्याकांड के सह अभियुक्त दर्शन सिंह, गुरप्रीत सिंह व संजय ऊर्फ सोनू कांडपाल को धारा 120 बी और धारा 302 का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर तीनों आरोपियों को तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय के इस आदेश के बाद चारों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया है।
मृतक की माता को प्रतिकर धनराशि दिलाने के भी आदेश
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने अपने निर्णय में उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना 2013 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को आदेश दिया है कि वह नियमानुसार शासन से मृतक की माता को प्रतिकर धनराशि दिलवाए।