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350 करोड़ का टर्नओवर और कंपनी का नामोनिशान नहीं
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काशीपुर/हल्द्वानी। काशीपुर में सर्कुलर ट्रेडिंग (फर्जी कंपनी बनाकर टैक्स चोरी करने) का मामला पकड़ में आया है। काशीपुर की तीन कंपनियां पंजीकरण कराने के बाद एक से डेढ़ माह में ही 380 करोड़ का टर्नओवर दिखा चुकी हैं। शक होने पर जीएसटी विभाग की टीमों ने एक साथ छापा मारा तो पता चला कि ये फर्मेें लगभग 68 करोड़ रुपये की चपत लगाने की तैयारी में थीं। बता दें कि ई बिलिंग पर जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक 18 प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्म को प्राप्त होता है। जीएसटी की टीम ने एक फर्म का पंजीकरण रद्द कर दिया है जबकि दो अन्य फर्मों के संबंध में केंद्रीय कर विभाग को अवगत कराया गया है।
काशीपुर के महुआखेड़ागंज में रवि इंटरप्राइजेज, नीलम ओवरसीज और गंगा इंपेक्ट के नाम से फर्में पंजीकृत हैं। इन फर्मों में प्लास्टिक का धागा बनाने की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई गई थी। जुलाई 2019 में इन फर्मों का पंजीकरण कराया गया था। इतनी कम अवधि में करीब 380 करोड़ की ई-बिलिंग होने से विभागीय अधिकारियों का माथा ठनका। इस ई बिलिंग पर जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक 18 प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्म को प्राप्त होता है। जीएसटी के अपर आयुक्त बीएस नागन्याल व संयुक्त कमिश्नर पीएस डुंगरियाल के निर्देश पर तीनों फर्मों के व्यवसाय के बारे में जानकारी जुटाई गई।
डिप्टी कमिश्नर (एसटीएफ) आरएस वर्मा और डिप्टी कमिश्नर एपी सिंह के नेतृत्व में तीन टीमों ने फर्मों पर छापेमारी के लिए महुआखेड़ागंज में छापा मारा लेकिन मौके पर इनमें से किसी भी फर्म का वजूद होना नहीं पाया गया। इनमें से दो फर्मे केंद्रीय कर विभाग और एक फर्म राज्य कर विभाग में पंजीकृत पाई गई। डिप्टी कमिश्नर (एसटीएफ) वर्मा ने बताया कि गंगा इंपेक्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है जबकि दो अन्य फर्मों पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय कर विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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इन फर्मों की रिटर्न 20 अगस्त को भरी जानी थी। ये फर्मेें लगभग 68 करोड़ रुपये की चपत लगाने की तैयारी में थीं। उन्होंने बताया कि इन फर्मों के बारे में विस्तृत जांच की जा रही है। छापेमार टीम में जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर (एसटीएफ) पूजा पांडे, एसी कविता पाठक, हेमलता शुक्ला, संतोष कुमार सिंह, सीटीओ अनिल चौहान व नवीन चंद्र पांडे आदि थे।
जुलाई में किया था रजिस्ट्रेशन
काशीपुर में जुलाई में तीनों कंपनियों का एक साथ रजिस्ट्रेशन किया गया। एक-डेढ़ माह में ही तीनों कंपनियों ने आपस में ही पॉलिस्टर यार्न की 380 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री दिखा दी। एक ही दिन में कंपनियों ने 100 से अधिक ई-वे बिल (50 हजार से अधिक की सप्लाई पर बनाना पड़ता है) बनवा कर सप्लाई की।
नौ सदस्यीय टीम ने की थी जांच
अपर आयुक्त बीएस नगन्याल और ज्वाइंट आयुक्त पीएस डुंगरियाल ने सूचना के बाद नौ सदस्यों की टीम का गठन किया। डिप्टी कश्मिनर अरविंद प्रताप सिंह, आरएल वर्मा, सहायक आयुक्त पूजा पांडे, संतोष कुमार सिंह, हेमलता शुक्ला, एसटीओ अनिल चौहान की टीम ने जांच की थी।
पॉलिस्टर यार्न पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। रिटर्न दाखिल करने के बाद इस पर तीनों कंपनियां आईटीसी क्लेम कर सरकार को चूना लगाने की तैयारी में थीं। -पूजा पांडे सहायक आयुक्त, जीएसटी।
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काशीपुर के महुआखेड़ागंज में रवि इंटरप्राइजेज, नीलम ओवरसीज और गंगा इंपेक्ट के नाम से फर्में पंजीकृत हैं। इन फर्मों में प्लास्टिक का धागा बनाने की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई गई थी। जुलाई 2019 में इन फर्मों का पंजीकरण कराया गया था। इतनी कम अवधि में करीब 380 करोड़ की ई-बिलिंग होने से विभागीय अधिकारियों का माथा ठनका। इस ई बिलिंग पर जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक 18 प्रतिशत इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्म को प्राप्त होता है। जीएसटी के अपर आयुक्त बीएस नागन्याल व संयुक्त कमिश्नर पीएस डुंगरियाल के निर्देश पर तीनों फर्मों के व्यवसाय के बारे में जानकारी जुटाई गई।
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डिप्टी कमिश्नर (एसटीएफ) आरएस वर्मा और डिप्टी कमिश्नर एपी सिंह के नेतृत्व में तीन टीमों ने फर्मों पर छापेमारी के लिए महुआखेड़ागंज में छापा मारा लेकिन मौके पर इनमें से किसी भी फर्म का वजूद होना नहीं पाया गया। इनमें से दो फर्मे केंद्रीय कर विभाग और एक फर्म राज्य कर विभाग में पंजीकृत पाई गई। डिप्टी कमिश्नर (एसटीएफ) वर्मा ने बताया कि गंगा इंपेक्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है जबकि दो अन्य फर्मों पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय कर विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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इन फर्मों की रिटर्न 20 अगस्त को भरी जानी थी। ये फर्मेें लगभग 68 करोड़ रुपये की चपत लगाने की तैयारी में थीं। उन्होंने बताया कि इन फर्मों के बारे में विस्तृत जांच की जा रही है। छापेमार टीम में जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर (एसटीएफ) पूजा पांडे, एसी कविता पाठक, हेमलता शुक्ला, संतोष कुमार सिंह, सीटीओ अनिल चौहान व नवीन चंद्र पांडे आदि थे।
जुलाई में किया था रजिस्ट्रेशन
काशीपुर में जुलाई में तीनों कंपनियों का एक साथ रजिस्ट्रेशन किया गया। एक-डेढ़ माह में ही तीनों कंपनियों ने आपस में ही पॉलिस्टर यार्न की 380 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री दिखा दी। एक ही दिन में कंपनियों ने 100 से अधिक ई-वे बिल (50 हजार से अधिक की सप्लाई पर बनाना पड़ता है) बनवा कर सप्लाई की।
नौ सदस्यीय टीम ने की थी जांच
अपर आयुक्त बीएस नगन्याल और ज्वाइंट आयुक्त पीएस डुंगरियाल ने सूचना के बाद नौ सदस्यों की टीम का गठन किया। डिप्टी कश्मिनर अरविंद प्रताप सिंह, आरएल वर्मा, सहायक आयुक्त पूजा पांडे, संतोष कुमार सिंह, हेमलता शुक्ला, एसटीओ अनिल चौहान की टीम ने जांच की थी।
पॉलिस्टर यार्न पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। रिटर्न दाखिल करने के बाद इस पर तीनों कंपनियां आईटीसी क्लेम कर सरकार को चूना लगाने की तैयारी में थीं। -पूजा पांडे सहायक आयुक्त, जीएसटी।