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कॉमन सिविल कोड मुल्क के दस्तूर पर हमला
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Tue, 08 Nov 2016 02:00 AM IST
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तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिलाओं का समर्थन जुटाने में लग गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिलाओं का समर्थन जुटाने में लग गया है। इसके तहत घर-घर जाकर फार्म भरवाए जा रहे हैं तो जगह-जगह महिलाओं के जलसे आयोजित किए जा रहे हैं।
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सोमवार की शाम मस्जिद बंजारान स्थित मदरसा सिराजुल उलूम में आयोजित मजलिस में बड़ी तादाद में औरतें एकजुट हुईं। मजलिस को खिताब करते हुए मस्जिद बिलाली के इमाम मौलाना मोहम्मद आसिम ने कहा कि हर मियां-बीवी को मुहब्बत से रहना चाहिए, जिससे तलाक की नौबत ही न आए।
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अगर ऐसी कोई मजबूरी आ पड़े तो तलाक-ए-रजई सबसे बेहतर तरीका है, इसमें इद्दत के पूरा होने तक निकाह नहीं टूटता। गलती का अहसास होने पर बीवी से दोबारा रिश्ता बनाया जा सकता है। इद्दत (तीन माह) की अवधि पूरी होने पर मेहर की राशि अदा करनी पड़ेगी और निकाह भी दोबारा होगा। तीन तलाक से हमेशा के लिए दोनों जुदा जाते हैं। दोबारा निकाह हलाला के बाद ही हो सकता है।
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तीन तलाक पर पाबंदी लगाना कॉमन सिविल कोड की ओर ले जाने वाला कदम है। यह पश्चिमी देशों की अवधारणा है। उस अवधारणा के खुलेपन को हिंदुस्तान का कोई भी मजहब स्वीकार नहीं करेगा। यह न सिर्फ शरई कानून पर हमला है, बल्कि इससे हिंदुस्तान का दस्तूर ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि यह मुल्क जम्हूरियत का गुलदस्ता है।
जहां तक औरतों के अधिकार की बात है। निकाह के लिए लड़की की रजामंदी पहले ली जाती है, पिता की विरासत में हिस्सेदारी का कानून है। महिलाओं की इज्जत और जरूरत का इस्लाम में जितना पुख्ता इंतजाम है उतना कहीं नही है। केंद्र सरकार वाकई में मुस्लिम औरतों का विकास चाहती है तो बुनियादी सुविधाओं पर काम करे।
मुस्लिम क्षेत्रों में अस्पताल खोले जाएं, बालिकाओं के लिए शिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएं। अवाम को खुशहाल जीवन यापन करने के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं। सरकार ऐसी चीजों पर प्रतिबंध लगाए जो जुल्म को बढ़ावा देती हैं। शराब, सट्टा बाजारी, स्मैक, वेश्यावृत्ति, कालाबाजारी, भ्रष्टाचार आदि को जड़ से मिटाया जाए। जलसे को मौलाना अब्दुल बासित ने भी खिताब किया।