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रंग ला रहे हैं विश्व प्रसिद्ध नैनी झील को बचाने के प्रयास 

Tue, 31 May 2016 11:58 PM IST
चंद्रेश पांडे, नैनीताल।
चंद्रेश पांडे, नैनीताल। Updated Tue, 31 May 2016 11:58 PM IST
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Color is bringing the effort to save the world-famous Naini Lake
नैनी झील - फोटो : अमर उजाला
नैनीझील को बचाने के सरकारी प्रयास रंग ला रहे हैं। पिछले वर्षों के दौरान झील में कराए गए एरियेशन से झील के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी और अब झील से मलबा निकालकर झील में नई जान डालने के प्रयास सार्थक होते नजर आ रहे हैं। पोकलैंड की मदद से अब तक झील के अलग-अलग हिस्सों से करीब सात हजार क्यूबिक मीटर मलबा निकाला जा चुका है। 
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पिछले वर्षों के दौरान नैनीताल में हुए बेतरतीब निर्माण कार्यों के चलते अधिकांश नालों से होकर आया मलबा झील में समा गया। नतीजा यह रहा कि झील में पानी कम और मलबा ज्यादा हो गया। इस बार गर्मियों में तेजी से झील का जलस्तर गिरा तो जगह-जगह किनारों पर मलबा ही नजर आने लगा। डीएम दीपक रावत की पहल के बाद लोनिवि ने पहले चरण में 16 मार्च से 16 मई तक और दूसरे चरण में 17 मई से मलबा निकालने का अभियान शुरू किया।
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लोनिवि के प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता एसके गर्ग बताते हैं कि मलबा निकालने के लिए तीन पोकलैंड लगाई गई हैं, जो अब तक करीब सात हजार क्यूबिक मीटर मलबा निकाल चुकी हैं। 10 जून तक 10 हजार क्यूबिक मीटर मलबा निकालने का लक्ष्य रखा गया है। झील से निकाले गए मलबे को अन्यत्र फेंकने के लिए 10-15 ट्रकों को लगाया गया है। रोजाना करीब 200 ट्रक मलबा निकाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक फांसी गधेरा और रिक्शा स्टैंड के पास का मलबा निकाल लिया गया है। 
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ईई गर्ग ने बताया कि शुरू में मलबा निकालने के लिए जिला प्रशासन से 15 लाख रुपये मिले थे। अब शासन ने 65 लाख रुपये और अवमुक्त किए हैं, जिसमें से करीब 25 से 28 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। गर्ग के मुताबिक 10 हजार क्यूबिक मीटर मलबा निकाले जाने के बाद झील की जल भंडारण क्षमता में खासी वृद्धि होगी। 


दिन में आराम और सारी रात काम
स्थानीय लोगों और यहां पहुंचने वाले सैलानियों को लगता है कि झील से मलबा निकालने का काम ठप हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि झील में मौजूद पोकलैंड दिन भर खड़ी रहती हैं। लेकिन, हकीकत में ऐसा है नहीं। यह मशीनें शाम ढलते ही झील से मलबा निकालने में जुट जाती हैं। इस काम में लगे श्रमिक पूरी रात झील को नया रूप देने का काम कर रहे हैं। मलबे से लदे ट्रक रात भर यहां सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। एक एक ट्रक रात में कई चक्कर काटकर मलबा फेंकता है। रात में अभियान चलाने का निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि दिन में स्थानीय लोगों और सैलानियों को किसी तरह की दिक्कतें न हों। 
 
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