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बच्चे पानी लाते हैं घर से, पैसे लेेता है स्कूल
ब्यूरो/ हल्द्वानी
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:00 PM IST
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पब्लिक स्कूलों की मनमानी चरम पर है। अब देखिए अधिकांश बच्चे स्कूल वॉटर बोतल लेकर जाते हैं, लेकिन फिर भी पब्लिक स्कूल वाटर सप्लाई के नाम पर बच्चों से शुल्क वसूलते हैं। स्कूलों में वाटर एवं इलेक्ट्रिक सप्लाई के नाम पर प्रतिमाह 40 रुपये से सौ रुपये वसूला जाता है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। इधर, स्कूलों में किताबों की दुकानें सजाई जा रही हैं, गौरापड़ाव स्थित एक पब्लिक स्कूल में दुकान लगाकर किताबें बेचने की शिकायत मिली है।
नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। निजी एवं पब्लिक स्कूलों में अभिभावकों से विभिन्न मदों में धनराशि वसूली जा रही है। सभी पब्लिक स्कूलों में बच्चों से वाटर एवं इलेक्ट्रिक सप्लाई के नाम पर प्रतिमाह 40 से सौ रुपये मासिक फीस के साथ वसूले जा रहे हैं। जबकि अधिकांश बच्चे पानी की बोतल लेकर स्कूल जाते हैं। बावजूद इसके पैसे वसूले जा रहे हैं।
यदि किसी स्कूल में कम से कम पांच सौ बच्चे पढ़ते हैं तो 40 रुपये के हिसाब से करीब 20 हजार रुपये महीने स्कूल वसूल रहा है। कई अभिभावकों ने इसका विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन स्कूल से बच्चे का नाम कटने के डर से वे चुप हो गए। गोरापड़ाव स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को एसएमएस भेजा गया कि शनिवार को स्कूल परिसर में किताब की दुकान लगेगी। एसएमएस में बाकायदा दुकान लगने का समय भी दिया गया था।
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पब्लिक स्कूल में सीबीएसई की पाबंदी के बावजूद किताबों की दुकान लगाई गई। इसकी शिकायत अभिभावकों ने की है। सीबीएसई के दिशा निर्देशों के मुताबिक कोई भी स्कूल अपने परिसर में कापी किताब की दुकान नहीं चला सकता। बोर्ड ने यह भी निर्देश है कि केवल एनसीईआरटी की किताबें ही स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी। इसके उलट कमाई के चक्कर में स्कूलों में सिर्फ प्राइवेट और महंगी किताबें चल रही हैं।
फीस भी मनमाने ढंग से नहीं बढ़ाई जा सकती। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक ड्रेस के चयन के मामले में फैसला स्कूलों के हाथ में ही होता है। नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में बोर्ड को अधिकार है कि वह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। सीबीएसई ने स्कूल परिसर में व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।
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नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। निजी एवं पब्लिक स्कूलों में अभिभावकों से विभिन्न मदों में धनराशि वसूली जा रही है। सभी पब्लिक स्कूलों में बच्चों से वाटर एवं इलेक्ट्रिक सप्लाई के नाम पर प्रतिमाह 40 से सौ रुपये मासिक फीस के साथ वसूले जा रहे हैं। जबकि अधिकांश बच्चे पानी की बोतल लेकर स्कूल जाते हैं। बावजूद इसके पैसे वसूले जा रहे हैं।
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यदि किसी स्कूल में कम से कम पांच सौ बच्चे पढ़ते हैं तो 40 रुपये के हिसाब से करीब 20 हजार रुपये महीने स्कूल वसूल रहा है। कई अभिभावकों ने इसका विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन स्कूल से बच्चे का नाम कटने के डर से वे चुप हो गए। गोरापड़ाव स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को एसएमएस भेजा गया कि शनिवार को स्कूल परिसर में किताब की दुकान लगेगी। एसएमएस में बाकायदा दुकान लगने का समय भी दिया गया था।
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पब्लिक स्कूल में सीबीएसई की पाबंदी के बावजूद किताबों की दुकान लगाई गई। इसकी शिकायत अभिभावकों ने की है। सीबीएसई के दिशा निर्देशों के मुताबिक कोई भी स्कूल अपने परिसर में कापी किताब की दुकान नहीं चला सकता। बोर्ड ने यह भी निर्देश है कि केवल एनसीईआरटी की किताबें ही स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी। इसके उलट कमाई के चक्कर में स्कूलों में सिर्फ प्राइवेट और महंगी किताबें चल रही हैं।
फीस भी मनमाने ढंग से नहीं बढ़ाई जा सकती। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक ड्रेस के चयन के मामले में फैसला स्कूलों के हाथ में ही होता है। नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में बोर्ड को अधिकार है कि वह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। सीबीएसई ने स्कूल परिसर में व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।