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बिना सुविधाओं के स्कूलों में भविष्य गढ़ रहे नौनिहाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 03:12 AM IST
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Children are building future in schools without facilities
हल्द्वानी। शिक्षा अधिकार के तहत हर बच्चे को अनिवार्य रूप से शिक्षा देने का अधिकार है। 21वीं सदी में विकासखंड के 24 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में आज भी बच्चे खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं और पेयजल के लिए भटक रहे हैं। सुविधाओं से विहीन यह विद्यालय खुले में शौच मुक्त भारत की हकीकत उजागर कर रहे हैं।
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विकासखंड के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था न होने से मिड-डे मील के लिए घरों से पानी ढोना पड़ता है। पक्का भवन नहीं होने से कई विद्यालय घासफूस की झोपड़ी में चल रहे हैं। जलजीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना में इन विद्यालयों को चयन किया गया है लेकिन स्कूल वन भूमि में होने की वजह से पेयजल लाइन नहीं बिछ पाई है। भविष्य में भी इन विद्यालयों में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था हो पाएगी या नहीं यह भी तय नहीं है।
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विकासखंड के वन ग्रामों में शिक्षा विभाग ने विद्यालय खोल दिए। इनमें शिक्षकों की तैनाती भी की गई है, जबकि अन्य सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते बच्चों को दिक्कतें हो रही हैं। घासफूस की झोपड़ी वाले स्कूल बरसात में बंद हो जाते हैं। विकासखंड के 24 विद्यालयों में 638 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
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कोट
विभाग के पास विद्यालयों के भवन निर्माण समेत सभी सुविधाओं के लिए धनराशि है। जिला शिक्षा समिति के माध्यम से कई बार प्रस्ताव भेजे गए लेकिन वन विभाग से अनापत्ति नहीं मिलने से इन विद्यालयों में कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जलजीवन मिशन के तहत पेयजल विहीन विद्यालयों में पानी की व्यवस्था की जानी है। इसके लिए विद्यालयों की सूची मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन और जलसंस्थान को भेजी है। वन भूमि का पेंच होने से विद्यालयों में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। - हरेंद्र कुमार मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी।
वन ग्रामों में जो विद्यालय हैं उनमें पेयजल का प्रस्ताव बना है। 90 लाख रुपये जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति से स्वीकृत भी हो गया है लेकिन जलजीवन मिशन की योजना राजस्व गांवों के लिए है। इसलिए इन गांवों में पेयजल योजना नहीं बन पा रही है। जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम के प्रशासन से वार्ता चल रही है। जल्द कोई समाधान होने की उम्मीद है। - दीप बेलवाल, सहायक अभियंता, जलसंस्थान ग्रामीण डिविजन।

पेयजल, भवन और शौचालय विहीन विद्यालय और उनकी छात्र संख्या
राप्रावि डौलीखत्ता 09
राउप्रावि दमुवादूंगा 34
राप्रावि इंद्रानग बिंदुखत्ता 12
राप्रावि सहपठानीखत्ता 11
राप्रावि बीड़खत्ता 23
राप्रावि लछमपुर 23
राप्रावि तपस्या नाला 20
राउप्रावि तपस्यानाला 18
राप्रावि हाथगढ़ खत्ता 34
राप्रावि रैलाखत्ता 17
राप्रावि पीलापानी खत्ता 03
राप्रावि कलेगाखत्ता 25
राप्रावि पीपलपड़ाव 160
राउप्रावि पीपलपड़ाव 29
राप्रावि ज्योतियाल खत्ता 18
राप्रावि बोडखत्ता 35
राप्रावि हसपुर खत्ता 27
राप्रावि रेखालखत्ता 36
राउप्रावि रैखालखत्ता 18
राआउप्रावि छड़याल सुयाल 103
राउप्रावि रेलाखत्ता 20
राप्रावि कोटखरीखत्ता 05
राउप्रावि तुलसीनगर 35
राप्रावि नगीना कालोनी 67
कुल 638
बिंदुखत्ता, दमुवाढूंगा में बिजली, पानी की सुविधा हो सकती है तो इन विद्यालयों में क्यों नहीं
हल्द्वानी। बिंदुखत्ता और दमुवाढूंगा पूरी तरह वन क्षेत्र में हैं। इन दोनों इलाकों में बड़ी-बड़ी कालोनियां बस गई हैं। यहां पक्की सड़कें, पक्के भवन, पेयजल लाइनें, बिजली लाइनें बिछी हैं। यहां सैकड़ों दुकानें भी बनी हुई हैं। इन इलाकों में स्कूल भवन भी पक्के बने हुए हैं। इसकी ओर वन विभाग की नजर नहीं जाती है लेकिन वन ग्रामों और खत्तों में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को सभी सुविधाओं के वंचित किया गया है। शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभाग धनराशि होने के बावजूद भवन, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था करने में लाचार है।
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