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Nainital News: खुशियों की तलाश में आए, कभी न भूलने वाला गम लेकर गए
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संवाद न्यूज एजेंसी
हल्द्वानी। नैनीताल-कालाढूंगी रोड पर रविवार की देर शाम हुए हादसे के घायल अब भी दहशत में है। खुशियों की तलाश में परिवार संग नैनीताल घूमने आए थे और कभी न भूलने वाला दर्द लेकर वे लोग लौटे हैं। सोमवार को घायलों ने आपबीती सुनाई। बताया कि हादसा अचानक ही हो गया। कुछ समझ नहीं आया।
हिसार की रहने वाली प्रियंका वह न्यू मानव इंटरनेशनल स्कूल आर्यनगर में टीचर हैं। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो गई है। बताया कि सब हंसी-खुशी नैनीताल गए थे। इससे पहले भी टूर पर जाते रहते थे। हालांकि वह पहली बार स्कूल स्टाफ के टूर में आई थीं। बताया कि झील में सबने बोटिंग की। जू देखा और खूब घूमे। कहा कि नैनीताल की सुंदरता देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं लेकिन उन्हें नहीं पता था कि खुशी के ये पल कुछ ही घंटे बाद मातम में बदलने वाले हैं। बताया कि वह ड्राइवर के पास बैठीं थीं। शाम को करीब 6.15 बजे बस नैनीताल से कालाढूंगी की ओर जा रही थी। तभी एकदम से ड्राइवर चिल्लाया मैम बस नीचे जा रही है। यह सुन बस में चीखपुकार मच गई और अगले ही पल बस खाई में गिर गई।
खून से लथपथ भाई ने बस के नीचे दबी बहन को बचाया
हल्द्वानी। हिसार निवासी शिक्षक पूजा बस के नीचे दब गई थीं। उनके भाई अभिषेक ने उन्हीं बमुश्किल निकालकर सड़क तक पहुंचा जबकि अभिषेक खुद लहूलुहान थे।
एसटीएच में भर्ती पूजा ने बताया कि वह बस में आगे की ओर जबकि भाई पीछे बैठे थे।
अचानक बस खाई में गिर गई। चंद सेकेंड आंखों के सामने अंधेरा छा गया। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। जब उन्होंने उठने की कोशिश की तो पता चला कि बस के नीचे उनका हाथ दबा हुआ है। काफी देर तक बस के नीचे से निकलने की कोशिश करती रही। कुछ देर बाद खून से लथपथ भाई उसे पुकारते हुए पहुंचा। भाई ने अन्य लोगों की मदद से बस के नीचे से निकाला और मुख्य सड़क के पास लेकर पहुंका।
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भाई भी बुरी तरह से घायल हो चुका था। उसके हाथ, सिर और पैर पर कई जगह गंभीर चोट आई है। बताया कि बस के नीचे मेरा हाथ दबने से दो जगह से हड्डी टूट गई है। डॉक्टरों ने बताया कि अभिषेक को भी काफी चोट आई है।
मसीहा बनकर आए इंद्र, अब लंबे समय तक रहेंगे बिस्तर पर
हल्द्वानी। इंद्र कोरंगा नैनीताल के एक होटल में नौकरी करते हैं। वह पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं। बताया कि वह नौकरी से शाम को घर पहुंचे ही थे और टीवी पर इंडिया और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच देख रहे थे। घटनास्थल के पास ही उनका घर है।
जैसे ही पता चला कि वह लोगों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। इंद्र ने बताया कि शुरू में स्थानीय लोग और पास की पुलिस चौकी के ही लोग थे। जब तक और टीम आई तब तक वे करीब 12 लोगों को खाई से निकाल चुके थे।
बताया कि एक घायल को निकालने के लिए स्ट्रेचर पकड़कर ऊपर ला रहे थे और रस्सी का सहारा लिया था। लेकिन तभी ऊपर से पत्थर आ गया और पैर पर लग गया। इंद्र का कहना है कि डॉक्टर के अनुसार उन्हें अब करीब एक साल तक बिस्तर पर रहना है। हालांकि जब इंद्र के जज्बे की सूचना लोगों का मिली तो लोगों ने उनकी प्रशंसा की। अस्पताल में आए अधिकारियों ने भी इंद्र की सराहना की।
बस में सीट न मिलने से बच गई जान, अच्छा हुआ भैया नहीं आ पाए
हल्द्वानी। सड़क हादसे में घायल 13 वर्षीय कमलप्रीत कौर ने बताया कि वह अपनी मां के साथ इस ट्रिप पर आई थी। उसका बड़ा भाई भी साथ में आने की जिद कर रहा था। सीट खाली न होने की वजह से वह साथ में नहीं आ सका। इस हादसे के बाद कमलप्रीत काफी ज्यादा सहम गई है। उनका कहना कि अब कभी पहाड़ी रास्तों का सफर नहीं करना चाहेंगी। बता दें कि हादसे में कमलप्रीत की मां की मौके पर ही मौत हो गई थी। घायल कमलप्रीत तो अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। संवाद
यही ड्राइवर, यही बस रहती थी...इस साल हादसा हो गया
हल्द्वानी। सोमवार सुबह हिसार से मृतकों के परिजन हल्द्वानी पहुंच गए। मोर्चरी में बेहद की गमगीन माहौल था। हादसे में मारे गए रामेश्वर के भाई कुलदीप ने बताया कि वह गांव शाहपुर हिसार में रहते हैं। उनको सूचना मीडिया के माध्यम से मिली थी। रात 10 बजे तक उन्हें पता चल गया कि उनके बड़े भाई अब इस दुनिया में नहीं रहे। वह रात को ही हल्द्वानी के लिए चल दिए। यहां पहुंचने पर पोस्टमार्टम हाउस में भाई के शव को देखा तो रो पड़े। बताया कि उनके भाई पिछले तीन साल से स्कूल टूर पर घूमने के लिए जाते रहे थे। ड्राइवर भी यही होता था और बस भी यही रहती थी लेकिन इस साल हादसा हो गया।
हादसे में मारे गए सात साल के बच्चे मनमीत के ताऊ भुवन कुमार ने बताया कि भतीजे की मौत से पूरा परिवार टूट गया है। घर में लोगों को संभालना मुश्किल हो रहा है। पोस्टमार्टम हाउस में सुबह 10.30 बजे से ही पोस्टमार्टम शुरू करवा दिए गए। शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग ने करवाई। उधर, घायलों को ले जा रही एक एंबुलेंस बिलासपुर के पास एक वाहन से टकरा गई थी। एसडीएम परितोष वर्मा ने बताया कि इसमें कोई हताहत नहीं हुई। वाहन को भी नुकसान नहीं हुआ था। उसी वाहन से वह आगे की यात्रा के लिए चले गए। संवाद
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हल्द्वानी। नैनीताल-कालाढूंगी रोड पर रविवार की देर शाम हुए हादसे के घायल अब भी दहशत में है। खुशियों की तलाश में परिवार संग नैनीताल घूमने आए थे और कभी न भूलने वाला दर्द लेकर वे लोग लौटे हैं। सोमवार को घायलों ने आपबीती सुनाई। बताया कि हादसा अचानक ही हो गया। कुछ समझ नहीं आया।
हिसार की रहने वाली प्रियंका वह न्यू मानव इंटरनेशनल स्कूल आर्यनगर में टीचर हैं। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो गई है। बताया कि सब हंसी-खुशी नैनीताल गए थे। इससे पहले भी टूर पर जाते रहते थे। हालांकि वह पहली बार स्कूल स्टाफ के टूर में आई थीं। बताया कि झील में सबने बोटिंग की। जू देखा और खूब घूमे। कहा कि नैनीताल की सुंदरता देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं लेकिन उन्हें नहीं पता था कि खुशी के ये पल कुछ ही घंटे बाद मातम में बदलने वाले हैं। बताया कि वह ड्राइवर के पास बैठीं थीं। शाम को करीब 6.15 बजे बस नैनीताल से कालाढूंगी की ओर जा रही थी। तभी एकदम से ड्राइवर चिल्लाया मैम बस नीचे जा रही है। यह सुन बस में चीखपुकार मच गई और अगले ही पल बस खाई में गिर गई।
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खून से लथपथ भाई ने बस के नीचे दबी बहन को बचाया
हल्द्वानी। हिसार निवासी शिक्षक पूजा बस के नीचे दब गई थीं। उनके भाई अभिषेक ने उन्हीं बमुश्किल निकालकर सड़क तक पहुंचा जबकि अभिषेक खुद लहूलुहान थे।
एसटीएच में भर्ती पूजा ने बताया कि वह बस में आगे की ओर जबकि भाई पीछे बैठे थे।
अचानक बस खाई में गिर गई। चंद सेकेंड आंखों के सामने अंधेरा छा गया। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। जब उन्होंने उठने की कोशिश की तो पता चला कि बस के नीचे उनका हाथ दबा हुआ है। काफी देर तक बस के नीचे से निकलने की कोशिश करती रही। कुछ देर बाद खून से लथपथ भाई उसे पुकारते हुए पहुंचा। भाई ने अन्य लोगों की मदद से बस के नीचे से निकाला और मुख्य सड़क के पास लेकर पहुंका।
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भाई भी बुरी तरह से घायल हो चुका था। उसके हाथ, सिर और पैर पर कई जगह गंभीर चोट आई है। बताया कि बस के नीचे मेरा हाथ दबने से दो जगह से हड्डी टूट गई है। डॉक्टरों ने बताया कि अभिषेक को भी काफी चोट आई है।
मसीहा बनकर आए इंद्र, अब लंबे समय तक रहेंगे बिस्तर पर
हल्द्वानी। इंद्र कोरंगा नैनीताल के एक होटल में नौकरी करते हैं। वह पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं। बताया कि वह नौकरी से शाम को घर पहुंचे ही थे और टीवी पर इंडिया और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच देख रहे थे। घटनास्थल के पास ही उनका घर है।
जैसे ही पता चला कि वह लोगों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। इंद्र ने बताया कि शुरू में स्थानीय लोग और पास की पुलिस चौकी के ही लोग थे। जब तक और टीम आई तब तक वे करीब 12 लोगों को खाई से निकाल चुके थे।
बताया कि एक घायल को निकालने के लिए स्ट्रेचर पकड़कर ऊपर ला रहे थे और रस्सी का सहारा लिया था। लेकिन तभी ऊपर से पत्थर आ गया और पैर पर लग गया। इंद्र का कहना है कि डॉक्टर के अनुसार उन्हें अब करीब एक साल तक बिस्तर पर रहना है। हालांकि जब इंद्र के जज्बे की सूचना लोगों का मिली तो लोगों ने उनकी प्रशंसा की। अस्पताल में आए अधिकारियों ने भी इंद्र की सराहना की।
बस में सीट न मिलने से बच गई जान, अच्छा हुआ भैया नहीं आ पाए
हल्द्वानी। सड़क हादसे में घायल 13 वर्षीय कमलप्रीत कौर ने बताया कि वह अपनी मां के साथ इस ट्रिप पर आई थी। उसका बड़ा भाई भी साथ में आने की जिद कर रहा था। सीट खाली न होने की वजह से वह साथ में नहीं आ सका। इस हादसे के बाद कमलप्रीत काफी ज्यादा सहम गई है। उनका कहना कि अब कभी पहाड़ी रास्तों का सफर नहीं करना चाहेंगी। बता दें कि हादसे में कमलप्रीत की मां की मौके पर ही मौत हो गई थी। घायल कमलप्रीत तो अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। संवाद
यही ड्राइवर, यही बस रहती थी...इस साल हादसा हो गया
हल्द्वानी। सोमवार सुबह हिसार से मृतकों के परिजन हल्द्वानी पहुंच गए। मोर्चरी में बेहद की गमगीन माहौल था। हादसे में मारे गए रामेश्वर के भाई कुलदीप ने बताया कि वह गांव शाहपुर हिसार में रहते हैं। उनको सूचना मीडिया के माध्यम से मिली थी। रात 10 बजे तक उन्हें पता चल गया कि उनके बड़े भाई अब इस दुनिया में नहीं रहे। वह रात को ही हल्द्वानी के लिए चल दिए। यहां पहुंचने पर पोस्टमार्टम हाउस में भाई के शव को देखा तो रो पड़े। बताया कि उनके भाई पिछले तीन साल से स्कूल टूर पर घूमने के लिए जाते रहे थे। ड्राइवर भी यही होता था और बस भी यही रहती थी लेकिन इस साल हादसा हो गया।
हादसे में मारे गए सात साल के बच्चे मनमीत के ताऊ भुवन कुमार ने बताया कि भतीजे की मौत से पूरा परिवार टूट गया है। घर में लोगों को संभालना मुश्किल हो रहा है। पोस्टमार्टम हाउस में सुबह 10.30 बजे से ही पोस्टमार्टम शुरू करवा दिए गए। शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग ने करवाई। उधर, घायलों को ले जा रही एक एंबुलेंस बिलासपुर के पास एक वाहन से टकरा गई थी। एसडीएम परितोष वर्मा ने बताया कि इसमें कोई हताहत नहीं हुई। वाहन को भी नुकसान नहीं हुआ था। उसी वाहन से वह आगे की यात्रा के लिए चले गए। संवाद