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ओखलकांडा क्षेत्र की बीएसेनएल सेवा लड़खड़ाई
रमेश परगाई पतलोट (नैनीताल।
Updated Fri, 06 May 2016 12:40 AM IST
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ओखलकांडा क्षेत्र में बीएसएनएल सेवा पूरी तरह चरमरा गई है। यहां निजी कंपनियों के टॉवर नहीं होने से लोगों को इन्हीं टॉवरों के सहारे रहना पड़ता है। पतलोट में स्थापित बीएसएनएल टॉवर तो कभी ठीक रहता ही नहीं है। यहां से 35 किमी दूर ओखलकांडा के टॉवर पर निर्भर रहना पड़ता है लेकिन ओखलकांडा का टॉवर भी अक्सर खराब रहता है।
पतलोट में बीएसएनएल का टॉवर लगे 10 हो गए हैं। इतने सालों में देखें तो एक दिन भी टॉवर ठीक से नहीं चला। लोगों के द्वारा जनता दरबार में भी इस समस्या को रखा गया। इसके बावजूद हालत जस के तस हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर मटियाली बताते हैं कि इतने सालों में 400 से भी अधिक बार वह स्वयं सूचना दे चुके हैं। बीएसएनएल प्रबंधन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पनेरू बताते हैं कि भोलापुर घाटी में लगाया गया यह टॉवर महीने में लगभग एक हफ्ते भी भी ठीक से नहीं पकड़ता। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है।
दूर संचार विभाग पैसा तो खर्च करता है आपसी मिली भगत व घोर लापरवाही के चलते केवल खाना पूर्ति कर अपना पाला झाड़ दिया जाता है। जिसका खामियाजा 25 गांवों की जनता भुगत रही है। लापरवाही के चलते ही एक बार पतलोट टॉवर के ऑपरेटर को हटाया गया। उप प्रधान डालकनिया चंद्र बल्लभ का कहना है कि शहरों में तकनीक ने रफ्तार पकड़ी है लेकिन ग्रामीण इलाकों में व्यवस्था देखने वाला कोई नहीं है। पतलोट कस्बे व इन गांवों को अभी तक 2जी सेवा भी नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि दूर संचार विभाग को बिजली नहीं होने की स्थिति में टावर को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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जिससे तेल बेचने का खेल भी बंद होगा व लोगों को दूर संचार की सेवाओं का लाभ मिल पायेगा। कलियाधूरा के बाला दत्त परगाईं का कहना है कि तबियत खराब हो, बिजली ना आ रही हो, आग लग जाय, पानी नहीं आ रहा हो, दुर्घटना, चोरी, मारपीट आदि समस्या होने पर दूर संचार की सुविधा ठप होने से हम ग्रामीण प्रशासन तक आवाज नहीं पहुंचा पाते। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द टॉवर ठीक नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेटवर्क नहीं होने के कारण दूरसंचार महाप्रबंधक गणेश चंद्रा से भी बात नहीं हो पाई।
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पतलोट में बीएसएनएल का टॉवर लगे 10 हो गए हैं। इतने सालों में देखें तो एक दिन भी टॉवर ठीक से नहीं चला। लोगों के द्वारा जनता दरबार में भी इस समस्या को रखा गया। इसके बावजूद हालत जस के तस हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर मटियाली बताते हैं कि इतने सालों में 400 से भी अधिक बार वह स्वयं सूचना दे चुके हैं। बीएसएनएल प्रबंधन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पनेरू बताते हैं कि भोलापुर घाटी में लगाया गया यह टॉवर महीने में लगभग एक हफ्ते भी भी ठीक से नहीं पकड़ता। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी है।
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दूर संचार विभाग पैसा तो खर्च करता है आपसी मिली भगत व घोर लापरवाही के चलते केवल खाना पूर्ति कर अपना पाला झाड़ दिया जाता है। जिसका खामियाजा 25 गांवों की जनता भुगत रही है। लापरवाही के चलते ही एक बार पतलोट टॉवर के ऑपरेटर को हटाया गया। उप प्रधान डालकनिया चंद्र बल्लभ का कहना है कि शहरों में तकनीक ने रफ्तार पकड़ी है लेकिन ग्रामीण इलाकों में व्यवस्था देखने वाला कोई नहीं है। पतलोट कस्बे व इन गांवों को अभी तक 2जी सेवा भी नहीं मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि दूर संचार विभाग को बिजली नहीं होने की स्थिति में टावर को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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जिससे तेल बेचने का खेल भी बंद होगा व लोगों को दूर संचार की सेवाओं का लाभ मिल पायेगा। कलियाधूरा के बाला दत्त परगाईं का कहना है कि तबियत खराब हो, बिजली ना आ रही हो, आग लग जाय, पानी नहीं आ रहा हो, दुर्घटना, चोरी, मारपीट आदि समस्या होने पर दूर संचार की सुविधा ठप होने से हम ग्रामीण प्रशासन तक आवाज नहीं पहुंचा पाते। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द टॉवर ठीक नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेटवर्क नहीं होने के कारण दूरसंचार महाप्रबंधक गणेश चंद्रा से भी बात नहीं हो पाई।