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बैरंग लौटी प्रशासनिक टीम
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 03 Feb 2015 02:11 AM IST
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बनभूलपुरा स्थित स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी के पीछे स्थित स्वास्थ्य विभाग
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की जमीन पर विभ्ााग काे कब्जा दिलवाने गए अफसर सोमवार को बैरंग लौट आए। पुलिस बल के साथ पिलर लेकर जमीन पर गाड़ने पहुंचे प्रशासन, निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लोगों का विरोध झेलना पड़ा।
लोगों का आरोप था कि वे सालों से जमीन पर उनका कब्जा है, जब तक उनकी याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता वे जमीन खाली नहीं करेंगे। हालांकि प्रशासनिक टीम बैरंग लौटी लेकिन इस दौरान जमीन पर खेतीबाड़ी न करने की सख्त हिदायत दी गई।
सोमवार सुबह से ही प्रशासन और नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की करीब साढ़े चार बीघा(31725 वर्ग फीट) जमीन पर कब्जा दिलवाने की कसरत में लगा था। दोपहर बाद करीब 3:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल, पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां जमीन के चारों लगाने के लिए पिलर भी ले गई थी।
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लेकिन जैसे ही टीम वहां पहुंची तो वहां खेती बाड़ी कर रहे लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने इस मामले में हाइकोर्ट में याचिका डाली है। जिस पर 23 फरवरी को सुनवाई होनी है। उससे पहले वे जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ेंगे। जिस पर टीम बैरंग लौट आई। सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल ने बताया कि जमीन पर स्वास्थ्य विभाग को 2006 में स्थानांतरित की गई थी।
चारों ओर बाउंड्री भी की गई है। इस जमीन पर कुछ लोगों ने स्टे लिया था। जो कोर्ट ने खारिज कर दिया। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधि संचालित न होने दी जाए।
40 सालों से रह रहे हैं लोग
जमीन को लेकर हाईकोर्ट में से स्टे लेने वाले अजीम इलाही का कहना है कि वे और उनके साथ ही करीब 10 परिवार इस जमीन पर 40 सालों से रह रहे हैं। कोर्ट से उनका स्टे खत्म हो गया है। स्टे बढ़वाने के लिए हाईकोर्ट में 23 को सुनवाई होनी है। इस जमीन पर उनके अलावा कई मकान हैं। जो उजड़ने के डर से सहमे हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग इस जमीन को खाली करवाकर यहां एक संयुक्त चिकित्सालय बनवाना चाहता है।
लोगों का आरोप था कि वे सालों से जमीन पर उनका कब्जा है, जब तक उनकी याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता वे जमीन खाली नहीं करेंगे। हालांकि प्रशासनिक टीम बैरंग लौटी लेकिन इस दौरान जमीन पर खेतीबाड़ी न करने की सख्त हिदायत दी गई।
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सोमवार सुबह से ही प्रशासन और नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की करीब साढ़े चार बीघा(31725 वर्ग फीट) जमीन पर कब्जा दिलवाने की कसरत में लगा था। दोपहर बाद करीब 3:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल, पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां जमीन के चारों लगाने के लिए पिलर भी ले गई थी।
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लेकिन जैसे ही टीम वहां पहुंची तो वहां खेती बाड़ी कर रहे लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने इस मामले में हाइकोर्ट में याचिका डाली है। जिस पर 23 फरवरी को सुनवाई होनी है। उससे पहले वे जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ेंगे। जिस पर टीम बैरंग लौट आई। सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल ने बताया कि जमीन पर स्वास्थ्य विभाग को 2006 में स्थानांतरित की गई थी।
चारों ओर बाउंड्री भी की गई है। इस जमीन पर कुछ लोगों ने स्टे लिया था। जो कोर्ट ने खारिज कर दिया। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई भी जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधि संचालित न होने दी जाए।
40 सालों से रह रहे हैं लोग
जमीन को लेकर हाईकोर्ट में से स्टे लेने वाले अजीम इलाही का कहना है कि वे और उनके साथ ही करीब 10 परिवार इस जमीन पर 40 सालों से रह रहे हैं। कोर्ट से उनका स्टे खत्म हो गया है। स्टे बढ़वाने के लिए हाईकोर्ट में 23 को सुनवाई होनी है। इस जमीन पर उनके अलावा कई मकान हैं। जो उजड़ने के डर से सहमे हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग इस जमीन को खाली करवाकर यहां एक संयुक्त चिकित्सालय बनवाना चाहता है।