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पहले मामू की मिठाई खाने आते थे भालू
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Sun, 10 Jul 2016 11:59 PM IST
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हिमालयन भालू
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल नगर में लगभग छह दशक के बाद हिमालयन ब्लैक बीयर नजर आया तो लोगों के कौतूहल का विषय बन गया। नगर के हर घर, दुकान, चौराहे में दिनभर इसकी चर्चा रही। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें, वीडियो खूब शेयर हुए। कभी ऐसा भी दौर था कि नैनीताल में ऐसे भालू खुलेआम घूमते थे। मल्लीताल की एक मिठाई की दुकान पर तो भालू नियमित रूप से मिठाई के पत्तल चाटने आते थे और एक तरह से पिकनिक मनाते थे। नगर के बुजुर्गों को आज भी वह दृश्य याद हैं तब नैनीताल के ईद-गिर्द इनकी बड़ी संख्या थी।
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हिमालयन ब्लैक बीयर पूरे हिमालयी क्षेत्र सहित, चीन, रूस, जापान, भूटान के इलाकों में पाया जाता है, हालांकि इनकी संख्या तेजी से घट रही है। इसका मुख्य कारण वन क्षेत्र का घटना और इसकी पित्ती व अन्य अंगों का दवाओं में प्रयोग किया जाना है। करीब 35 वर्ष जीने वाला यह भालू वयस्क होने पर 150 से 200 किलो वजनी और साढ़े छह फुट तक लंबा होता है। आमतौर पर शाकाहारी यह भालू जरूरत पड़ने पर कीड़े, मकोडे़, छोटे जानवर, दीमक की बांबी, चीटियां आदि खाता है।
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पर्यावरणविद् अनूप साह के मुताबिक 1940 के दशक में मल्लीताल स्थित आनंद सिंह मामू की दुकान पर भालू अक्सर मिठाई के पत्तल चाटने आया करते थे। उनके पिता समाजसेवी चंद्र लाल साह ने अनेक बार भालुओं को वहां पत्तल चाटते देखा था। गंगोत्री क्षेत्र में अभी भी दुर्लभ भूरे भालू उन्होंने देखे हैं। मामू मिठाई की दुकान के पास ही रहने वाले समाजसेवी बुजुर्ग गंगा प्रसाद साह ने बताया कि उन्होंने स्वयं 1954 में अपने घर के सामने नाथ साह की दुकान के ईद-गिर्द भालू मंडराते देखे हैं।
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हिमालयन ब्लैक बीयर तराई में पाए जाने वाले स्थॉथ बीयर से बड़ा होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इंसान की तरह दो पैरों पर चल सकने की क्षमता है। एक बार में यह 400 मीटर तक पैदल चल सकता है। दौड़ने में यह 40 किमी.प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है। इसलिए भालू से सामना होने पर कभी भी भागना नहीं चाहिए बल्कि लेट जाना चाहिए। तब अमूमन यह हमला नहीं करता।
बताया जाता है कि 1955 के आसपास अयारपाटा क्षेत्र और पाषाण देवी के निकट दो भालू मारे गए थे तब भी उसकी व्यापक चर्चा हुई थी।
ह भालू 8 हजार फीट से ट्रीलाइन 14 हजार फीट तक क्षेत्र में ज्यादा मिलता है। नैनीताल के निकट लड़ियाकांटा व किलबरी के जंगलों में कभी यह बहुतायत से था। आज भी इन क्षेत्रों में इसे यदा कदा देखा जाता है। फोटोग्राफर राजीव दुबे ने हाल ही में 25 जून को नैनीताल-किलबरी मार्ग पर टांकी बैंड के निकट तीन भालुओं को देखा। बीते वर्ष किलबरी क्षेत्र में भी भालू देखे व उन्हें कैमरों में कैद किया। उस क्षेत्र में दर्जनों बांज के पेड़ों की टहनियां भी टूटी हैं जो भालुओं के वहां होने की निशानी है। टहनियां तोड़कर यह बांज की फली खाते हैं।
डीएफओ डा.पराग मधुकर धकाते ने बताया कि लड़ियाकांटा क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां घटी हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि इस क्षेत्र में भालुओं की संख्या बढ़ गई हो। डा.धकाते के मुताबिक यह भालू निश्चित रूप से लड़ियाकाटा से उतरकर आया है।