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बेस की डायलिसिस यूनिट बंद हुई, दौड़े अधिकारी
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हल्द्वानी। बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट बृहस्पतिवार के बंद होने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन में खलबली मच गई। सूचना मिलने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। बाद में अधिकारियों के समझाने के बाद डायलिसिस शुरू हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डायलिसिस के अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
बेस अस्पताल में डायलिसिस यूनिट पीपीपी मोड में एक संस्था के माध्यम से संचालित होती है। यहां पर प्रतिदिन करीब सत्तर लोगों की डायलिसिस की जाती है। संस्था का लंबित भुगतान का विषय काफी समय से बना हुआ। बीच-बीच में संस्था ने डायलिसिस बंद करने की बात कही थी, पर बाद में अधिकारियों से बातचीत के बाद सेवाओं को जारी रखा। बृहस्पतिवार को संस्था ने डायलिसिस का काम बंद कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की सूचना जिला प्रशासन को दी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी डीएस गर्ब्याल ने बताया कि डायलिसिस बंद होने की स्थिति में कोई अप्रिय घटना होती है, तो कड़े कदम उठाये जा सकते हैं। यह बात भी संस्था के लोगों को बताई गई थी। बाद में डायलिसिस शुरू हो गई। बेस अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सविता ह्यांकी का कहना है कि करीब दो बजे तक डायलिसिस यूनिट बंद रही। बाद में सेवाओं का संचालन सामान्य तौर पर शुरू हो गया। सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि संस्था के भुगतान को लेकर कार्रवाई चल रही है। विभाग डायलिसिस के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। वहीं, नेफ्रो केयर हेल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट सुखरन सिंह सलूजा का कहना है कि दो साल से भुगतान लंबित है। करीब दो करोड़ का भुगतान होना है। इसके लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग से अनुरोध किया जा चुका है। हर बार आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसलिए मजबूरीवश कदम उठाना पड़ा था, हालांकि पुन: आश्वासन मिलने के बाद सेवाओं को सामान्य कर दिया गया था।
अस्थायी अस्पताल का नहीं आया विस्तारीकरण का पत्र
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज में बने पांच सौ बेड के अस्थायी अस्पताल संचालन की अवधि 31 मार्च को पूरी हो गई। कालेज प्रबंधन के पास के आगे विस्तारीकरण के संबंध में शासन से कोई भी निर्देश नहीं मिले हैं। यहां और मेडिकल कालेज में कार्यरत करीब 110 कर्मचारियों के सेवा विस्तार के संबंध में भी कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
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कोविड की दूसरी लहर के बाद बने अस्थायी पांच सौ बेड अस्पताल को जून में तैयार किया गया था। पहले इसकी अवधि दिसंबर-2021 थी, बाद में इसे मार्च तक विस्तारित किया गया था। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि अस्थायी अस्पताल के आगे संचालन और कार्यरत कर्मियों के सेवा विस्तार को लेकर शासन से कोई भी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जो भी निर्देश होंगे, उसी के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बेस अस्पताल में डायलिसिस यूनिट पीपीपी मोड में एक संस्था के माध्यम से संचालित होती है। यहां पर प्रतिदिन करीब सत्तर लोगों की डायलिसिस की जाती है। संस्था का लंबित भुगतान का विषय काफी समय से बना हुआ। बीच-बीच में संस्था ने डायलिसिस बंद करने की बात कही थी, पर बाद में अधिकारियों से बातचीत के बाद सेवाओं को जारी रखा। बृहस्पतिवार को संस्था ने डायलिसिस का काम बंद कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की सूचना जिला प्रशासन को दी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी डीएस गर्ब्याल ने बताया कि डायलिसिस बंद होने की स्थिति में कोई अप्रिय घटना होती है, तो कड़े कदम उठाये जा सकते हैं। यह बात भी संस्था के लोगों को बताई गई थी। बाद में डायलिसिस शुरू हो गई। बेस अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सविता ह्यांकी का कहना है कि करीब दो बजे तक डायलिसिस यूनिट बंद रही। बाद में सेवाओं का संचालन सामान्य तौर पर शुरू हो गया। सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि संस्था के भुगतान को लेकर कार्रवाई चल रही है। विभाग डायलिसिस के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। वहीं, नेफ्रो केयर हेल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट सुखरन सिंह सलूजा का कहना है कि दो साल से भुगतान लंबित है। करीब दो करोड़ का भुगतान होना है। इसके लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग से अनुरोध किया जा चुका है। हर बार आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसलिए मजबूरीवश कदम उठाना पड़ा था, हालांकि पुन: आश्वासन मिलने के बाद सेवाओं को सामान्य कर दिया गया था।
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अस्थायी अस्पताल का नहीं आया विस्तारीकरण का पत्र
हल्द्वानी। मेडिकल कालेज में बने पांच सौ बेड के अस्थायी अस्पताल संचालन की अवधि 31 मार्च को पूरी हो गई। कालेज प्रबंधन के पास के आगे विस्तारीकरण के संबंध में शासन से कोई भी निर्देश नहीं मिले हैं। यहां और मेडिकल कालेज में कार्यरत करीब 110 कर्मचारियों के सेवा विस्तार के संबंध में भी कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
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कोविड की दूसरी लहर के बाद बने अस्थायी पांच सौ बेड अस्पताल को जून में तैयार किया गया था। पहले इसकी अवधि दिसंबर-2021 थी, बाद में इसे मार्च तक विस्तारित किया गया था। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि अस्थायी अस्पताल के आगे संचालन और कार्यरत कर्मियों के सेवा विस्तार को लेकर शासन से कोई भी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जो भी निर्देश होंगे, उसी के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।