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जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर ग्रामीण
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गरमपानी। आपदा के चार माह बीत जाने के बाद भी ग्रामीण आज भी बदहाल मार्गों पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं।
खैरना पुल से मझेड़ा और डोबा की तरफ पैदल मार्ग आपदा की भेंट चढ़ गया था। चार माह बीत जाने का बावजूद खस्ताहाल मार्ग को सही नहीं कर पाने से से स्कूली बच्चे और ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल 19 अक्टूबर को शिप्रा नदी में आई भारी तबाही से नदी किनारे काफी मात्रा में भू-कटाव होने से खैरना, मझेड़ा, डोबा, कीमू, दड़माड़ी, नौणा, सीम, व्यासी, अमटूनौली और सरस्वती शिशु मंदिर खैरना और राइंका खैरना को स्कूल आने जाने वाले स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के नजदीकी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का राशन और सामान ले जाने के लिए शिप्रा नदी से बनाए गई वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं कई ग्रामीण वैकल्पिक मार्ग के लंबा होने के चलते क्षतिग्रस्त मार्ग से ही जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। इससे कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
पैदल मार्ग के प्रभावित होने से फल और सब्जी उत्पादकों को घूमकर आना पड़ रहा है। नदी के रास्ते आने पर लोगों को बारिश में परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन को क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को जल्द सुचारु करना चाहिए। अनिल त्रिपाठी, पूर्व बीडीसी सदस्य मझेड़ा
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स्कूल में आने वाले 273 छात्र-छात्राओं के लिए शिप्रा नदी में अस्थायी पुल बनाकर बच्चों के लिए आने जाने का रास्ता तैयार किया गया है। बारिश में शिप्रा नदी का पानी बढ़ने से दूरदराज के ग्रामीणों और राइंका खैरना और अन्य स्कूल को आने जाने वाले लोग परेशान हैं। तुलसी प्रसाद भट्ट, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर खैरना
पैदल मार्ग के क्षतिगस्त होने से घर का सामान लाने और ले जाने में अधिक दूरी तय करने से परेशानी हो रही है। मार्ग को जल्द सही किया गया तो किसानों को सब्जी और फल पहुंचाने में अतिरिक्त दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। महेंद्र नेगी, निवासी चुवारी
पैदल मार्ग लंबे समय क्षतिग्रस्त पड़ा है। मार्ग की दशा सुधारने के लिए ज्ञापन सौंपे गए है। लेकिन मार्ग में कोई काम नही होने से रास्ते से आने जाने वाले लोग बेहद परेशान है। भाष्कर आर्य, ग्राम प्रधान मझेड़ा
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खैरना पुल से मझेड़ा और डोबा की तरफ पैदल मार्ग आपदा की भेंट चढ़ गया था। चार माह बीत जाने का बावजूद खस्ताहाल मार्ग को सही नहीं कर पाने से से स्कूली बच्चे और ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल 19 अक्टूबर को शिप्रा नदी में आई भारी तबाही से नदी किनारे काफी मात्रा में भू-कटाव होने से खैरना, मझेड़ा, डोबा, कीमू, दड़माड़ी, नौणा, सीम, व्यासी, अमटूनौली और सरस्वती शिशु मंदिर खैरना और राइंका खैरना को स्कूल आने जाने वाले स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के नजदीकी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का राशन और सामान ले जाने के लिए शिप्रा नदी से बनाए गई वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं कई ग्रामीण वैकल्पिक मार्ग के लंबा होने के चलते क्षतिग्रस्त मार्ग से ही जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। इससे कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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पैदल मार्ग के प्रभावित होने से फल और सब्जी उत्पादकों को घूमकर आना पड़ रहा है। नदी के रास्ते आने पर लोगों को बारिश में परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन को क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को जल्द सुचारु करना चाहिए। अनिल त्रिपाठी, पूर्व बीडीसी सदस्य मझेड़ा
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स्कूल में आने वाले 273 छात्र-छात्राओं के लिए शिप्रा नदी में अस्थायी पुल बनाकर बच्चों के लिए आने जाने का रास्ता तैयार किया गया है। बारिश में शिप्रा नदी का पानी बढ़ने से दूरदराज के ग्रामीणों और राइंका खैरना और अन्य स्कूल को आने जाने वाले लोग परेशान हैं। तुलसी प्रसाद भट्ट, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मंदिर खैरना
पैदल मार्ग के क्षतिगस्त होने से घर का सामान लाने और ले जाने में अधिक दूरी तय करने से परेशानी हो रही है। मार्ग को जल्द सही किया गया तो किसानों को सब्जी और फल पहुंचाने में अतिरिक्त दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। महेंद्र नेगी, निवासी चुवारी
पैदल मार्ग लंबे समय क्षतिग्रस्त पड़ा है। मार्ग की दशा सुधारने के लिए ज्ञापन सौंपे गए है। लेकिन मार्ग में कोई काम नही होने से रास्ते से आने जाने वाले लोग बेहद परेशान है। भाष्कर आर्य, ग्राम प्रधान मझेड़ा