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मशीन लाखों की और जांच सिर्फ थायरायड की
राजीव शुक्ला
Updated Sat, 17 Sep 2016 02:09 AM IST
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सुशीला तिवारी अस्पताल में लाखों रुपये से खरीदी गई मशीन सिर्फ थायरायड जांच में काम आ रही है, जबकि कई महंगी जांचें इस मशीन से कम दरों पर हो सकती हैं और गरीब मरीजों को राहत मिल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मेडिकल कालेज प्रशासन ने मशीन खरीदने से पहले और खरीदने के बाद जांचों की दरें शासन से पूछना मुनासिब नहीं समझा।
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वर्ष 2013 में लगभग 12 लाख रुपए से एम्यूनो एस एनायलाइजर मशीन खरीदी गई। मशीन से विटामिन बी 12, विटामिन डी, ट्यूमर मार्कर, कैंसर मार्कर, कार्डिक मार्कर, फर्टिलिटी समेत अन्य जांचें हो सकती हैं। ये काफी एडवांस मशीन मानी जाती है। मशीन खरीदने से पहले एसटीएच एवं मेडिकल कालेज प्रशासन को शासन से रेट तय करने होते हैं।
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शासन स्तर पर तय होता है कि कौन सी जांच कितने रुपए में होगी। मशीन खरीदने से पहले और बाद में भी दरों का निर्धारण नहीं कराया गया। लाखों की मशीन की वारंटी भी खत्म होने वाली है। कंपनी ने मशीन की सीएमसी (कंप्रेहेंसिव मेंटीनेंस कांट्रेक्ट) भी की है। इस मशीन में भी महंगा रीजेंट लगता है।
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सवाल ये उठता है कि शासन से दरें निर्धारित किए बिना मशीन क्यों खरीदी गई। मशीन से होने वाली आधुनिक जांचें निजी पैथालाजी में बहुत महंगी हैं। गरीब मरीज को सस्ती जांच की सुविधा एसटीएच में मिल सकती थी।
एसटीएच में आज भी कई जांचें बाहर से कराई जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो मशीन के लिए टेंडर हुआ था। टेंडर में तीन मशीनें चुनी गईं। तीनों मशीनों का डेमो दिल्ली जाकर देखा गया। तीन में एक मशीन अच्छी क्वालिटी की नहीं थी, जबकि दो समान गुणवत्ता की थीं।
बावजूद इसके फाइनेंसियल बिड सिर्फ एक ही कंपनी की निकाली गई। चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष स्याना का कहना है कि पुराना मामला होने के कारण उनकी जानकारी में नहीं है। इस मामले की वह स्वयं जांच कराएंगे। साथ ही प्राचार्य से रिपोर्ट तलब की जाएगी और पूछा जाएगा कि क्या नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। वर्ष 2013 का मामला है। इस बात की जांच कराई जाएगी कि शासन से दरें क्यों नहीं तय कराई गई। साथ ही बिड एक ही कंपनी की क्यों निकाली गई।
- डा. सीपी भैसोड़ा, प्रभारी प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज