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बड़े नेताओं के झगड़े में अमन ने तोड़ी चुप्पी
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Sun, 30 Oct 2016 01:20 AM IST
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एनएसयूआई
- फोटो : अमर उजाला
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एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष के चुनाव में एनएसयूआई की हार राजनीतिक मुद्दा बनने के बाद आखिरकार अमन सुयाल ने चुप्पी तोड़ी है। अमन सुयाल एनएसयूआई के प्रत्याशी थे और छात्रसंघ अध्यक्ष के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे।
अमन ने कहा कि हार उनकी नहीं बल्कि संगठन की हुई है। इसके लिए एनएसयूआई के पूर्व छात्रनेता और कांग्रेस के नेता जिम्मेदार हैं। अब इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
एमबीपीजी कॉलेज एनएसयूआई का गढ़ रहा है। इस साल चुनाव में एनएसयूआई को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसकी वजह आपसी गुटबाजी रही। एनएसयूआई के पूर्व छात्रनेता हर्षित जोशी को चुनाव लड़ाना चाहते थे।
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उनके दबाव में हर्षित जोशी को टिकट मिल गया, लेकिन हर्षित जोशी के बैक का पेपर न होने के कारण एनएसयूआई ने आखिरी समय में प्रत्याशी बदल दिया और अमन सुयाल को मैदान में उतारा।
अमन सुयाल को पूर्व एनएसयूआई के नेता पचा नहीं पाए और आपसी गुटबाजी से अमन सुयाल हार गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने हार की ठीकरा वित्तमंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश और उनके पुत्र सुमित हृदयेश पर फोड़ दिया।
इसके बाद से एनएसयूआई की हार राजनीति मुद्दा बना है। अमन सुयाल ने चुप्पी तोड़कर अपनी हार के एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। अमन ने कहा कि एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस की ठेकेदारी करने वालों ने संगठन की पीठ में छुरा भोंका है।
जिससे संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। अमन ने कहा कि एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर, पूर्व उप सचिव सुशील डूंगराकोटी, यूथ कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह प्रिंस, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सचिन जलाल, पूर्व एनएसयूआई प्रत्याशी सूरज नौला और हर्षित जोशी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अमन ने कहा कि ये सभी चुनावी ठेकेदार बन गए हैं। अमन ने कहा कि कुछ नेताओं के लिए यह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सभी ने मिलकर मुझे चौराहे पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन से ऐसे नेताओं को बाहर किया जाए और उसे निशाना न बनाया जाए।
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अमन ने कहा कि हार उनकी नहीं बल्कि संगठन की हुई है। इसके लिए एनएसयूआई के पूर्व छात्रनेता और कांग्रेस के नेता जिम्मेदार हैं। अब इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
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एमबीपीजी कॉलेज एनएसयूआई का गढ़ रहा है। इस साल चुनाव में एनएसयूआई को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसकी वजह आपसी गुटबाजी रही। एनएसयूआई के पूर्व छात्रनेता हर्षित जोशी को चुनाव लड़ाना चाहते थे।
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उनके दबाव में हर्षित जोशी को टिकट मिल गया, लेकिन हर्षित जोशी के बैक का पेपर न होने के कारण एनएसयूआई ने आखिरी समय में प्रत्याशी बदल दिया और अमन सुयाल को मैदान में उतारा।
अमन सुयाल को पूर्व एनएसयूआई के नेता पचा नहीं पाए और आपसी गुटबाजी से अमन सुयाल हार गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने हार की ठीकरा वित्तमंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश और उनके पुत्र सुमित हृदयेश पर फोड़ दिया।
इसके बाद से एनएसयूआई की हार राजनीति मुद्दा बना है। अमन सुयाल ने चुप्पी तोड़कर अपनी हार के एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। अमन ने कहा कि एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस की ठेकेदारी करने वालों ने संगठन की पीठ में छुरा भोंका है।
जिससे संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। अमन ने कहा कि एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर, पूर्व उप सचिव सुशील डूंगराकोटी, यूथ कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह प्रिंस, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सचिन जलाल, पूर्व एनएसयूआई प्रत्याशी सूरज नौला और हर्षित जोशी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अमन ने कहा कि ये सभी चुनावी ठेकेदार बन गए हैं। अमन ने कहा कि कुछ नेताओं के लिए यह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सभी ने मिलकर मुझे चौराहे पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन से ऐसे नेताओं को बाहर किया जाए और उसे निशाना न बनाया जाए।