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Nainital News: सात दशक बाद फिर जीजीआईसी में संचालित होंगी जीआईसी की कक्षाएं
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नैनीताल। सात दशक बाद फिर से राजकीय बालिका इंटर कॉलेज परिसर में जीआईसी की कक्षाएं संचालित होंगी, इसके लिए जीजीआईसी के परिसर में बिल्डिंग निर्माण का कार्य जल्द शुरू होगा। यहां स्थित रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान एवं जीव विज्ञान की लैब का ध्वस्त कर दिया है।
महावीर चक्र से सम्मानित कारगिल शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज तल्लीताल को जल्द ही जीजीआईसी में शिफ्ट होगा। शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका के पूर्व शिक्षक हेमंत बिष्ट बताते हैं कि राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना का श्रेय बाबू कृश्टोदास व वाचस्पति पंत को जाता है। उस समय यह विद्यालय शहर के अयारपाटा में था।
वर्ष 1910 से पहले यह विद्यालय डायमंड जुबली के नाम से जाना जाता था। कॉलेज की स्थापना वर्ष 1899 में हुई थी। वर्ष 1924 से 1953 तक यह विद्यालय राजकीय होने के साथ जीजीआईसी की बिल्डिंग में चला। 1946 में इसका इंटर तक उच्चीकरण किया गया। 1951 में नौ से 12 तक की कक्षाओं को डीएसबी परिसर से संबद्ध किया जबकि छह से 10 तक कक्षाओं के लिए हरिनगर में गोरखा सैनिकों की बैरकों का चयन किया गया। 1976 में इंटर की कक्षाएं वर्तमान बिल्डिंग में चलने लगीं।
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बलियानाला भूस्खलन के चलते सबसे पहले जीआईसी के खेल मैदान का बड़ा हिस्सा जमीदोंज हुआ जिसके बाद स्थायी सुरक्षा में स्कूल के कई भवन तोड़े गए। इसके चलते बलियानाले की स्थायी सुरक्षा की भेंट यह स्कूल चढ़ गया है। इस स्कूल के भवनों को जीजीआईसी में बनाया जाएगा।
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कोट
भवन के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नए भवनों के लिए डीपीआर बनाई जाएगी और टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। - पीके पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।
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महावीर चक्र से सम्मानित कारगिल शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर कॉलेज तल्लीताल को जल्द ही जीजीआईसी में शिफ्ट होगा। शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका के पूर्व शिक्षक हेमंत बिष्ट बताते हैं कि राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना का श्रेय बाबू कृश्टोदास व वाचस्पति पंत को जाता है। उस समय यह विद्यालय शहर के अयारपाटा में था।
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वर्ष 1910 से पहले यह विद्यालय डायमंड जुबली के नाम से जाना जाता था। कॉलेज की स्थापना वर्ष 1899 में हुई थी। वर्ष 1924 से 1953 तक यह विद्यालय राजकीय होने के साथ जीजीआईसी की बिल्डिंग में चला। 1946 में इसका इंटर तक उच्चीकरण किया गया। 1951 में नौ से 12 तक की कक्षाओं को डीएसबी परिसर से संबद्ध किया जबकि छह से 10 तक कक्षाओं के लिए हरिनगर में गोरखा सैनिकों की बैरकों का चयन किया गया। 1976 में इंटर की कक्षाएं वर्तमान बिल्डिंग में चलने लगीं।
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बलियानाला भूस्खलन के चलते सबसे पहले जीआईसी के खेल मैदान का बड़ा हिस्सा जमीदोंज हुआ जिसके बाद स्थायी सुरक्षा में स्कूल के कई भवन तोड़े गए। इसके चलते बलियानाले की स्थायी सुरक्षा की भेंट यह स्कूल चढ़ गया है। इस स्कूल के भवनों को जीजीआईसी में बनाया जाएगा।
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कोट
भवन के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही नए भवनों के लिए डीपीआर बनाई जाएगी और टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। - पीके पाठक, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।