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आदमखोर बाघिन फिर पहुंची गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर
Updated Tue, 18 Oct 2016 12:04 AM IST
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बाघिन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्षेत्र में पिछले 6 सितंबर यानी 42 दिनों से आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन सोमवार को फिर गोरखपुर पहुंच गई। बाघिन के देखे जाने के बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को फिर गोरखपुर गांव में अभियान चलाना पड़ा। बाघिन के फिर से गोरखपुर गांव में देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत के साथ ही आक्रोश है। सोमवार को भी रोज की तरह बाघिन को पकड़ने का अभियान चला लेकिन विभाग को कोई कामयाबी नहीं मिली।
एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि सुबह गोरखपुर गांव में मनोज डंगवाल के खेत के पास वाले नाले में आदमखोर बाघिन के पग मार्क मिले हैं। जिसके चलते सुबह से शाम तक गोरखपुर से तल्ला गोरखपुर तक नाले व खेतों को खोजा गया। इसके साथ ही खेतों में हांका, हाथियों से गश्त, जाल से घेराबंदी व कुत्तों से भी खोजबीन की गई साथ ही कई जगहों पर पिंजरे व कैमरा ट्रैप भी लगाए गए। विभाग को फिलहाल कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है। देर शाम मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं राजेंद्र सिंह बिष्ट, वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने भी गोरखपुर जाकर वन कर्मियों को भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने नालो में मचान, कैमरा लगाने की भी बात कही।
22 अक्तूबर को कार्बेट पार्क बंद करने के लिए अभियान जारी
रामनगर। ईको सेंसिटिव जोन विरोधी समिति ने 22 अक्तूबर प्रस्तावित कार्बेट पार्क बंद को सफल बनाने की अपील की है। इस संबंध में समिति की ग्राम ढेला, हिम्मतपुर डोटियाल व भवानीपुर गांव में बैठकें हुईं। बैठक को संबोधित करते हुए महेश जोशी ने कहा कि जब तक नरभक्षी बाघिन को नहीं मारा जाता और आबादी में आने वाले वन्य जीवों को मारने का अधिकार जनता को नहीं दिया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ललित उप्रेती ने कहा की 22 अक्तूबर को ढेला व बिजरानी गेट को बंद कर पर्यटकों की आवाजाही ठप की जाएगी। बैठक में रमेश अधिकारी, खीम सिंह, गोपाल मेहरा, चंपा देवी, जगदीश डोर्बी, पूरन राम, दुर्गा सिंह, नंदन सिंह, ललिता रावत, तुलसी रावत, हीरा सिंह, आशा करगेती, त्रिलोक सिंह, दिवान सिंह, माया देवी, पुष्पा नेगी, कमला देवी, कला देवी, शारदा देवी, राकेश चौहान, मुनीश कुमार, रेवाधर भट्ट, दिनेश पांडेय आदि थे।
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चालाक बाघिन अब समझने लगी कैमरा ट्रैप का मतलब
क्षेत्र में 42 दिनों से आतंक का सबब बनी चालाक बाघिन अब कैमरा ट्रैप के चक्रव्यूह को भी समझने लगी है। लगातार तीन दिनों से कई दर्जन कैमरा ट्रैप बाघिन के संभावित क्षेत्रों में लगे हुए हैं। इसके बावजूद वह कैमरा ट्रैप में कैद नहीं हो पा रही है। रविवार को भी शिकारी पिंजरे, भैंसो व बकरों के साथ बाघिन को मारने के लिए मोर्चा संभाले हुए थे। लेकिन चालाक बाघिन इन सब से हट कर कुछ दूरी से नाले को पार कर चलते बनी। सुबह कैमरा ट्रैप चेक करने पर तो वह उसमें कैद नहीं हो पाई लेकिन कुछ दूरी पर ही उसके पग मार्क मिलने से वन कर्मियों को एक बार फिर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अब वन कर्मियों ने अलग-अलग लोकेशन में जहां कैमरे लगाए हैं वहीं पिंजरे के सामने भी रास्ते में एक कैमरा ट्रैप लगाया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मंगलवार की सुबह चेक होने वाले कैमरों में कैद होती है या नहीं। बाघिन के कैमरे में कैद न होना और उसके पग मार्क मिलने से तो यहीं लगता है कि वह विभाग के द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप के चक्रव्यूह को समझने लगी है, जिससे वह दूर ही दूर रह रही है।
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एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि सुबह गोरखपुर गांव में मनोज डंगवाल के खेत के पास वाले नाले में आदमखोर बाघिन के पग मार्क मिले हैं। जिसके चलते सुबह से शाम तक गोरखपुर से तल्ला गोरखपुर तक नाले व खेतों को खोजा गया। इसके साथ ही खेतों में हांका, हाथियों से गश्त, जाल से घेराबंदी व कुत्तों से भी खोजबीन की गई साथ ही कई जगहों पर पिंजरे व कैमरा ट्रैप भी लगाए गए। विभाग को फिलहाल कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है। देर शाम मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं राजेंद्र सिंह बिष्ट, वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने भी गोरखपुर जाकर वन कर्मियों को भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने नालो में मचान, कैमरा लगाने की भी बात कही।
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22 अक्तूबर को कार्बेट पार्क बंद करने के लिए अभियान जारी
रामनगर। ईको सेंसिटिव जोन विरोधी समिति ने 22 अक्तूबर प्रस्तावित कार्बेट पार्क बंद को सफल बनाने की अपील की है। इस संबंध में समिति की ग्राम ढेला, हिम्मतपुर डोटियाल व भवानीपुर गांव में बैठकें हुईं। बैठक को संबोधित करते हुए महेश जोशी ने कहा कि जब तक नरभक्षी बाघिन को नहीं मारा जाता और आबादी में आने वाले वन्य जीवों को मारने का अधिकार जनता को नहीं दिया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ललित उप्रेती ने कहा की 22 अक्तूबर को ढेला व बिजरानी गेट को बंद कर पर्यटकों की आवाजाही ठप की जाएगी। बैठक में रमेश अधिकारी, खीम सिंह, गोपाल मेहरा, चंपा देवी, जगदीश डोर्बी, पूरन राम, दुर्गा सिंह, नंदन सिंह, ललिता रावत, तुलसी रावत, हीरा सिंह, आशा करगेती, त्रिलोक सिंह, दिवान सिंह, माया देवी, पुष्पा नेगी, कमला देवी, कला देवी, शारदा देवी, राकेश चौहान, मुनीश कुमार, रेवाधर भट्ट, दिनेश पांडेय आदि थे।
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चालाक बाघिन अब समझने लगी कैमरा ट्रैप का मतलब
क्षेत्र में 42 दिनों से आतंक का सबब बनी चालाक बाघिन अब कैमरा ट्रैप के चक्रव्यूह को भी समझने लगी है। लगातार तीन दिनों से कई दर्जन कैमरा ट्रैप बाघिन के संभावित क्षेत्रों में लगे हुए हैं। इसके बावजूद वह कैमरा ट्रैप में कैद नहीं हो पा रही है। रविवार को भी शिकारी पिंजरे, भैंसो व बकरों के साथ बाघिन को मारने के लिए मोर्चा संभाले हुए थे। लेकिन चालाक बाघिन इन सब से हट कर कुछ दूरी से नाले को पार कर चलते बनी। सुबह कैमरा ट्रैप चेक करने पर तो वह उसमें कैद नहीं हो पाई लेकिन कुछ दूरी पर ही उसके पग मार्क मिलने से वन कर्मियों को एक बार फिर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अब वन कर्मियों ने अलग-अलग लोकेशन में जहां कैमरे लगाए हैं वहीं पिंजरे के सामने भी रास्ते में एक कैमरा ट्रैप लगाया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मंगलवार की सुबह चेक होने वाले कैमरों में कैद होती है या नहीं। बाघिन के कैमरे में कैद न होना और उसके पग मार्क मिलने से तो यहीं लगता है कि वह विभाग के द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप के चक्रव्यूह को समझने लगी है, जिससे वह दूर ही दूर रह रही है।