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सेटेलाइट नक्शे की मदद से छांटा जोन एक और दो
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल।
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:54 AM IST
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हाईकोर्ट के निर्देश पर नैनीताल के अतिसंवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण यूसेक, भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के वैज्ञानिकों ने शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों ने बुधवार को सेटेलाइट से प्राप्त नक्शे के मुताबिक 888 प्वाइंट जोन एक और दो में चिन्हीत करने हैं।
यूसेक व भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के वैज्ञानिक झील विकास प्राधिकरण और लोनिवि के अधिकारियों के साथ शहर की संवेदनशील पहाड़ी सात नंबर पर पहुंचे। शांति और सुरक्षा के लिहाज से पुलिस कर्मी भी टीम के साथ मौजूद रहे।
इस दौरान पत्रकारों से वार्ता में भू-तत्व व खनिकर्म विभाग हल्द्वानी के उप निदेशक दिनेश कुमार व यूसेक के वैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने बताया कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीआईएस) के विशेषज्ञ वीके शर्मा ने वर्ष 1993 से 1995 तक नैनीताल के अतिसंवेदनशील और संवेदनशील स्थानों का सर्वे किया।
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जीआईएस की सर्वे रिपोर्ट 1998 में आई थी। इसके आधार पर लैंड्स स्लाइड हैजार्ज लोकेशन मैप जारी हुआ, जिसमें नैनीताल को अति संवेदनशील, संवेदनशील और कम संवेदनशील (जोन एक, दो, तीन व चार) भागों में बांटा गया।
उन्होंने बताया कि इस मैप में जोन एक और दो में 888 प्वाइंट दर्शाए गए हैं, लेकिन इन प्वाइंट को धरातल पर चिन्हीत नहीं किया गया है। इस बीच हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जोन एक व दो में बसे लोगों को पुनर्वासित करने की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन धरातल में जोन एक व दो की वास्तविक स्थिति का पता नहीं था।
इस बीच यूसेक के पास सेटेलाइट से प्राप्त नक्शे में दर्शाए गए स्थान को धरातल में ढूंढने के लिए अत्याधुनिक डीजीपीएस मशीन मौजूद है जिसकी मदद से नक्शे के स्थानों को धरातल में खोजना सरल है।
वैज्ञानिकों ने बुधवार को सात नंबर के कई स्थानों को जोन एक व दो में चिन्हीत किया। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम और प्रशासन का साथ मिलने पर सर्वे का कार्य दो माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम खराब होने पर डीजीपीएस मशीन के सिग्नल नहीं मिल पाते हैं, जबकि प्रशासन से लेबर, वाहन और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है। टीम में भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के वैज्ञानिक लेखराज, यूसेक के वैज्ञानिक सौरभ डंगवाल, संतोष रावत, सोहन सिंह, एलडीए के परियोजनाधिकारी सीएम साह, आनंद राम, बलबीर सिंह, लोनिवि के एमपीएस कालाकोटी, महेंद्र पाल आदि शामिल हैं।
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यूसेक व भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के वैज्ञानिक झील विकास प्राधिकरण और लोनिवि के अधिकारियों के साथ शहर की संवेदनशील पहाड़ी सात नंबर पर पहुंचे। शांति और सुरक्षा के लिहाज से पुलिस कर्मी भी टीम के साथ मौजूद रहे।
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इस दौरान पत्रकारों से वार्ता में भू-तत्व व खनिकर्म विभाग हल्द्वानी के उप निदेशक दिनेश कुमार व यूसेक के वैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने बताया कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीआईएस) के विशेषज्ञ वीके शर्मा ने वर्ष 1993 से 1995 तक नैनीताल के अतिसंवेदनशील और संवेदनशील स्थानों का सर्वे किया।
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जीआईएस की सर्वे रिपोर्ट 1998 में आई थी। इसके आधार पर लैंड्स स्लाइड हैजार्ज लोकेशन मैप जारी हुआ, जिसमें नैनीताल को अति संवेदनशील, संवेदनशील और कम संवेदनशील (जोन एक, दो, तीन व चार) भागों में बांटा गया।
उन्होंने बताया कि इस मैप में जोन एक और दो में 888 प्वाइंट दर्शाए गए हैं, लेकिन इन प्वाइंट को धरातल पर चिन्हीत नहीं किया गया है। इस बीच हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जोन एक व दो में बसे लोगों को पुनर्वासित करने की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन धरातल में जोन एक व दो की वास्तविक स्थिति का पता नहीं था।
इस बीच यूसेक के पास सेटेलाइट से प्राप्त नक्शे में दर्शाए गए स्थान को धरातल में ढूंढने के लिए अत्याधुनिक डीजीपीएस मशीन मौजूद है जिसकी मदद से नक्शे के स्थानों को धरातल में खोजना सरल है।
वैज्ञानिकों ने बुधवार को सात नंबर के कई स्थानों को जोन एक व दो में चिन्हीत किया। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम और प्रशासन का साथ मिलने पर सर्वे का कार्य दो माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम खराब होने पर डीजीपीएस मशीन के सिग्नल नहीं मिल पाते हैं, जबकि प्रशासन से लेबर, वाहन और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है। टीम में भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के वैज्ञानिक लेखराज, यूसेक के वैज्ञानिक सौरभ डंगवाल, संतोष रावत, सोहन सिंह, एलडीए के परियोजनाधिकारी सीएम साह, आनंद राम, बलबीर सिंह, लोनिवि के एमपीएस कालाकोटी, महेंद्र पाल आदि शामिल हैं।