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पानी में तैरने वाले ब्लाक से बन रहे मकान

Sat, 15 Nov 2014 05:31 AM IST
Nainital
Nainital Updated Sat, 15 Nov 2014 05:31 AM IST
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हल्द्वानी। मकान बनाने की सामग्री के विकल्प तेजी से मार्केट में आ रहे हैं, परिपाटी से हटकर कुछ नया करने का जज्बा रखने वाले लोग इसका बेहिचक प्रयोग कर रहे हैं। ऐसा ही एक ब्लाक बाजार में आया है, जो भूकंपरोधी, मजबूत होने के साथ इतना हल्का है कि वह पानी में भी आसानी से तैर जाता है। दावा है कि यह पानी में कई दिन तक रहने के बाद भी खराब नहीं होता है। चतुर सिंह करायल गांव में एक भवन तैयार हो रहा है, जिसका एक मंजिल तैयार भी हो चुकी है।
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पहाड़ और भाबर में मकान पहले पत्थर, लाइम से बनते थे। अब ईंट से मकान बनने लगे। पहाड़ और भाबर में ईंट की सप्लाई यूपी से निर्भर रहती है। यहां ईंट बरेली, शीशगढ़, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिलारी, चंदौसी, पकवाड़ा (मुरादाबाद) से आती है। उत्तराखंड में ऊधम सिंह नगर जिले से ईंट पहुंचती है। अब बाजार में ईंट के आटो क्लेव एरीटेडड कंक्रीट ब्लाक जैसेे विकल्प आ गए हैं। यह खास तरह का कहे जाने वाला ब्लाक कई खूबियों से लैस है। इससे चतुर सिंह करायल(हल्दूपोखरा नायक) में मकान बना रहे कौशल चौहान बताते हैं कि इस ब्लाक में 50 प्रतिशत कोयले की राख होती है। बाकी में चूना, रेत, सीमेंट, जिप्सम, एल्युमीनियम मिक्स होता है। यह किसी भी साइज का बन जाता है। वह 25 इंच लंबे और 9 इंच चौड़े ब्लाक से मकान तैयार करा रहे हैं। यह कई ईंट के बराबर होता है। इससे मकान एक फ्लोर तैयार कर लिया है। इससे तेजी से मकान तैयार हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि हल्का होने के कारण भूकंप आदि की स्थिति में यह सुरक्षा में मददगार होगा।
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मुख्य बातें
- एक ब्लाक की कीमत 165 है।
- नोएडा, हैदराबाद, चंडीगढ़ में निर्माण और मार्केटिंग होती है।
- हल्का और मजबूत होता है।
- दावा है कि ठंड में गर्म और गर्म में यह मकान को ठंडा रखने में मददगार होता है।
- तेजी से मकान बनता है, रेता, मजदूरी आदि की लागत कम आती है।
- सीलन नहीं आती है, कालम और बीम के सहारे मकान तैयार किया जाता है।
मकान बनाने में रखें ध्यान
अगर मकान बनाने जा रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें। मसलन स्टोन क्रशर से दो तरह का रेत मिलता है। इसमें एक रेत धुला और दूसरा कटा होता है। मिस्त्री इनका इस्तेमाल प्लास्तर से लेकर चिनाई में अलग-अलग हिसाब से करते हैं। कई बार रेत में राख मिलाने की बात कही जाती है, जिसकी जांच पानी की बाल्टी में डालकर कर सकते हैं। राख होगी, तो वह ऊपर आ जाएगी। इसी तरह फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड क्लास की ईंट के अलावा चटका ईंट आती है। इनकी लंबाई, चौड़ाई से लेकर वजन तक में अंतर होता है। इसका पता करना चाहिए। ईंट को पकाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन से उसकी गुणवत्ता निर्भर करती है।
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सीमेंट चौखट का बढ़ा रुझान
सीमेंट चौखट की खासियत के चलते लोगों का रुझान बढ़ने लगा है। रुद्रपुर स्थित शैलजा फार्म स्थित सत्यम डेवलपर्स स्वामी अजय मित्तल पिछले करीब डेढ़ वर्षों से सीमेंट, रेत, सरिया के मिश्रण से तैयार आकर्षक चौखटें बना रहे हैं। कब्जा लगाने के लिए इनमें विशेष पदार्थ से तैयार गुटका (टुकड़ा) भी लगाया जाता है। ये चौखटें मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक हैं। इनमें दीमक का खतरा नहीं होता है, इसके अलावा मौसम से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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