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40 एकड़ सरकारी भूमि की बिक्री से मची खलबली

Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
Nainital
Nainital Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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हल्द्वानी। उत्तराखंड में भूमाफिया, अफसर और सफेदपोशों के गठजोड़ के आगे सरकार नतमस्तक है। सरकारी जमीनों पर इनकी गिद्ध दृष्टि है। भूमाफिया प्रदेश में अरबों रुपए की सरकारी जमीन बेचकर डकार चुके हैं। बरेली रोड बेरीपड़ाव स्थित भगवानपुर में 80 एकड़ सीलिंग भूमि में से 40 एकड़ बेचने का सनसनीखेज मामला उजागर होने से शासन एवं प्रशासन में खलबली मची है। 400 करोड़ लागत की सीलिंग भूमि हल्द्वानी के पांच लोगों के नाम दर्ज की गई है। पांच लोग एक ही परिवार के सदस्य और रसूखदार हैं। भाजपा नेता हुकुम सिंह कुंवर और रमेश चंद्र कर्नाटक ने सीलिंग भूमि का फर्जी ढंग से खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगाई है। सीओ ने लालकुआं पुलिस से पूरी रिपोर्ट मांगी है। नीलांचल कालोनी फार्म नंबर तीन मुखानी निवासी रमेश चंद्र कर्नाटक के मुताबिक बेरीपड़ाव स्थित 80 एकड़ जमीन का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन था। यह मामला केसर शुगर मिल बनाम प्रदेश सरकार था और मुकदमा 1977 से चल रहा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 मार्च 2012 को सुनवाई करते हुए जमीन को सीलिंग घोषित कर दिया था। 12 दिसंबर 2012 को खतौनी में प्रदेश सरकार का नाम भी दर्ज हो गया। रमेश चंद्र कर्नाटक का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश से पूर्व ही मामला जब अदालत में विचाराधीन था तभी हल्द्वानी के एक प्रभावशाली परिवार ने सीलिंग भूमि को खुर्दबुर्द कर दिया। 22 अप्रैल 2011 को तत्कालीन रजिस्ट्रार ने मुंबई के बालेश्वर रोड फ्यूनिका मेसमेंट फ्लोर 59 बी निवासी पन्ना जीवन लाल पत्नी स्वर्गीय जीवन लाल को विवादित जमीन की मालकिन मानते हुए हल्द्वानी के रसूखदार परिवार के पांच सदस्यों के नाम 40 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री कर दी। अभिलेखों के मुताबिक जमीन दो करोड़ 90 लाख में बेची गई। रजिस्ट्रार जमीन की रजिस्ट्री करने खुद क्रेताओं के घर गए। रजिस्ट्री में सीलिंग का सर्टिफिकेट भी नहीं लगाया गया। तत्कालीन अपर आयुक्त ने 20 दिसंबर 2012 को पांचों क्रेताओं के नाम दाखिल खारिज करने का आदेश दे दिए। रमेश कर्नाटक के मुताबिक इस फर्जीवाड़े की शिकायत उन्होंने वित्तमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, प्रमुख सचिव राजस्व से की। प्रमुख सचिव राजस्व डीएस गर्ब्याल ने इस पर अपर आयुक्त के आदेश को स्थगित कर दिया। लेकिन 25 अगस्त 2014 को मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने अपर आयुक्त के आदेश को बहाल कर दिया। मामला मुख्यमंत्री दरबार पहुंचने से हाई प्रोफाइल हो गया और देहरादून राजस्व परिषद ट्रांसफर हो गया। क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
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एसपी सिटी पंकज भट्ट का कहना है कि यह मामला राजस्व से जुड़ा है। राजस्व अधिकारी जमीन की जांच करेंगे और जिलाधिकारी ही इस विवाद को एसआईटी से हल कराएंगे। राजस्व की रिपोर्ट पर पुलिस कार्रवाई करेगी। सीओ जीसी टम्टा का कहना है कि प्रार्थनापत्र लालकुआं थाने भेज दिया है। पुलिस से इस जमीन के बाबत रिपोर्ट मांगी गई है। सीबीआई जांच कराए सरकार
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हुकुम सिंह कुंवर और रमेश चंद्र कर्नाटक ने भूमि घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। इनका कहना है कि केसर शुगर मिल की उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में अरबों की संपत्ति है। भगवानपुर में 80 एकड़ भूमि इलाहाबाद हाईकोर्ट से सीलिंग में दर्ज हो चुकी है। उक्त भूमि में से 40 एकड़ भूमि की फर्जी कागजों से खरीद फरोख्त हो चुकी है। मामला राजस्व परिषद में है। मिनिस्टीरियल कर्मियों की हड़ताल से मामले की सुनवाई लटकी है।
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