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माल्टा, संतरे और नींबू का उत्पादन गिरा

Mon, 23 Dec 2013 05:49 AM IST
Nainital
Nainital Updated Mon, 23 Dec 2013 05:49 AM IST
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हल्द्वानी। पहाड़ के लोगों की आजीविका का आधार रहे सिट्रस (माल्टा, संतरा, गलगल और नींबू) का उत्पादन तेजी से गिर रहा है। तापमान के अलावा पुराने पेड़ों को लगने वाली डाईबैक्स बीमारी का बड़ा कारण है। उत्पादन में कमी के साथ ही इसका स्वाद भी फीका हुआ है। पिछले एक दशक में पिथौरागढ़ जिले में ही सिट्रस के उत्पादन में करीब एक हजार मीट्रिक टन की कमी आई है। अल्मोड़ा और नैनीताल में भी इसका असर हुआ है।
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उत्तराखंड में करीब 27,951 हेक्टेयर में सिट्रस का उत्पादन होता है और 4.95 एमटी प्रति हेक्टेयर इसकी उत्पादकता है। 2011-2012 में करीब 1,38,450 मीट्रिक टन सिट्रस प्रदेश में हुआ, इसमें चमोली में सबसे अधिक करीब 42,200 एमटी, अल्मोड़ा में करीब 33,554 एमटी और पिथौरागढ़ में करीब 18500 एमटी सिट्रस का उत्पादन हुआ, यदि वर्ष 2000 से तुलना की जाए तो पिथौरागढ़ में ही करीब एक हजार एमटी सिट्रस का उत्पादन गिरा है, इसका मुख्य कारण तापमान में आई बढ़ोतरी है। माल्टा उत्पादन के लिए करीब आठ डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, जबकि संतरा 12 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर होता है, लेकिन पिछले सालों में ठंड के दिनों भी पहाड़ों का अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आ रहा है, इससे माल्टा और संतरे का स्वाद भी बिगड़ा है। तापमान के अलावा डाईबैक्स बीमारी से भी उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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डाईबैक्स बीमारी पुराने पेड़ों को लगातार खत्म कर रही है, इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, नया प्लांटेशन हर साल किया जाता है। इसके अलावा उत्पादन पर भी विभाग नजर रखता है। सिट्रस उत्पादन का पता किसानों से बातचीत, तमाम योजनाओं के तहत दिए गए पौधों की गिनती और कर्मचारी पेड़ों को देखकर करते हैं।
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-डा. आईए खान, उद्यान निदेशक
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