इस कलंक से कैसे बचेगा अपना हल्द्वानी?

Nainital Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। शहर छोटा हो या बड़ा उसकी शक्ल सुंदर बनाने के लिए स्वच्छता जरूरी है। हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार कहा जाता है। जाहिर है कुमाऊं जाने वालों को सबसे पहले खूबसूरती भी यहीं से दिखनी चाहिए, मगर ये बात सिर्फ कहने तक अच्छी लगती है। क्योंकि इस शहर पर गंदगी का जो कलंक लगा है वह खत्म होने के बजाए लगातार बढ़ रहा है। वह भी तब, जब सफाई रखने वालों को सफाई के लिए महीने में लाखों रुपये मिलते हैं। नगर निगम की कारस्तानी ने पहले हल्द्वानी की जीवनदायिनी गौला को प्रदूषित किया तो अब खाली प्लाट और मैदान निगम के निशाने पर हैं।
हल्द्वानी शहर प्रतिदिन 60 टन कूड़ा उगलता है। नगर निगम के कूड़ा वाहन जैविक और अजैविक कूड़े को एकसाथ उठाते हैं। इस कूड़े को ठिकाने लगाने की जगह और कहीं नहीं बल्कि गौला नदी का किनारा है। इस नदी को करीब एक किलोमीटर तक गंदगी के ढेर से पाटा गया है। अगर बात शहर के आंतरिक हिस्से की करें तो खाली प्लाट और मैदानों को भी कूड़ाघर बनाया गया है। डिग्री कालेज के ठीक पीछे स्थित एक बड़े मैदान का आधे हिस्से में पालीथिन और घरों से निकला कचरा पटा पड़ा है। यहां से उठती दुर्गंध करीब 500 मीटर के एरिया तक अपना साम्राज्य बनाए हुए है।
ये मैदान तो बस एक बानगीभर है। गंदगी की तस्वीर शहर के कोने-कोने में एक जैसी है। यह कूड़ा घरों से निकलता है और निगम के वाहन सिर्फ सड़कों पर ही दौड़कर तेल फूंकते हैं। खाली प्लाट कूड़े से भरे पड़े हैं। रामपुर रोड, बरेली रोड, कालाढुंगी और काठगोदाम रोड हर तरफ का यही हाल है। कालोनियों की हालत और बदतर है। ग्रीन-क्लीन हल्द्वानी के नाम पर गंदगी का धब्बा अपना दायरा लगातार बढ़ा रहा है, मगर खूबसूरती को बचाने वाला यहां शायद कोई नहीं।
इंसेट
वरना बची रहती खूबसूरती
कूड़ा निस्तारण के लिए अगर समय पर ट्रचिंग ग्राउंड बन गया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। कई सालों से ट्रचिंग ग्राउंड का मामला लटका हुआ है। भविष्य में भी यह बन पाएगा, कहा नहीं जा सकता। कभी वन भूमि का पेंच लगने के बहाने होते हैं तो कभी कुछ और। इसी के चलते शहर को ही निगम ट्रचिंग ग्राउंड बनाने पर तुला है। जहां कूड़े का निस्तारण नहीं होता, बल्कि सिर्फ गंदगी बढ़ती है।
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नगर निगम को लोगों का सहयोग नहीं मिलता। जहां भी मन आए वहां कूड़ा फैला दिया जाता है। जबकि हर जगह कंटेनर लगाए गए हैं। अगर जनसहयोग रहे तो गंदगी इस तरह नहीं फैलेगी। -बीएस चलाल, अपर मुख्य नगर अधिकारी।

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