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मेडिकल कालेज में फौजी शासन
Nainital
Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। मेडिकल कालेज में फौजी पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों ने कमान संभाली हुई है।। कालेज प्राचार्य से लेकर विभागाध्यक्ष और डाक्टर तक फौजी पृष्ठभूमि से हैं। कई तकनीकी कर्मी भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित पहले सेना में थे। वह कर्नल पद से रिटायर हुए और उन्होंने मेडिकल कालेज में प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष का पद संभाला। हाल में चिकित्सा अधीक्षक पद को संभालने वाले डा. एके तिवारी भी कर्नल पद से रिटायर हुए है। सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष पद की कमान भी सेना से जुड़े से पूर्व अधिकारी के पास है। इस डिपार्टमेंट के हेड प्रो. कर्नल एचएस रावत भी कर्नल पद पर रह चुके हैं। दूसरे विभागों में फौजी हैं। एनस्थीसिया डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर डा. ज्ञानचंद भी मेडिकल कालेज में आने से पहले सेना में सेवा दे चुके हैं, वह कर्नल पद पर थे। इमरजेंसी में कैजुअल्टी मेडिकल अफसर डा. एमएस देउपा मेडिकल कालेज ज्वाइन करने से पहले सेना में कैप्टन थे, इन दिनों वह पीजी कोर्स करने बाहर गये हुए हैं। कई तकनीशियन कर्मी भी सेना में नौकरी करने के बाद आये हैं। कुमाऊं में सेना का लंबे समय समय से क्रेज रहा है इस कारण तुलनात्मक तौर पर यहां पूर्व सैन्य कर्मी अधिक हैं।
सेंसरशिप की लागू
हल्द्वानी। निजाम बदलने के बाद मेडिकल कालेज में सूचनाओं को लेकर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब कोई भी डाक्टर से लेकर कर्मी बीमारी, इलाज से लेकर नीतिगत आदि कोई बात या बयान सार्वजनिक तौर पर नहीं दे सकेगा।। यह फरमान भी विभागाध्यक्षों के पास पहुंच गया है।
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मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित पहले सेना में थे। वह कर्नल पद से रिटायर हुए और उन्होंने मेडिकल कालेज में प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष का पद संभाला। हाल में चिकित्सा अधीक्षक पद को संभालने वाले डा. एके तिवारी भी कर्नल पद से रिटायर हुए है। सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष पद की कमान भी सेना से जुड़े से पूर्व अधिकारी के पास है। इस डिपार्टमेंट के हेड प्रो. कर्नल एचएस रावत भी कर्नल पद पर रह चुके हैं। दूसरे विभागों में फौजी हैं। एनस्थीसिया डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर डा. ज्ञानचंद भी मेडिकल कालेज में आने से पहले सेना में सेवा दे चुके हैं, वह कर्नल पद पर थे। इमरजेंसी में कैजुअल्टी मेडिकल अफसर डा. एमएस देउपा मेडिकल कालेज ज्वाइन करने से पहले सेना में कैप्टन थे, इन दिनों वह पीजी कोर्स करने बाहर गये हुए हैं। कई तकनीशियन कर्मी भी सेना में नौकरी करने के बाद आये हैं। कुमाऊं में सेना का लंबे समय समय से क्रेज रहा है इस कारण तुलनात्मक तौर पर यहां पूर्व सैन्य कर्मी अधिक हैं।
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सेंसरशिप की लागू
हल्द्वानी। निजाम बदलने के बाद मेडिकल कालेज में सूचनाओं को लेकर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब कोई भी डाक्टर से लेकर कर्मी बीमारी, इलाज से लेकर नीतिगत आदि कोई बात या बयान सार्वजनिक तौर पर नहीं दे सकेगा।। यह फरमान भी विभागाध्यक्षों के पास पहुंच गया है।
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