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84 दिन बाद सीमांकन की तारीख हो पाई तय
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sun, 23 Oct 2016 01:52 AM IST
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सरकारी निजाम में कामकाज कैसे होता है? उसका उदाहरण रेलवे की भूमि पर कब्जे का मामला है। 30 जुलाई को लंबी कवायद के बाद प्रशासन और रेलवे की संयुक्त मीटिंग हुई थी। इसमें तय हुआ था कि कब्जेदार किस विभाग की भूमि पर काबिज हैं, इसे चिह्नित (सीमांकन) किया जाए।
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इसके बाद कब्जेदार परिवारों का सर्वे कर कब्जा हटाया जाए। स्थिति यह है कि केवल सीमांकन की तारीख तय करने में 84 दिन लग गए। डीएम की अध्यक्षता में शनिवार को संयुक्त मीटिंग कैंप कार्यालय में हुई। इसमें तय हुआ कि 7 नवंबर से सीमांकन किया जाएगा।
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रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण का मामला कोर्ट में चल रहा है। पहले प्रशासन और रेलवे एक-दूसरे को सहयोग न करने की बात कहते रहे। अंत में 30 जुलाई को मीटिंग में कब्जा हटाने की रणनीति बनाई गई।
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किस-किस विभाग की भूमि पर कब्जा है, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में तय हुआ कि प्रशासन, रेलवे भूमि का अपने अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कर लें। इसके बाद कब्जेदार परिवारों का सर्वे होगा। पर सीमांकन का काम तय करने में ही 84 दिन का समय लग गया है।
बीच में आए रेलवे के अधिकारी प्रशासन को सहयोग न करने का आरोप लगाते रहे थे। आखिरकार शनिवार को हुई मीटिंग में तय हुआ कि रेलवे, प्रशासन, नगर निगम और वन विभाग संयुक्त रूप से सीमांकन के कार्य में शामिल होंगे।
इसके बाद अगला चरण शुरू होगा। मीटिंग में एडीएम आरडी पालिवाल, एसडीएम एपी वाजपेयी, सिटी मजिस्ट्रेट केके मिश्रा आदि अधिकारी शामिल थे।