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एवरेस्ट से कूड़ा हटाना है, क्या कोई मदद करेगा
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:16 AM IST
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हल्द्वानी। सात बार एवरेस्ट फतह करने वाले लवराज धमसत्तू अब एवरेस्ट से कूड़ा हटाने के लिए प्रायोजक भी खोज रहे हैं। लवराज को अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। लवराज की चिंता में एवरेस्ट के आसपास बर्फ में दबे करीब 250 शव भी हैं जिन्हें हटाया जाना जरूरी है।
हल्द्वानी पहुंचे लवराज के मुताबिक वह दो साल से ऐसी कंपनी खोज रहे हैं जो एवरेस्ट से कूड़ा हटाने के काम को कर सके। लवराज का अनुमान है कि इस काम में करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे और भारी निवेश को देखते हुए कोई कंपनी अब तक तैयार नहीं हुई है। मुसीबत यह है कि एवरेस्ट में कूड़े का ढेर लगातार बढ़ रहा है और एवरेस्ट पर चढ़ाई के व्यवसायीकरण और राज्य सरकारों की प्रोत्साहन की नीति इस कचरे के ढेर में इजाफा करने वाली साबित हो रही है।
एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी करने वालों को हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकारें पैसे के साथ ही उच्च पदों पर बिठा रही है। इससे एवरेस्ट फतह करने की होड़ को बढ़ावा मिल रहा है। अप्रशिक्षित और पर्वतारोहण से वास्ता न रखने वाले भी एवरेस्ट की ओर जा रहे हैं। ऐसे अधिकतर लोगों की वजह से ही एवरेस्ट मेें कचरा अधिक मात्रा में डंप हो रहा है।
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हल्द्वानी पहुंचे लवराज के मुताबिक वह दो साल से ऐसी कंपनी खोज रहे हैं जो एवरेस्ट से कूड़ा हटाने के काम को कर सके। लवराज का अनुमान है कि इस काम में करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे और भारी निवेश को देखते हुए कोई कंपनी अब तक तैयार नहीं हुई है। मुसीबत यह है कि एवरेस्ट में कूड़े का ढेर लगातार बढ़ रहा है और एवरेस्ट पर चढ़ाई के व्यवसायीकरण और राज्य सरकारों की प्रोत्साहन की नीति इस कचरे के ढेर में इजाफा करने वाली साबित हो रही है।
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एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी करने वालों को हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल की सरकारें पैसे के साथ ही उच्च पदों पर बिठा रही है। इससे एवरेस्ट फतह करने की होड़ को बढ़ावा मिल रहा है। अप्रशिक्षित और पर्वतारोहण से वास्ता न रखने वाले भी एवरेस्ट की ओर जा रहे हैं। ऐसे अधिकतर लोगों की वजह से ही एवरेस्ट मेें कचरा अधिक मात्रा में डंप हो रहा है।
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