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आजीवन दुख झेलती रही 1965 की वीरांगना को मिला न्याय
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:56 AM IST
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हल्द्वानी। 1965 की वीरांगना को सरकारी सिस्टम ने काफी आहत किया। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के प्रयास से वीरांगना को उदारीकृत पेंशन स्वीकृत हो गई है। अब वीरांगना को एरियर भी मिलेगा। वर्षों बाद न्याय मिलने से वीरांगना काफी खुश हो गई है।
ऊधमसिंह नगर जिले के रमपुरा सुलतानपुर निवासी राम प्यारी 1965 में शहीद नायब सूबेदार सोहनलाल की वीरांगना हैं। वीरांगना राम प्यारी ने जिला सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों को बताया कि 1947 में देश का विभाजन होने के बाद पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं पर काफी अत्याचार हुए। इससे भयभीत होकर उनका परिवार पाक अधिकृत कश्मीर से भागकर शरणार्थी के रूप में भारत आया। राम प्यारी की शादी धनपत राय के पुत्र सोहनलाल से हुई, जो भारतीय सेना में 15 अप्रैल 1942 में तोपखाना रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। जालंधर स्थित शरणार्थी शिविर से परिवार ऊधमसिंह नगर के पिपलिया बाजपुर में रहने लगा। यहां सरकार की ओर से भूमि आवंटित की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की सरकार ने 500 रुपये की मदद की थी।
राम प्यारी के पुत्र सुरेंद्र शर्मा के अनुसार 1965 में चीन से युद्ध शुरू होने पर उनके पिता घर नहीं आए। उन्होंने गूलरभोज रेलवे स्टेशन पर मुलाकात की थी। घर तार आने पर शहीद होने की जानकारी मिली थी। राम प्यारी की दो बेटियां और तीन बेटे हैं।
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पति के शहादत होने पर बड़े बेटे की उम्र 15 साल की थी। राम प्यारी को 1971 भारत पाक युद्ध के पारिवारिक पेंशन स्वीकृत हुई। पहले नैनीताल कोषागार से पेंशन मिलती थी। प्रावधान बदलने पर 1985 में बैंक ऑफ बड़ौदा सुलतानपुर पट्टी से पेंशन मिलने लगी। पेंशन काफी कम मिलने पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से संपर्क किया। इस मामले में बैंक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अब वीरांगना राम प्यारी को उदारीकृत पेंशन के तहत एरियर भी मिलेगा।
उम्र के चौैथे पड़ाव में मिलेगी उदारीकृत पेंशन, एरियर
ऊधमसिंह नगर निवासी वीरांगना को सरकारी सिस्टम ने किया आहत
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ऊधमसिंह नगर जिले के रमपुरा सुलतानपुर निवासी राम प्यारी 1965 में शहीद नायब सूबेदार सोहनलाल की वीरांगना हैं। वीरांगना राम प्यारी ने जिला सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों को बताया कि 1947 में देश का विभाजन होने के बाद पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं पर काफी अत्याचार हुए। इससे भयभीत होकर उनका परिवार पाक अधिकृत कश्मीर से भागकर शरणार्थी के रूप में भारत आया। राम प्यारी की शादी धनपत राय के पुत्र सोहनलाल से हुई, जो भारतीय सेना में 15 अप्रैल 1942 में तोपखाना रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। जालंधर स्थित शरणार्थी शिविर से परिवार ऊधमसिंह नगर के पिपलिया बाजपुर में रहने लगा। यहां सरकार की ओर से भूमि आवंटित की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की सरकार ने 500 रुपये की मदद की थी।
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राम प्यारी के पुत्र सुरेंद्र शर्मा के अनुसार 1965 में चीन से युद्ध शुरू होने पर उनके पिता घर नहीं आए। उन्होंने गूलरभोज रेलवे स्टेशन पर मुलाकात की थी। घर तार आने पर शहीद होने की जानकारी मिली थी। राम प्यारी की दो बेटियां और तीन बेटे हैं।
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पति के शहादत होने पर बड़े बेटे की उम्र 15 साल की थी। राम प्यारी को 1971 भारत पाक युद्ध के पारिवारिक पेंशन स्वीकृत हुई। पहले नैनीताल कोषागार से पेंशन मिलती थी। प्रावधान बदलने पर 1985 में बैंक ऑफ बड़ौदा सुलतानपुर पट्टी से पेंशन मिलने लगी। पेंशन काफी कम मिलने पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से संपर्क किया। इस मामले में बैंक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अब वीरांगना राम प्यारी को उदारीकृत पेंशन के तहत एरियर भी मिलेगा।
उम्र के चौैथे पड़ाव में मिलेगी उदारीकृत पेंशन, एरियर
ऊधमसिंह नगर निवासी वीरांगना को सरकारी सिस्टम ने किया आहत