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प्राइवेट अस्पताल संचालकों का 25 से बंदी का एलान
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हल्द्वानी। क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट (सीइए) के नियमों का अनुपालन न कर पाने की मजबूरी के चलते आईएमए ने 25 दिसंबर से शहर के सभी निजी अस्पताल बंद करने का निर्णय लिया है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी और सचिव डॉ. महेश शर्मा ने एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीइए के मानकों के कारण मरीजों का इलाज काफी महंगा हो जाएगा। सीइए के नियम और मानक सख्त हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता हुई थी मगर कोई नतीजा नहीं निकला। सीइए को लेकर पांच जनवरी तक का समय दिया गया है। इसके बाद प्रशासन अस्पतालों को बंद करने की कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सीइए से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। डॉ. आरए केडिया ने कहा कि सीइए में दस हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड है और पुलिस की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार ने भी सीइए के अनुपालन नहीं किया है।
डॉ. केडिया ने कहा कि सरकार को डाक्टर मिल नहीं रहे हैं और निजी अस्पतालों पर सारे मानक थोपे जा रहे हैं। ओखलकांडा मेें टेलीमेडिसिन का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था और व्यवस्था धड़ाम हो चुकी है। महिला अस्पताल हल्द्वानी के हालात भी बदतर हैं। बेस अस्पताल डाक्टर विहीन हो चुका है। मेडिकल कालेज में डाक्टरों की कमी है। इस दौरान डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. डीसी पंत, डॉ. प्रदीप पांडे, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. अजय पांडे, डॉ. महेश कुमार, डॉ. संदीप अग्रवाल आदि थे।
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आंदोलन की रूप रेखा
- 22 दिसंबर को काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध।
-23 दिसंबर को शाम को ओपीडी में मरीज नहीं देखेंगे।
-24 दिसंबर को मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर देंगे। हालांकि पहले से भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा।
-25 दिसंबर से सभी निजी अस्पताल स्वेच्छा से बंद कर देंगे।
डॉ. पंत अध्यक्ष और डॉ. पांडे बने सचिव
हल्द्वानी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हल्द्वानी का चुनाव हो गया है। डॉ. डीसी पंत को अध्यक्ष और डॉ. प्रदीप पांडे को सचिव चुना गया है। 23 दिसंबर को एक निजी होटल में दोनों ही पदाधिकारियों को शपथ दिलाने के साथ कार्यभार सौंपा जाएगा।
सीइए के नियमों का अनुपालन न कर पाने के कारण आईएमए मुखर, कहा- एक्ट से बढ़ेगा इंस्पेक्टर राज
30 निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं शहर में
3500 से 4000 मरीज देखते हैं प्राइवेट डॉक्टर
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी और सचिव डॉ. महेश शर्मा ने एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीइए के मानकों के कारण मरीजों का इलाज काफी महंगा हो जाएगा। सीइए के नियम और मानक सख्त हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता हुई थी मगर कोई नतीजा नहीं निकला। सीइए को लेकर पांच जनवरी तक का समय दिया गया है। इसके बाद प्रशासन अस्पतालों को बंद करने की कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सीइए से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। डॉ. आरए केडिया ने कहा कि सीइए में दस हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड है और पुलिस की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार ने भी सीइए के अनुपालन नहीं किया है।
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डॉ. केडिया ने कहा कि सरकार को डाक्टर मिल नहीं रहे हैं और निजी अस्पतालों पर सारे मानक थोपे जा रहे हैं। ओखलकांडा मेें टेलीमेडिसिन का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था और व्यवस्था धड़ाम हो चुकी है। महिला अस्पताल हल्द्वानी के हालात भी बदतर हैं। बेस अस्पताल डाक्टर विहीन हो चुका है। मेडिकल कालेज में डाक्टरों की कमी है। इस दौरान डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. डीसी पंत, डॉ. प्रदीप पांडे, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. अजय पांडे, डॉ. महेश कुमार, डॉ. संदीप अग्रवाल आदि थे।
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आंदोलन की रूप रेखा
- 22 दिसंबर को काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध।
-23 दिसंबर को शाम को ओपीडी में मरीज नहीं देखेंगे।
-24 दिसंबर को मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर देंगे। हालांकि पहले से भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा।
-25 दिसंबर से सभी निजी अस्पताल स्वेच्छा से बंद कर देंगे।
डॉ. पंत अध्यक्ष और डॉ. पांडे बने सचिव
हल्द्वानी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हल्द्वानी का चुनाव हो गया है। डॉ. डीसी पंत को अध्यक्ष और डॉ. प्रदीप पांडे को सचिव चुना गया है। 23 दिसंबर को एक निजी होटल में दोनों ही पदाधिकारियों को शपथ दिलाने के साथ कार्यभार सौंपा जाएगा।
सीइए के नियमों का अनुपालन न कर पाने के कारण आईएमए मुखर, कहा- एक्ट से बढ़ेगा इंस्पेक्टर राज
30 निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं शहर में
3500 से 4000 मरीज देखते हैं प्राइवेट डॉक्टर