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एनसीईआरटी की दो लाख किताबें गोदाम में हुईं बेकार
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:01 AM IST
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किताबें
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। सरकार एक कदम आगे बढ़ी तो किताब माफिया ने उसका भी तोड़ निकाल लिया। शिक्षा विभाग की ओर से प्रकाशित कराई गईं एनसीईआरटी की कक्षा नौ से बारहवीं तक की किताबों को फेल करने के लिए बाजार में डुप्लीकेट किताबें उतार दी गई हैं। बाजार से डिमांड न आने के कारण उत्तराखंड शासन विद्यालयी शिक्षा द्वारा प्रकाशित दो लाख से अधिक पुस्तकें गोदाम में ही पड़ी हैं। पुस्तकों को पुस्तक विक्रेताओं तक पहुंचाने के जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से प्रयास भी नहीं किए गए हैं।
एनसीईआरटी की पुस्तकों के लिए प्रदेश सरकार ने ओपन टेंडर किया था। अंग्रेजी माध्यम की किताबें छापने का ठेका हल्द्वानी की फर्म को मिला। शासन ने इस फर्म को कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक की करीब 20 लाख पुस्तकें छापने का आर्डर दिया था। हल्द्वानी से ही प्रदेश भर में पुस्तक विक्रेताओं को एनसीईआरटी पुस्तकें भेजी जा रही हैं। कक्षा नौ से लेकर बारहवीं तक के कोर्स की किताबों की डिमांड बाजार से नहीं आने के कारण दो लाख से अधिक किताबों के चट्टे गोदाम में लग गए हैं।
कितनी पुस्तकें छपी और कितनी गईं बाजार में
- एनसीइआरटी की कक्षा नौ की विज्ञान की 37 हजार में से अब तक पुस्तकें छपीं 28 हजार और बाजार में गई केवल पांच हजार।
- कक्षा 11 की बिजनेस स्टडी की 11 हजार किताबें छपीं मगर बाजार से मांग आई सिर्फ 500 पुस्तकों कीं।
- बारहवीं कक्षा की भौतिक विज्ञान भाग एक की 16595 किताबें छपीं मगर बाजार से मांग एक हजार की भी नहीं।
डुप्लीकेट किताब बेचने पर मोटा कमीशन
हल्द्वानी। एनसीइआरटी की डुप्लीकेट पुस्तकों का कागज और छपाई निमभनस्तर की होने के कारण इनकी कीमत छपाई में काफी कम आती है। बड़ी संख्या में छपवाने में माफिया को करोड़ों का मुनाफा होता है। वे पुस्तक विक्रेताओं को डुप्लीकेट किताबें बेचने पर कमीशन भी 30 से 35 प्रतिशत तक देते हैं जबकि उत्तराखंड शासन की ओर से छपवाई गई एनसइआरटी पुस्तकें बेचने में कमीशन कम मिल रहा है।
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विभाग कराएगा मुकदमा
सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि विक्रेताओं के यहां छापामारी कर देखा जाए कि यदि डुप्लीकेट किताबें बिक रही हैं दोषी विक्रेताओं के खिलाफ तो एफआईआर दर्ज कराई जाए। एनसीइआरटी पुस्तकों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
-आरके कुंवर, निदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड
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एनसीईआरटी की पुस्तकों के लिए प्रदेश सरकार ने ओपन टेंडर किया था। अंग्रेजी माध्यम की किताबें छापने का ठेका हल्द्वानी की फर्म को मिला। शासन ने इस फर्म को कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक की करीब 20 लाख पुस्तकें छापने का आर्डर दिया था। हल्द्वानी से ही प्रदेश भर में पुस्तक विक्रेताओं को एनसीईआरटी पुस्तकें भेजी जा रही हैं। कक्षा नौ से लेकर बारहवीं तक के कोर्स की किताबों की डिमांड बाजार से नहीं आने के कारण दो लाख से अधिक किताबों के चट्टे गोदाम में लग गए हैं।
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कितनी पुस्तकें छपी और कितनी गईं बाजार में
- एनसीइआरटी की कक्षा नौ की विज्ञान की 37 हजार में से अब तक पुस्तकें छपीं 28 हजार और बाजार में गई केवल पांच हजार।
- कक्षा 11 की बिजनेस स्टडी की 11 हजार किताबें छपीं मगर बाजार से मांग आई सिर्फ 500 पुस्तकों कीं।
- बारहवीं कक्षा की भौतिक विज्ञान भाग एक की 16595 किताबें छपीं मगर बाजार से मांग एक हजार की भी नहीं।
डुप्लीकेट किताब बेचने पर मोटा कमीशन
हल्द्वानी। एनसीइआरटी की डुप्लीकेट पुस्तकों का कागज और छपाई निमभनस्तर की होने के कारण इनकी कीमत छपाई में काफी कम आती है। बड़ी संख्या में छपवाने में माफिया को करोड़ों का मुनाफा होता है। वे पुस्तक विक्रेताओं को डुप्लीकेट किताबें बेचने पर कमीशन भी 30 से 35 प्रतिशत तक देते हैं जबकि उत्तराखंड शासन की ओर से छपवाई गई एनसइआरटी पुस्तकें बेचने में कमीशन कम मिल रहा है।
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विभाग कराएगा मुकदमा
सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि विक्रेताओं के यहां छापामारी कर देखा जाए कि यदि डुप्लीकेट किताबें बिक रही हैं दोषी विक्रेताओं के खिलाफ तो एफआईआर दर्ज कराई जाए। एनसीइआरटी पुस्तकों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
-आरके कुंवर, निदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड