फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   ‘जुगाड़’ का तो यही नतीजा होना था

‘जुगाड़’ का तो यही नतीजा होना था

Mon, 04 Dec 2017 01:41 AM IST
Updated Mon, 04 Dec 2017 01:41 AM IST
विज्ञापन
‘जुगाड़’ का तो यही नतीजा होना था
ज्योलीकोट (नैनीताल)। दो महीने से अधिक समय बीतने और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी वीरभट्टी में एक अदद पुल न ठीक हो पाया न बन पाया। बड़ी मुश्किल से तो नए पुल पर आवाजाही शुरू करने की तारीख का ऐलान हुआ लेकिन आधी-अधूरी तैयारी की तस्वीर रविवार को सामने आ गई। पूरा कार्य जुगाड़ से हुआ। किसी तरह पुल के बीच में पैनलों को ठोकपीट कर लगाया गया था। लोग अब एनएच के इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
विज्ञापन

एनएच के इंजीनियर अब पुल पर क्षमता से अधिक भार पड़ने की बात कहकर अपनी गर्दन बचाने में जुटे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि जब घाटीपुल को स्थापित किया जा रहा था तभी पैनल लगाने में दिक्कतें आने लगी थी। तब अधिकारियों का कहना था कि पुल में यातायात चालू होने के बाद पैनल खुद ही अपने स्थान पर आ जाएंगे। लेकिन जब यातायात शुरू हुआ तो सारे दावों की पोल खुल गई। इंजीनियरों की फौज के बावजूद कुमाऊं की लाइफ लाइन में बन रहे इस पुल के कार्य को देखने के लिए किसी ऐसे इंजीनियर को नहीं लगाया गया जो कि इस कार्य में सिद्धहस्त हो। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि यदि पुल में क्षमता से अधिक भार पड़ा तो पुल पर इसे रोकने के इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे। इसके जवाब में एनएच के ईई महेंद्र कुमार कहते हैं कि इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिख कर पहली दिसंबर को ही अवगत कराकर व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया था।
विज्ञापन


जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल

जनप्रनिधियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए इंजीनियरों की शैक्षिक योग्यता की जांच कराने की भी मांग उठाई है। ब्लॉक प्रमुख गीता बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश सिंह बिष्ट, सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट डॉ. ललित जोशी, पूर्व प्रधान हरगोविंद रावत, तारा सिंह और भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्कर जोशी ने इसके लिए पूरी तरह से एनएच के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कुमाऊं में कई पुलों का निर्माण करा चुके जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने उस तर्क को खारिज कर दिया है जिसमें अधिकारियों ने पुल पर ज्यादा भार पड़ने की बात कही है। डॉ. बिष्ट का कहना है कि प्रदेश में ज्यादातर पुल बी श्रेणी के हैं और उनकी भार क्षमता भी 16.5 टन है और इस तरह के किसी भी पुल में ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है जबकि इन पुलों में भी एक बार में एक से अधिक ट्रक गुजरते रहते हैं। उन्होंने एनएच के इंजीनियरों की डिग्री की जांच की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed