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जंगल में बाघिन से बिछडकर गांव में पहुंचा शावक,जंगलात ने रेस्क्यू सेंटर भेजा।
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लालकुआं (नैनीताल)। डौली रेंज के जंगल में मां से बिछड़ा बाघ का शावक देवनगर गांव में जा पहुंचा। वन कर्मी शावक को 24 घंटे बाद भी उसकी मां से नहीं मिला सके। इसलिए रविवार शाम उसे रेस्क्यू सेंटर रानीबाग पहुंचा दिया गया।
डौली रेंजर के जंगल से सटे गांव देवनगर में शनिवार शाम एक शावक देख ग्रामीण डर गए। उन्होंने इसकी सूचना रेंजर अनिल कुमार जोशी को दी। दलबल सहित मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद शावक को जाल से पकड़कर पिंजरे में बंद किया। डीएफओ नितीश मणि त्रिपाठी के निर्देश पर शनिवार रात जंगल में ऊंचे पेड़ पर मचान बनाकर मचान बनाया और आसपास की झाड़ियों के बीच शावक का पिंजरा और कैमरा ट्रैप लगाया ताकि शावक अपनी मां से मिल सके। प्रशिक्षु आईएफएस कुंदन कुमार, महातिम यादव, बाराकोली के रेंजर प्रदीप धौलाखंडी, रेंजर अनिल कुमार जोशी ने करीब 24 घंटे तक इसकी देखरेख की। इसके बावजूद शावक को मां तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसलिए रविवार शाम स्वस्थ शावक को रेस्क्यू सेंटर रानीबाग भिजवा दिया गया। बाद में उसे किसी जू में छोड़ दिया जाएगा। शावक की उम्र करीब छह माह है। देवनगर के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार शाम कटना नाले के पास एक बाघिन देखी थी। यह शावक उसी का होने की आशंका है। ग्रामीणों ने जंगल किनारे गांव में कैमरा ट्रैप लगाने, वनकर्मियाें की गश्त बढ़ाने की मांग की है ताकि ग्रामीण भयमुक्त हो सकें।
देवनगर गांव में पहुंचा मां से बिछड़ा शावक
24 घंटे की जद्दोजहद के बाद जंगलात ने रेस्क्यू सेंटर भेजा
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डौली रेंजर के जंगल से सटे गांव देवनगर में शनिवार शाम एक शावक देख ग्रामीण डर गए। उन्होंने इसकी सूचना रेंजर अनिल कुमार जोशी को दी। दलबल सहित मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद शावक को जाल से पकड़कर पिंजरे में बंद किया। डीएफओ नितीश मणि त्रिपाठी के निर्देश पर शनिवार रात जंगल में ऊंचे पेड़ पर मचान बनाकर मचान बनाया और आसपास की झाड़ियों के बीच शावक का पिंजरा और कैमरा ट्रैप लगाया ताकि शावक अपनी मां से मिल सके। प्रशिक्षु आईएफएस कुंदन कुमार, महातिम यादव, बाराकोली के रेंजर प्रदीप धौलाखंडी, रेंजर अनिल कुमार जोशी ने करीब 24 घंटे तक इसकी देखरेख की। इसके बावजूद शावक को मां तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसलिए रविवार शाम स्वस्थ शावक को रेस्क्यू सेंटर रानीबाग भिजवा दिया गया। बाद में उसे किसी जू में छोड़ दिया जाएगा। शावक की उम्र करीब छह माह है। देवनगर के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार शाम कटना नाले के पास एक बाघिन देखी थी। यह शावक उसी का होने की आशंका है। ग्रामीणों ने जंगल किनारे गांव में कैमरा ट्रैप लगाने, वनकर्मियाें की गश्त बढ़ाने की मांग की है ताकि ग्रामीण भयमुक्त हो सकें।
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देवनगर गांव में पहुंचा मां से बिछड़ा शावक
24 घंटे की जद्दोजहद के बाद जंगलात ने रेस्क्यू सेंटर भेजा