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आईटीआई के 300 कर्मियों को बिना काम के पगार
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हल्द्वानी। प्रदेश में प्रशिक्षण विभाग अपने कर्मचारियों को बिना किसी काम के वेतन दे रहा है। राज्य में तीन वर्ष से 66 आईटीआई बंद हैं लेकिन इनमें तैनात अनुदेशकों और अन्य कर्मचारियों को बिना किसी काम के प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। इन आईटीआई में 300 से अधिक कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर हर माह सवा करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च हो रहा है। दूसरी ओर, जो आईटीआई संचालित हैं, उनमें पर्याप्त अनुदेशक नहीं हैं। इसकी न तो विभाग को चिंता है और न ही शासन में बैठे आला अधिकारियों को।
प्रशिक्षण निदेशालय के निदेशक डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि असंचालित आईटीआई में तैनात कार्मिकों को संचालित संस्थानों में तैनात किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नीति के अनुसार 10 प्रतिशत कर्मचारियों का ही तबादला हो सकता है। शासन से अनुमोदन के बाद कार्यवाही की जाएगी। आईटीआई में बेहतर पठन-पाठन हो, इसके लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रहीं हैं।
2018 में बंद कर दिए थे 66 आईटीआई
राज्य में तीन वर्ष पूर्व 154 आईटीआई संचालित थे। इनमें से 66 आईटीआई ऐसे थे, जिनमें डीजीईटी (प्रशिक्षण महानिदेशालय, भारत सरकार) के मानक पूरे नहीं थे। इस कारण इन्हें एनसीवीटी की मान्यता नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में शासन ने इन 66 आईटीआई को वर्ष 2018 में बंद कर दिया। केवल 88 आईटीआई में ही प्रवेश किए गए। बंद आईटीआई में कर्मचारी और अनुदेशक क्या काम कर रहे हैं, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इन अनुदेशकों को संचालित आईटीआई में भेजने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
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सिर्फ नौ हजार दाखिले, बाकी सीटें खाली
हल्द्वानी। प्रदेश में संचालित 88 आईटीआई में करीब 14 हजार सीटों पर नए सत्र में प्रवेश होने थे लेकिन कोविड महामारी और आईटीआई में कमियों के चलते इस बार पूरी सीटें तक नहीं भर सकीं हैं। निदेशालय के मुताबिक इस बार केवल 9,227 दाखिले हुए हैं। आईटीआई में अनुदेशकों के 1352 पदों के सापेक्ष केवल 500 नियमित अनुदेशक कार्यरत हैं तथा 874 पद खाली चल रहे हैं। काम चलाने के लिए विभाग ने उपनल से अनुदेशक रखे हैं।
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प्रशिक्षण निदेशालय के निदेशक डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि असंचालित आईटीआई में तैनात कार्मिकों को संचालित संस्थानों में तैनात किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नीति के अनुसार 10 प्रतिशत कर्मचारियों का ही तबादला हो सकता है। शासन से अनुमोदन के बाद कार्यवाही की जाएगी। आईटीआई में बेहतर पठन-पाठन हो, इसके लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रहीं हैं।
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2018 में बंद कर दिए थे 66 आईटीआई
राज्य में तीन वर्ष पूर्व 154 आईटीआई संचालित थे। इनमें से 66 आईटीआई ऐसे थे, जिनमें डीजीईटी (प्रशिक्षण महानिदेशालय, भारत सरकार) के मानक पूरे नहीं थे। इस कारण इन्हें एनसीवीटी की मान्यता नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में शासन ने इन 66 आईटीआई को वर्ष 2018 में बंद कर दिया। केवल 88 आईटीआई में ही प्रवेश किए गए। बंद आईटीआई में कर्मचारी और अनुदेशक क्या काम कर रहे हैं, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इन अनुदेशकों को संचालित आईटीआई में भेजने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
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सिर्फ नौ हजार दाखिले, बाकी सीटें खाली
हल्द्वानी। प्रदेश में संचालित 88 आईटीआई में करीब 14 हजार सीटों पर नए सत्र में प्रवेश होने थे लेकिन कोविड महामारी और आईटीआई में कमियों के चलते इस बार पूरी सीटें तक नहीं भर सकीं हैं। निदेशालय के मुताबिक इस बार केवल 9,227 दाखिले हुए हैं। आईटीआई में अनुदेशकों के 1352 पदों के सापेक्ष केवल 500 नियमित अनुदेशक कार्यरत हैं तथा 874 पद खाली चल रहे हैं। काम चलाने के लिए विभाग ने उपनल से अनुदेशक रखे हैं।