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उत्थान मंच में हरेला मेले का समापन
Updated Tue, 17 Jul 2018 02:14 AM IST
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खटीमा से टोकरी में उगाया गया हरेला
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच की ओर से आयोजित हर्यावक त्यार महोत्सव का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कवि सम्मेलन के साथ समापन हो गया। सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या में लोक गायिका दीपा नगरकोटी ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। इससे पूर्व दोपहर में हुई कवि सम्मेलन में कवियों ने पलायन पर चिंता जताई। देर शाम को पुरस्कार वितरण के साथ मेले का समापन हो गया।
सांस्कृतिक संध्या में लोकगायिका दीपा नगरकोटी ने ‘आंखि मायादार, तेरो हिया में, झुमका मेरो गिरि गो, हंसिया रंगीलो, देवरा मोहना, दूर बड़ी दूर बरफीलो डाना, रंगीली बिंदी घाघरी काई’ आदि कुमाऊंनी लोकगीत सुनाकर दर्शकों को झूमने को मजबूर कर दिया। स्थानीय कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। इससे पूर्व दोपहर में जुगल किशोर पेटशाली की अध्यक्षता में डॉ. प्रदीप उपाध्याय ने संचालन किया। कवि सम्मेलन में कवियों ने पर्वतीय संस्कृति से ओतप्रोत रचनाएं सुनाईं। उन्होंने पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कई रचनाएं पेश कीं। कवि सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, हास्य व्यंग्य का भी बोलबाला रहा। सम्मेलन में नारायण सिंह बिष्ट, राजेंद्र ढैला, माधवानंद लोहनी, गोविंद बल्लभ बहुगुणा, दामोदर जोशी, जगदीश जोशी, नारायण बनकोटी, भगवती पनेरू, भूपाल सिंह बिष्ट, विजया कुमारी मुक्ता, मोहन कुमाऊंनी, पुष्पलता जोशी, शिवराज भंडारी, भुवन चंद्र कांडपाल, भूपाल सिंह कलियुगी, प्रह्लाद सिंह मेहरा, पान सिंह राणा ने कविताएं पेश कीं। समापन समारोह के मौके पर मंच के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, भुवन जोशी, गोपाल बिष्ट, देवेंद्र तोलिया, लीलाधर पांडे, त्रिलोक बनोली, पुष्पा संभल, केदार सिंह रावत, ललित बिष्ट, स्मित तिवारी आदि थे।
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सांस्कृतिक संध्या में लोकगायिका दीपा नगरकोटी ने ‘आंखि मायादार, तेरो हिया में, झुमका मेरो गिरि गो, हंसिया रंगीलो, देवरा मोहना, दूर बड़ी दूर बरफीलो डाना, रंगीली बिंदी घाघरी काई’ आदि कुमाऊंनी लोकगीत सुनाकर दर्शकों को झूमने को मजबूर कर दिया। स्थानीय कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। इससे पूर्व दोपहर में जुगल किशोर पेटशाली की अध्यक्षता में डॉ. प्रदीप उपाध्याय ने संचालन किया। कवि सम्मेलन में कवियों ने पर्वतीय संस्कृति से ओतप्रोत रचनाएं सुनाईं। उन्होंने पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कई रचनाएं पेश कीं। कवि सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, हास्य व्यंग्य का भी बोलबाला रहा। सम्मेलन में नारायण सिंह बिष्ट, राजेंद्र ढैला, माधवानंद लोहनी, गोविंद बल्लभ बहुगुणा, दामोदर जोशी, जगदीश जोशी, नारायण बनकोटी, भगवती पनेरू, भूपाल सिंह बिष्ट, विजया कुमारी मुक्ता, मोहन कुमाऊंनी, पुष्पलता जोशी, शिवराज भंडारी, भुवन चंद्र कांडपाल, भूपाल सिंह कलियुगी, प्रह्लाद सिंह मेहरा, पान सिंह राणा ने कविताएं पेश कीं। समापन समारोह के मौके पर मंच के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, भुवन जोशी, गोपाल बिष्ट, देवेंद्र तोलिया, लीलाधर पांडे, त्रिलोक बनोली, पुष्पा संभल, केदार सिंह रावत, ललित बिष्ट, स्मित तिवारी आदि थे।
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