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दिन में ट्यूशन पढ़ाया और रात में खुद पढ़ाई कर पाई कामयाबी
Updated Fri, 18 May 2018 02:17 AM IST
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हल्द्वानी। अगर मंजिल पाने का जज्बा हो तो कोई बाधा आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। यह कर दिखाया है किसान श्याम दत्त जोशी के बेटे प्रकाश जोशी ने। पिता पर पढ़ाई का बोझ डालने के बजाय प्रकाश ने खुद ट्यूशन पढ़ाकर अपने लक्ष्य को पूरा करने का जो बीड़ा उठाया और जूनियर रिसर्च फैलोशिप नेशनल एलिजिबिटी की परीक्षा में आल इंडिया 66 वीं रैंक पाई है।
नवाबी रोड पर किराये पर कमरा लेकर पढ़ाई करने वाले प्रकाश जोशी के पिता श्याम दत्त जोशी किसान हैं। वह बाजपुर के ग्राम हरिपुर हरसान में रहते हैं। हाईस्कूल तक की शिक्षा बाजपुर से ग्रहण करने के बाद प्रकाश आगे की पढ़ाई करने हल्द्वानी चले आए और यहां रामपुर रोड स्थित एचएन इंटर कालेज से प्रथम श्रेणी में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण किया। बचपन से पढ़ाई में होनहार प्रकाश ने एमबीपीजी कालेज से बीएससी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद नैनीताल डीएसबी कैंपस से पढ़ाई की तथा एमएससी केमिस्ट्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद वह जूनियर रिसर्च फैलोशिप नेशनल एलिजिबिटी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। इसके लिए कोई कोचिंग नहीं ली बल्कि बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्चा निकाला।
प्रकाश बताते हैं कि दिन में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे और रात में अपनी परीक्षा की तैयारी करते थे। इसी कड़ी मेहनत का परिणाम है कि पहली बार में ही उन्होंने इस परीक्षा में आल इंडिया स्तर पर 66 वीं रैंक पाकर कामयाबी हासिल की। वह अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को देते हैं। उनका कहना है कि वह रिसर्च कर वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। इसके लिए अब उन्हें सरकार की ओर से हर माह 32 हजार रुपये मिलेंगे।
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नवाबी रोड पर किराये पर कमरा लेकर पढ़ाई करने वाले प्रकाश जोशी के पिता श्याम दत्त जोशी किसान हैं। वह बाजपुर के ग्राम हरिपुर हरसान में रहते हैं। हाईस्कूल तक की शिक्षा बाजपुर से ग्रहण करने के बाद प्रकाश आगे की पढ़ाई करने हल्द्वानी चले आए और यहां रामपुर रोड स्थित एचएन इंटर कालेज से प्रथम श्रेणी में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण किया। बचपन से पढ़ाई में होनहार प्रकाश ने एमबीपीजी कालेज से बीएससी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद नैनीताल डीएसबी कैंपस से पढ़ाई की तथा एमएससी केमिस्ट्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद वह जूनियर रिसर्च फैलोशिप नेशनल एलिजिबिटी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। इसके लिए कोई कोचिंग नहीं ली बल्कि बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्चा निकाला।
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प्रकाश बताते हैं कि दिन में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे और रात में अपनी परीक्षा की तैयारी करते थे। इसी कड़ी मेहनत का परिणाम है कि पहली बार में ही उन्होंने इस परीक्षा में आल इंडिया स्तर पर 66 वीं रैंक पाकर कामयाबी हासिल की। वह अपनी सफलता का श्रेय माता पिता को देते हैं। उनका कहना है कि वह रिसर्च कर वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। इसके लिए अब उन्हें सरकार की ओर से हर माह 32 हजार रुपये मिलेंगे।
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