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सीबीआई को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
Updated Fri, 06 Oct 2017 02:07 AM IST
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नैनीताल। एनएच-74 के भूमि घोटाले में अब सीबीआई को यह साफ करना होगा कि इस मामले की जांच वह कर भी रही है या नहीं। राज्य सरकार ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। सरकार की संस्तुति के बाद भी इस पर तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो पाई है। सीबीआई ने इस मामले की जांच के लिए न तो हामी भरी है और न ही इनकार किया है। बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद सीबीआई को इस पर स्पष्ट जवाब न्यायालय को देने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को रुद्रपुर निवासी महेंद्र सिंह की एनएच- 74 में भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष प्रदेश सरकार ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति की गई है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सीबीआई ने इस मामले में क्या जांच की। इस पर खंडपीठ ने सीबीआई को राज्य सरकार की संस्तुति के संदर्भ में न्यायालय के समक्ष देने का निर्देश जारी किया। याची का कहना था कि एनएच 74 के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2014 में सरकार ने अधिसूचना जारी कर भूमि अधिकृत की थी। जिस भूमि को अधिकृत किया गया उसे अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि भूमि दर्शाया गया, यह भूमि वर्ष 2010 व 11 से ही व्यवसायिक भूमि के रूप में दर्ज है। याची के मुताबिक इस मामले की जांच 2016 में तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त ने की थी। इसमें करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले की पुष्टि भी हुई थी। इसके बाद वर्तमान सरकार ने सीबीआई जांच करने की संस्तुति की थी। अब मामले की सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी। भूमि घोटाले की सीबीआई जांच पर वर्तमान प्रदेश सरकार को असहज होना पड़ रहा है। सीबीआई की चुप्पी पर प्रदेश सरकार से जवाब देते नहीं बन रहा है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
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उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को रुद्रपुर निवासी महेंद्र सिंह की एनएच- 74 में भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष प्रदेश सरकार ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति की गई है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सीबीआई ने इस मामले में क्या जांच की। इस पर खंडपीठ ने सीबीआई को राज्य सरकार की संस्तुति के संदर्भ में न्यायालय के समक्ष देने का निर्देश जारी किया। याची का कहना था कि एनएच 74 के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2014 में सरकार ने अधिसूचना जारी कर भूमि अधिकृत की थी। जिस भूमि को अधिकृत किया गया उसे अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि भूमि दर्शाया गया, यह भूमि वर्ष 2010 व 11 से ही व्यवसायिक भूमि के रूप में दर्ज है। याची के मुताबिक इस मामले की जांच 2016 में तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त ने की थी। इसमें करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले की पुष्टि भी हुई थी। इसके बाद वर्तमान सरकार ने सीबीआई जांच करने की संस्तुति की थी। अब मामले की सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी। भूमि घोटाले की सीबीआई जांच पर वर्तमान प्रदेश सरकार को असहज होना पड़ रहा है। सीबीआई की चुप्पी पर प्रदेश सरकार से जवाब देते नहीं बन रहा है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
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