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हथिनियों को मथुरा रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी
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हाथी गांव
- फोटो : अमर उजाला
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रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट लैंडस्केप के रिजॉर्टों से छुड़ाकर आमडंडा डिपो में रखी गईं आठ हथिनियों को वन विभाग पालने के मूड में नहीं है। अब इन्हें रेस्क्यू सेंटर मथुरा भेजने की तैयारी की जा रही है। प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव की संस्तुति के बाद रेस्क्यू सेंटर भेज दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने हथिनियों के स्वास्थ्य परीक्षण और उनके अभिलेखों की जांच के लिए दो कमेटियां बनाकर रिपोर्ट मांगी। कमेटियों की रिपोर्ट में कहा गया कि रिजॉर्ट के सभी हाथी बीमार हैं। वह पर्यटकों को जंगल सफारी करवाने योग्य नहीं हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही रामनगर वन प्रभाग की तत्कालीन डीएफओ नेहा वर्मा ने नौ अगस्त को ढिकुली के सात और कुमेरिया रिजॉर्ट से एक हथिनी को कब्जे में लिया था। इनके नाम रानी, फूलमाला, गुलाबकली, लक्ष्मी, एशियन लक्ष्मी, हेमा, कलीना, पवनकली हैं। इन हथिनियों के साथ उनके महावत भी आमडंडा डिपो में रखे गए हैं। इन हथिनियों की खानपान, देखरेख में वन विभाग के लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसका विकल्प खोजने के लिए एसडीओ केएन भारती के साथ पांच सदस्यों की टीम सात अक्तूबर को मथुरा गई थी। इस टीम ने मथुरा रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण किया। देखा कि वहां पर 13 प्रदेशों से लाकर हाथी, बाघ आदि वन्यजीवों को रखा गया है। उनको बेहतर इलाज भी दिया जा रहा है।
रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि हथिनियों की बेहतर देखरेख के लिए मथुरा रेस्क्यू सेंटर में भेजने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले पंतनगर विश्वविद्यालय के डीन से बात हुई। वहां के डॉ. जेएल सिंह की टीम जल्द ही यहां आकर हथिनियों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। उसके बाद प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव को प्रस्ताव भेजा जाएगा। दोनों अधिकारियों की संस्तुति के बाद हथिनियों को मथुरा भेजा जाएगा।
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हथिनियों को मथुरा रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी
रामनगर वन प्रभाग तैयार कर रहा रिपोर्ट, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड को भेजा जाएगा प्रस्ताव
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हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने हथिनियों के स्वास्थ्य परीक्षण और उनके अभिलेखों की जांच के लिए दो कमेटियां बनाकर रिपोर्ट मांगी। कमेटियों की रिपोर्ट में कहा गया कि रिजॉर्ट के सभी हाथी बीमार हैं। वह पर्यटकों को जंगल सफारी करवाने योग्य नहीं हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही रामनगर वन प्रभाग की तत्कालीन डीएफओ नेहा वर्मा ने नौ अगस्त को ढिकुली के सात और कुमेरिया रिजॉर्ट से एक हथिनी को कब्जे में लिया था। इनके नाम रानी, फूलमाला, गुलाबकली, लक्ष्मी, एशियन लक्ष्मी, हेमा, कलीना, पवनकली हैं। इन हथिनियों के साथ उनके महावत भी आमडंडा डिपो में रखे गए हैं। इन हथिनियों की खानपान, देखरेख में वन विभाग के लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसका विकल्प खोजने के लिए एसडीओ केएन भारती के साथ पांच सदस्यों की टीम सात अक्तूबर को मथुरा गई थी। इस टीम ने मथुरा रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण किया। देखा कि वहां पर 13 प्रदेशों से लाकर हाथी, बाघ आदि वन्यजीवों को रखा गया है। उनको बेहतर इलाज भी दिया जा रहा है।
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रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि हथिनियों की बेहतर देखरेख के लिए मथुरा रेस्क्यू सेंटर में भेजने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले पंतनगर विश्वविद्यालय के डीन से बात हुई। वहां के डॉ. जेएल सिंह की टीम जल्द ही यहां आकर हथिनियों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। उसके बाद प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव को प्रस्ताव भेजा जाएगा। दोनों अधिकारियों की संस्तुति के बाद हथिनियों को मथुरा भेजा जाएगा।
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हथिनियों को मथुरा रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी
रामनगर वन प्रभाग तैयार कर रहा रिपोर्ट, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड को भेजा जाएगा प्रस्ताव