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कालेस्ट्रॉल का कटर है इंडियन बटर ‘च्यूरा’
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:07 AM IST
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कालेस्ट्रॉल का कटर है इंडियन बटर ‘च्यूरा’
हल्द्वानी।
आम के आम गुठलियों के भी दाम, यही खूबी है विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी दुर्लभ वनस्पति ‘च्यूरा’ की। पौधे के बीज का तेल देशी घी की तरह इस्तेमाल होता है, इसलिए इस पौधे को ‘इंडियन बटर’ भी कहा जाता है। यह घी ब्लड प्रेशर, कालेस्ट्रॉल में भी असरदार औषधि है। इस तेल की बाजार में बेहद मांग है।
सब हिमालय ट्रैक में पाए जाने वाले सपोटेशिया कुल के इस पौधे का वनस्पति नाम डिप्लोकीनिया ब्यूट्रिसिया है। यह उत्तराखंड में चंपावत, नैनीताल के ऊपरी हिस्सा, सिक्किम और भूटान में पाया जाता है। इस पौधे की खूबी यह है कि इसके पंचांग उपयोगी है। इसके फल-फू ल पशु-पक्षियों के पसंदीदा आहार हैं। इससे जैव विविधता संरक्षण में मदद मिलेगी। पत्तियों का पशु के चारे में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी लकड़ी इमारती लकड़ी है जो भवन, फर्नीचर निर्माण में इस्तेमाल होती है। पौधे के बीज से निकलने वाला तेल देशी घी या तेल की तरह होता है। इससे सब्जी, पूड़ी-पराठे पकाने में खाद्य तेल की तरह उपयोग किया जाता है। यह तेल मोमबत्ती व साबुन बनाने में भी इस्तेमाल होता है। यह पौधा पर्यावरण, जैव विविधता, आर्थिक तौर पर बेहद फायदेमंद है। इसी खूबियों की वजह से वन अनुसंधान केंद्र इसकी नर्सरी तैयार कर रहा है। साथ ही पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल समेत पर्वतीय जिलों के ग्रामीणों को इसकी आर्थिक महत्व बताते हुए खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किए जाने की योजना है, जिससे ग्रामीणों को गांव में ही आय का साधन मिलेगा और पलायन पर रोक लग सकेगी।
चिकनाई बेहद कम, नसें खोलता है इंडियन बटर
च्यूरा के बीज के तेल में बेहद कम चिकनाई होती है। खाना पकाने के लिए यह भरपूर होती है, लेकिन इससे शरीर पर न फैट चढ़ता है न ही कालेस्ट्रॉल बढ़ता है। यह नसों को पूरी तरह खोलने में भी मददगार होता है। ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों में यह रामबाण दवा है।
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- च्यूरा का तेल ब्लड प्रेशर और कालेस्ट्रॉल में असरदार है, वैसे भी यह बहुपयोगी है। जानकारी के अभाव में संरक्षण नहीं होने पर विलुप्ती की कगार पर है, वन अनुसंधान अब इसकी नर्सरी तैयार कर रहा है। साथ ही सीमांत के ग्रामीणों को भी इसकी खेती के लिए जागरूक किया जाएगा।
- मदन सिंह बिष्ट, रेंज प्रभारी, वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी।
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हल्द्वानी।
आम के आम गुठलियों के भी दाम, यही खूबी है विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी दुर्लभ वनस्पति ‘च्यूरा’ की। पौधे के बीज का तेल देशी घी की तरह इस्तेमाल होता है, इसलिए इस पौधे को ‘इंडियन बटर’ भी कहा जाता है। यह घी ब्लड प्रेशर, कालेस्ट्रॉल में भी असरदार औषधि है। इस तेल की बाजार में बेहद मांग है।
सब हिमालय ट्रैक में पाए जाने वाले सपोटेशिया कुल के इस पौधे का वनस्पति नाम डिप्लोकीनिया ब्यूट्रिसिया है। यह उत्तराखंड में चंपावत, नैनीताल के ऊपरी हिस्सा, सिक्किम और भूटान में पाया जाता है। इस पौधे की खूबी यह है कि इसके पंचांग उपयोगी है। इसके फल-फू ल पशु-पक्षियों के पसंदीदा आहार हैं। इससे जैव विविधता संरक्षण में मदद मिलेगी। पत्तियों का पशु के चारे में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी लकड़ी इमारती लकड़ी है जो भवन, फर्नीचर निर्माण में इस्तेमाल होती है। पौधे के बीज से निकलने वाला तेल देशी घी या तेल की तरह होता है। इससे सब्जी, पूड़ी-पराठे पकाने में खाद्य तेल की तरह उपयोग किया जाता है। यह तेल मोमबत्ती व साबुन बनाने में भी इस्तेमाल होता है। यह पौधा पर्यावरण, जैव विविधता, आर्थिक तौर पर बेहद फायदेमंद है। इसी खूबियों की वजह से वन अनुसंधान केंद्र इसकी नर्सरी तैयार कर रहा है। साथ ही पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल समेत पर्वतीय जिलों के ग्रामीणों को इसकी आर्थिक महत्व बताते हुए खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किए जाने की योजना है, जिससे ग्रामीणों को गांव में ही आय का साधन मिलेगा और पलायन पर रोक लग सकेगी।
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चिकनाई बेहद कम, नसें खोलता है इंडियन बटर
च्यूरा के बीज के तेल में बेहद कम चिकनाई होती है। खाना पकाने के लिए यह भरपूर होती है, लेकिन इससे शरीर पर न फैट चढ़ता है न ही कालेस्ट्रॉल बढ़ता है। यह नसों को पूरी तरह खोलने में भी मददगार होता है। ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों में यह रामबाण दवा है।
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- च्यूरा का तेल ब्लड प्रेशर और कालेस्ट्रॉल में असरदार है, वैसे भी यह बहुपयोगी है। जानकारी के अभाव में संरक्षण नहीं होने पर विलुप्ती की कगार पर है, वन अनुसंधान अब इसकी नर्सरी तैयार कर रहा है। साथ ही सीमांत के ग्रामीणों को भी इसकी खेती के लिए जागरूक किया जाएगा।
- मदन सिंह बिष्ट, रेंज प्रभारी, वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी।