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दाखिल खारिज और 143 के बाद भी भूमि नो मैंस लैंड घोषित

Sat, 06 Oct 2018 02:06 AM IST
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:06 AM IST
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दाखिल खारिज और 143 के बाद भी भूमि नो मैंस लैंड घोषित
हल्द्वानी। बरेली रोड स्थित मोतीनगर क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा वर्षों पहले खरीदी गई लगभग दस बीघा जमीन को सरकार ने नो मैंस लैंड घोषित कर दिया है। सरकार की इस कार्रवाई के बाद से ग्रामीणों का चैन छिन गया है। इस मामले को लेकर ग्रामीण कई बार राजस्व अधिकारियों से लेकर जिलाधिकारी तक से मिल चुके हैं लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही है।
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लालकुआं तहसील क्षेत्र के ग्राम किशनपुर सरकुलिया के खसरा संख्या 35 में क्षेत्र में रह रहे 30 परिवारों की लगभग दस बीघा भूमि है जो कि वर्ष 1971 के बाद खरीदी गई है। सरकारी अभिलेखों में यह भूमि इन ग्रामीणों के नाम से भूमिधरी रूप में दर्ज है। रजिस्ट्री और दाखिल खारिज के बाद कई ग्रामीणों ने वर्ष 2011 के बाद से उक्त भूमि का 143 (कृषि श्रेणी से अ-कृषि श्रेणी में दर्ज कराना) भी कराया ताकि भविष्य में वह अपनी जरूरतों के मुताबिक इस जमीन में मकान अथवा व्यवसायिक भवन आदि बना सकें। लेकिन ग्रामीणों के सपने तक धराशाई हो गए जब उन्हें पता चला कि उनकी मेहनत की कमाई से जोड़ी गई जमीन अब सरकारी अभिलेखों में नो मैंस लैंड घोषित कर कर दी गई है।
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स्थानीय निवासी भजन सिंह बताते हैं कि पिछले दिनों सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 87 (नई संख्या 109) के चौड़ीकरण के लिए इसके आसपास की भूमि अधिग्रहित की। पूर्व के गजट नोटिफिकेशन में भी उक्त भूमि ग्रामीणों के नाम निजी भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद सड़क चौड़ीकरण के लिए हुए सर्वे के बाद सरकारी अभिलेखों में उनकी इस भूमि को नो मैंस लैंड घोषित कर दिया है। भजन सिंह बताते हैं कि ऐसे लगभग तीस परिवार हैं जिनकी जमीन नो मैंस लेंड घोषित हुई है इनमें कई पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हैं लेकिन यदि सरकार उनकी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज वाली इस जमीन को अधिग्रहित करती है तो उसका उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। अब अपनी जमीन को बचाने के लिए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी न्यायालय में सेक्शन 28 के तहत वाद दायर किया है।
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उपजिलाधिकारी एपी वाजपेयी ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर भूमि की जांच कराई गई थी। जांच में साफ हुआ कि जिस भूमि की ग्रामीणों ने रजिस्ट्री और दाखिल खारिज किया है वह भूमि अलग है जबकि जिस जगह ग्रामीण वर्तमान में काबिज हैं वह नाप भूमि नहीं है बल्कि वह नो मैंस लैंड में शामिल है।



दाखिल खारिज और 143 के बाद भी भूमि नो मैंस लैंड घोषित!
- बरेली रोड के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन
- कई पूर्व सैनिक भी हैं भूस्वामी
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