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नगर निकाय नहीं पास कर सकेंगे नक्शे
Updated Sat, 16 Dec 2017 10:53 PM IST
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अल्मोड़ा। राज्य के सभी जिलों में जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अस्तित्व में आते ही नगर निकायों से भवनों का मानचित्र पास करने का अधिकार छिन गया है। अब नगरपालिका क्षेत्रों में बनने वाले भवनों के मानचित्र डीडीए ही पास करेगा। इससे नगर निकायों को हर साल लाखों के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। अल्मोड़ा नगरपालिका परिषद को सालाना करीब 40 से 50 लाख रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
मालूम हो कि शासन से आदेश जारी होने के बाद सभी जिलों में जिला विकास प्राधिकरण गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अल्मोड़ा में भी तीन दिन पहले जिला विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आ चुका है। इसका कार्यालय कलक्ट्रेट में ही खोला गया है। आदेशों के मुताबिक सभी जिलों में मंडलायुक्त जिला विकास प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष, जिलाधिकारी उपाध्यक्ष और एडीएम को सचिव बनाया गया है। नगरीय इलाकों में नगरपालिका परिषद के संपूर्ण अधिकार क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राज मार्गों की 200 मीटर की परिधि में बनने वाले सभी भवनों का निर्माण अब जिला विकास प्राधिकरण की अनुमति से ही किया जाएगा। जिला विकास प्राधिकरण के गठन के साथ ही नगरपालिका परिषदों का भवनों के मानचित्र पास करने का अधिकार भी अब समाप्त हो चुका है।
नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि अधिशासी अधिकारी को शासन से निर्देश प्राप्त होने के बाद से पालिका ने पिछले तीन दिनों से भवनों के नक्शे पास करने बंद कर दिए हैं। जिला विकास प्राधिकरण के गठन से पहले पालिका परिषद के पास आए मानचित्रों के बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पालिका परिषद निर्माणाधीन भवनों के लिए उसकी माप के आधार पर विकास शुल्क और निर्माण शुल्क वसूलती है।
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सभी मदों से करीब पौने दो करोड़ रुपये की आय होती है, लेकिन प्राधिकरण बनने से पालिका की आय करीब 25 प्रतिशत कम हो जाएगी। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने शासन को पत्र लिखकर इसकी भरपाई करने की मांग की है। अल्मोड़ा की तरह ही राज्य के सभी जिलों में स्थित जिन नगरपालिका क्षेत्रों में टाउन प्लानिंग के लिए अन्य एजेंसियां काम नहीं कर रही हैं वहां भी पालिकाओं और नगर पंचायतों के पास से निर्माण कार्यों का मानचित्र पास करने का अधिकार हट गया है और इसकी जगह सभी निकायों में भवनों के मानचित्र पास करने का अधिकार जिला विकास प्राधिकरण के पास आ गया है।
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मालूम हो कि शासन से आदेश जारी होने के बाद सभी जिलों में जिला विकास प्राधिकरण गठित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अल्मोड़ा में भी तीन दिन पहले जिला विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आ चुका है। इसका कार्यालय कलक्ट्रेट में ही खोला गया है। आदेशों के मुताबिक सभी जिलों में मंडलायुक्त जिला विकास प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष, जिलाधिकारी उपाध्यक्ष और एडीएम को सचिव बनाया गया है। नगरीय इलाकों में नगरपालिका परिषद के संपूर्ण अधिकार क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राज मार्गों की 200 मीटर की परिधि में बनने वाले सभी भवनों का निर्माण अब जिला विकास प्राधिकरण की अनुमति से ही किया जाएगा। जिला विकास प्राधिकरण के गठन के साथ ही नगरपालिका परिषदों का भवनों के मानचित्र पास करने का अधिकार भी अब समाप्त हो चुका है।
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नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि अधिशासी अधिकारी को शासन से निर्देश प्राप्त होने के बाद से पालिका ने पिछले तीन दिनों से भवनों के नक्शे पास करने बंद कर दिए हैं। जिला विकास प्राधिकरण के गठन से पहले पालिका परिषद के पास आए मानचित्रों के बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पालिका परिषद निर्माणाधीन भवनों के लिए उसकी माप के आधार पर विकास शुल्क और निर्माण शुल्क वसूलती है।
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सभी मदों से करीब पौने दो करोड़ रुपये की आय होती है, लेकिन प्राधिकरण बनने से पालिका की आय करीब 25 प्रतिशत कम हो जाएगी। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने शासन को पत्र लिखकर इसकी भरपाई करने की मांग की है। अल्मोड़ा की तरह ही राज्य के सभी जिलों में स्थित जिन नगरपालिका क्षेत्रों में टाउन प्लानिंग के लिए अन्य एजेंसियां काम नहीं कर रही हैं वहां भी पालिकाओं और नगर पंचायतों के पास से निर्माण कार्यों का मानचित्र पास करने का अधिकार हट गया है और इसकी जगह सभी निकायों में भवनों के मानचित्र पास करने का अधिकार जिला विकास प्राधिकरण के पास आ गया है।