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घर से ही बेटा-बेटी को समान रूप से संस्कारवान बनाने की जरूरत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 02:17 AM IST
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घर से ही बेटा-बेटी को समान रूप से संस्कारवान बनाने की जरूरत
हल्द्वानी। अमर उजाला की अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम और जन सेवा समिति गौजाजाली की ओर से संत निरंकारी सत्संग भवन में विचार गोष्ठी हुई। महिलाओं ने कहा कि घर से ही बेटा-बेटी को समान रूप से संस्कारवान बनाने की जरूरत है। गोष्ठी में महिलाओं ने क्षेत्र में क्रियाशाला के निर्माण की मांग उठाई। इस दौरान 50 से अधिक महिलाओं ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाने के लिए अपराजिता शपथ पत्र भरे।
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वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.आशुतोष पंत ने पानी की बर्बादी रोकने और अधिक से अधिक पौधरोपण कर सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। पार्षद मनोज मठपाल ने कहा कि अब भी कई परिवार कूड़ा गाड़ी का 50 रुपये शुल्क देने से बच रहे हैं और खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं। पूर्व प्रधान रेनू खुल्बे ने कहा कि अपराजिता मुहिम समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है। संचालन कुंदन सिंह पडियार ने किया। इस दौरान टीका राम देवराड़ी, बिशन दत्त जोशी, संजय पांडे, जगदीश चंद्र पांडे, हरीश चंद्र पांडे, भुवन पांडे, मुन्नी जोशी, ज्योति सुनाल, भारती भट्ट, शांति कांडपाल, हेमा डालाकोटी, गोविंद तिवारी, गोविंद बल्लभ भट्ट, उपेंद्रनाथ सिंह, भुवन तिवारी, एमसी पांडे, ठाकुर सिंह अधिकारी आदि थे।
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घर से ही बेटा-बेटी को समान रूप से संस्कारवान बनाने की जरूरत
अमर उजाला की अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम और जनसेवा समिति की ओर से आयोजित हुई गोष्ठी

- महिला चाहे गृहिणी हो या कामकाजी, दोनों का समाज के निर्माण में अहम योगदान होता है। स्वरोजगार से जुड़कर महिलाएं स्वावलंबी बन सकती हैं। -रीता जोशी


- विचारों में जागृति आएगी तो समाज में बदलाव भी नजर आएगा। स्वयं की ताकत का अहसास कर हर विपरीत परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। -तारा पांडे


- घर से ही नारी का सम्मान होना चाहिए। शिक्षा, समानता, रोजगार, सुरक्षा और जागरूकता के वातावरण में महिलाएं सशक्त बन सकती हैं। -कंचन भाकुनी


- केवल विचारों से कुछ नहीं होता। घर से बेटा-बेटी को समान रूप से संस्कारवान बनाने की शुरुआत करनी होगी, तभी समाज में बदलाव आएगा। -भगवती बेलवाल
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