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सीतावनी में जिप्सी बढ़ाने की मांग
Updated Tue, 16 Oct 2018 01:28 AM IST
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रामनगर (नैनीताल)। पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व (पीसीआर) के सीतावनी जोन में सोमवार से संभावित पर्यटन गतिविधियां बहाल नहीं हो सकीं। इसके विरोध में जिप्सी चालकों ने रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा का घेराव किया। अधिकतम जिप्सियों के यथाशीघ्र प्रवेश की अनुमति मांगी। अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी।
पिछले साल तक बरसात में बंद होने वाले पीसीआर में 15 अक्तूबर से पर्यटन गतिविधियां शुरू हो जाती थीं। वहां असीमित वाहन चलते थे लेकिन इस साल बरसात में हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्रों में रजिस्टर्ड सीमित वाहन चलाने का आदेश दिया। वन विभाग ने न तो वाहनों का पंजीकरण कराया और न ही प्रवेश के लिए वाहनों की अधिकतम संख्या ही तय की, हालांकि आंतरिक वन मोटर मार्गों को सुधारने का काम शुरू कर दिया गया है। इसलिए जिप्सी चालकों ने सोमवार को डीएफओ नेहा वर्मा से रोजगार बचाने, दिलाने की मांग की। बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की बुकिंग न मिलने पर सभी पर्यटक सीतावनी जाना चाहते हैं। रामपुर टोंगिया वनग्राम के लोगों का संपर्क मार्ग, माता सीता के धरती की गोद में समाने, लवकुश आश्रम, वाल्मीकि तीर्थ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की संपत्ति होने के कारण भी 200 से अधिक जिप्सी चालक सीतावनी जोन पर निर्भर हैं। अगर विभाग ने वहां जाने के लिए जिप्सियों की संख्या काम कर दी तो जिप्सी चालक बेरोजगार हो जाएंगे। उनके सामने आजीविका की समस्या हो जाएगी। बताया कि प्रांतीय राजमार्ग होने के बावजूद उनको जाने से रोका जा रहा है। आरोप लगाया कि टेड़ा वन चौकी के कर्मचारी जिप्सी चालकों से अभद्रता करते हैं। इसलिए टेड़ा वन चौकी को हटाया जाए या फिर वन विभाग चेकिंग तक सीमित रहे। डीएफओ नेहा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जिप्सी रजिस्ट्रेशन के बाद सीतावनी पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इस मौके पर जिप्सी चालक हुरअली खान, गुड्डू छिम्वाल, सोनू, नावेद खां, शमीम अहमद, वसीम अहमद, अकरम खान, अहमद आदि थे।
जिप्सी चालकों ने डीएफओ का घेराव किया
अधिकतम जिप्सियों के प्रवेश की अनुमति मांगी
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पिछले साल तक बरसात में बंद होने वाले पीसीआर में 15 अक्तूबर से पर्यटन गतिविधियां शुरू हो जाती थीं। वहां असीमित वाहन चलते थे लेकिन इस साल बरसात में हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्रों में रजिस्टर्ड सीमित वाहन चलाने का आदेश दिया। वन विभाग ने न तो वाहनों का पंजीकरण कराया और न ही प्रवेश के लिए वाहनों की अधिकतम संख्या ही तय की, हालांकि आंतरिक वन मोटर मार्गों को सुधारने का काम शुरू कर दिया गया है। इसलिए जिप्सी चालकों ने सोमवार को डीएफओ नेहा वर्मा से रोजगार बचाने, दिलाने की मांग की। बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की बुकिंग न मिलने पर सभी पर्यटक सीतावनी जाना चाहते हैं। रामपुर टोंगिया वनग्राम के लोगों का संपर्क मार्ग, माता सीता के धरती की गोद में समाने, लवकुश आश्रम, वाल्मीकि तीर्थ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की संपत्ति होने के कारण भी 200 से अधिक जिप्सी चालक सीतावनी जोन पर निर्भर हैं। अगर विभाग ने वहां जाने के लिए जिप्सियों की संख्या काम कर दी तो जिप्सी चालक बेरोजगार हो जाएंगे। उनके सामने आजीविका की समस्या हो जाएगी। बताया कि प्रांतीय राजमार्ग होने के बावजूद उनको जाने से रोका जा रहा है। आरोप लगाया कि टेड़ा वन चौकी के कर्मचारी जिप्सी चालकों से अभद्रता करते हैं। इसलिए टेड़ा वन चौकी को हटाया जाए या फिर वन विभाग चेकिंग तक सीमित रहे। डीएफओ नेहा ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जिप्सी रजिस्ट्रेशन के बाद सीतावनी पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इस मौके पर जिप्सी चालक हुरअली खान, गुड्डू छिम्वाल, सोनू, नावेद खां, शमीम अहमद, वसीम अहमद, अकरम खान, अहमद आदि थे।
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जिप्सी चालकों ने डीएफओ का घेराव किया
अधिकतम जिप्सियों के प्रवेश की अनुमति मांगी