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उतम साहित्य की उत्पति संघर्ष के दौर में होती है
Updated Sun, 07 Oct 2018 02:13 AM IST
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साहित्य
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नैनीताल। कुमाऊं साहित्य और कला महोत्सव में शनिवार को भी साहित्यकार जुटे तो उन्हें सुनने के लिए भीड़ भी जुटी। वक्ताओं ने कहा कि उत्तम साहित्य की उत्पत्ति के लिए सबसे अहम दौर संघर्ष का होता है। संघर्ष के दौरान की गई रचनाएं ही विशेष स्थान बनाने के साथ ही बहुचर्चित होती हैं।
हिमालयन ईकोज संस्था की ओर से मल्लीताल स्थित प्रसाद भवन में कला तथा साहित्य पर आयोजित कुमाऊं फेस्टिवल में शनिवार को देश के विभिन्न स्थनों से दिग्गज पहुंचे हैं। वक्ताओं ने कहा कि अधिकांश उपन्यास, साहित्य, आत्मकथा, कविता संग्रह आदि रचनाओं को ठोस रूप संघर्ष के दौर में ही दिया गया है। बहुचर्चित लेखन परेशानी के समय जंगलों तथा जेल आदि में ही लिखे गए हैं। जिसमें गहराइयों से निकले वाक्यों को शामिल किया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि बेहतर साहित्य लेखन के लिए कुमाऊं के विभिन्न स्थलों का विशेष महत्व है। यहां कई स्थानों पर महान साहित्यकारों ने लेखन विधा को रूप दिया है। साहित्यकारों की मानें तो कुमाऊं के पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण को लेकर ठोस पहल की जरूरत है जिससे कला व साहित्य के स्वरूप को बचाया जा सके। संस्था की डायरेक्टर जानवी प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय छायाकार अनूप साह, शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू, ऑल सेंट कॉलेज की प्रधानाचार्य किरन जरमाया, एटीआई के निदेशक एएस नयाल, अंकिता, सुखमय मजूमदार, अमिताभ बाघेल, कीवा आदि मौजूद रहे।
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दस साल पहले बलपूर्वक दबाई गई थी तनुश्री की आवाज: शोभा डे
नैनीताल। वरिष्ठ साहित्यकार शोभा डे ने तनुश्री द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर लगाए गए आरोपों को सही करार दिया। उन्होंने कहा कि दस साल पहले तनु की आवाज की दबाई गई थी। तनु का सहयोग किया जाना चाहिए। तनुश्री अगर बड़ी स्टार होती तो शायद अन्य कलाकार उन्हें सहयोग करते। अमिताभ बच्चन द फादर ऑफ फिल्म इंडस्ट्री हैं। उन्हें कहना चाहिए था कि जो सही है वह सामने आना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोपी को सजा मिलनी चाहिए। महिलाओं के साथ होने वाले गलत कार्यों का विरोध होना चाहिए। बदलते दौर में नई पीढ़ी को भी इसके साथ चलना पड़ेगा। कहा कि सिर्फ तनुश्री ही नहीं अन्य युवा कलाकारों के साथ ही वह हमेशा खड़ी रहेंगी।
महादेवी वर्मा की कविताओं का अंग्रेजी रूपांतरण करेंगे: नमिता
वरिष्ठ उपन्यासकार नमिता गोखले ने कहा कि भारतीय लेखक होने के कारण उन्हें गर्व है कि भारत में 24 भाषाओं में लेखन हो रहा है। हर वर्ष जयपुर में लिक्टेचर फेस्टिवल आयोजित करती हैं। यह फेस्टिवल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लंदन, भूटान समेत विश्व के आठ देशों में आयोजित किया जाता है। अब कुमाऊं में भी इसी प्रकार की पहल की जा रही है। कुमाऊं में कई कवियों ने लेखन का कार्य किया है। उन्होंने महादेवी की कविता सांध्यगीत का अंग्रेजी रूपातंरण करने का निर्णय लिया है।
उर्दू में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर ले रहा है हिस्सा: सैफ
नैनीताल। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और कवि सैफ महमूद ने कहा कि उर्दू के क्षेत्र में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवक-युवतियां गजल, शायरी आदि के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे हैं। सैफ ने बी लव इट डेल्ही ए मुगल सिटी एंड हर ग्रेटस पोएट्स किताब में उर्दू के मशूर शायर गालिब, मीर आदि का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि 1700 से 1900 तक का इतिहास किताब में शामिल है।
पेट्रोल, नोटबंदी ने कमर तोड़ी विदेश नीति से क्या होगा : पंत
नैनीताल। इतिहासकार पद्मश्री प्रो. पुष्पेश पंत ने कहा कि अगर पेट्रोल लगातार महंगा हो रहा है और जीएसटी और नोटबंदी ने कमर तोड़ दी है तो विदेश नीति ठीक कर क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं के खान-पान तथा संस्कृति को प्रमोट करने की जरूरत है। जल्द ही वह थिंस टू लीव बिहाइंड किताब का राग पहाड़ी नाम से हिंदी में ंरूपातंरण करने की तैयारी कर रहे हैं। इसे जनवरी तक तैयार किया जाएगा।
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हिमालयन ईकोज संस्था की ओर से मल्लीताल स्थित प्रसाद भवन में कला तथा साहित्य पर आयोजित कुमाऊं फेस्टिवल में शनिवार को देश के विभिन्न स्थनों से दिग्गज पहुंचे हैं। वक्ताओं ने कहा कि अधिकांश उपन्यास, साहित्य, आत्मकथा, कविता संग्रह आदि रचनाओं को ठोस रूप संघर्ष के दौर में ही दिया गया है। बहुचर्चित लेखन परेशानी के समय जंगलों तथा जेल आदि में ही लिखे गए हैं। जिसमें गहराइयों से निकले वाक्यों को शामिल किया जाता है।
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वक्ताओं ने कहा कि बेहतर साहित्य लेखन के लिए कुमाऊं के विभिन्न स्थलों का विशेष महत्व है। यहां कई स्थानों पर महान साहित्यकारों ने लेखन विधा को रूप दिया है। साहित्यकारों की मानें तो कुमाऊं के पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण को लेकर ठोस पहल की जरूरत है जिससे कला व साहित्य के स्वरूप को बचाया जा सके। संस्था की डायरेक्टर जानवी प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय छायाकार अनूप साह, शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू, ऑल सेंट कॉलेज की प्रधानाचार्य किरन जरमाया, एटीआई के निदेशक एएस नयाल, अंकिता, सुखमय मजूमदार, अमिताभ बाघेल, कीवा आदि मौजूद रहे।
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दस साल पहले बलपूर्वक दबाई गई थी तनुश्री की आवाज: शोभा डे
नैनीताल। वरिष्ठ साहित्यकार शोभा डे ने तनुश्री द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर लगाए गए आरोपों को सही करार दिया। उन्होंने कहा कि दस साल पहले तनु की आवाज की दबाई गई थी। तनु का सहयोग किया जाना चाहिए। तनुश्री अगर बड़ी स्टार होती तो शायद अन्य कलाकार उन्हें सहयोग करते। अमिताभ बच्चन द फादर ऑफ फिल्म इंडस्ट्री हैं। उन्हें कहना चाहिए था कि जो सही है वह सामने आना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोपी को सजा मिलनी चाहिए। महिलाओं के साथ होने वाले गलत कार्यों का विरोध होना चाहिए। बदलते दौर में नई पीढ़ी को भी इसके साथ चलना पड़ेगा। कहा कि सिर्फ तनुश्री ही नहीं अन्य युवा कलाकारों के साथ ही वह हमेशा खड़ी रहेंगी।
महादेवी वर्मा की कविताओं का अंग्रेजी रूपांतरण करेंगे: नमिता
वरिष्ठ उपन्यासकार नमिता गोखले ने कहा कि भारतीय लेखक होने के कारण उन्हें गर्व है कि भारत में 24 भाषाओं में लेखन हो रहा है। हर वर्ष जयपुर में लिक्टेचर फेस्टिवल आयोजित करती हैं। यह फेस्टिवल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लंदन, भूटान समेत विश्व के आठ देशों में आयोजित किया जाता है। अब कुमाऊं में भी इसी प्रकार की पहल की जा रही है। कुमाऊं में कई कवियों ने लेखन का कार्य किया है। उन्होंने महादेवी की कविता सांध्यगीत का अंग्रेजी रूपातंरण करने का निर्णय लिया है।
उर्दू में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर ले रहा है हिस्सा: सैफ
नैनीताल। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और कवि सैफ महमूद ने कहा कि उर्दू के क्षेत्र में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवक-युवतियां गजल, शायरी आदि के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे हैं। सैफ ने बी लव इट डेल्ही ए मुगल सिटी एंड हर ग्रेटस पोएट्स किताब में उर्दू के मशूर शायर गालिब, मीर आदि का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि 1700 से 1900 तक का इतिहास किताब में शामिल है।
पेट्रोल, नोटबंदी ने कमर तोड़ी विदेश नीति से क्या होगा : पंत
नैनीताल। इतिहासकार पद्मश्री प्रो. पुष्पेश पंत ने कहा कि अगर पेट्रोल लगातार महंगा हो रहा है और जीएसटी और नोटबंदी ने कमर तोड़ दी है तो विदेश नीति ठीक कर क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं के खान-पान तथा संस्कृति को प्रमोट करने की जरूरत है। जल्द ही वह थिंस टू लीव बिहाइंड किताब का राग पहाड़ी नाम से हिंदी में ंरूपातंरण करने की तैयारी कर रहे हैं। इसे जनवरी तक तैयार किया जाएगा।