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गुरुद्वारे के लिए बनी बिल्डिंग हस्तांतरित की जाए
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:47 AM IST
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नानकमत्ता। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री नानकमत्ता साहिब द्वारा गठित धर्म प्रचार कमेटी की मंगलवार को गुरुद्वारा के प्रधान कक्ष में बैठक हुई।
कमेटी के प्रधान गुरमेज सिंह ने बताया कि पूरनपुर जिला पीलीभीत उत्तर प्रदेश के कीरतपुर गांव के अमरजीत सिंह ने गुरुद्वारे के निर्माण के लिए भूमि दान दी थी। संगत के सहयोग से गुरुद्वारे का निर्माण किया गया था, लेकिन ग्रंथी गुरुद्वारे को निजी संपत्ति बनाने पर तुला था।
निशान साहिब न लगाकर गुरु महाराज के स्वरूप की मौजूदगी में पूजा पाठ करने के साथ ही तांत्रिक क्रिया भी कर रहा था। उसने धर्म विरुद्ध अपने पिता की समाधि भी गुरुद्वारा परिसर में बना दी थी। इसको लेकर सिख संगत में रोष व्याप्त था। सूचना मिलने पर धर्म की प्रचार कमेटी, स्थानीय प्रशासन और संगत की बैठक में गुरुद्वारे में गुरु महाराज के स्वरूप को वापस करने की मांग की गई।
सहमति के आधार पर गुरु महाराज के चार स्वरूपों को मर्यादा के अनुसार गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब लाकर श्री हरमंदिर साहिब के दरबार में रखा गया है। बैठक में प्रशासन से गुरुद्वारे के लिए निर्मित भवन को गुरुद्वारे के नाम करने की मांग की गई।
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वहां गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, सचिव केहर सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के बलजिंदर सिंह, बलजीत सिंह खैरा, सुखचैन सिंह, सुखवीर सिंह लाडी, महाप्रबंधक अमरजीत सिंह, मलकीत सिंह, रणजीत सिंह, सुखवंत सिंह भुल्लर आदि थे।
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कमेटी के प्रधान गुरमेज सिंह ने बताया कि पूरनपुर जिला पीलीभीत उत्तर प्रदेश के कीरतपुर गांव के अमरजीत सिंह ने गुरुद्वारे के निर्माण के लिए भूमि दान दी थी। संगत के सहयोग से गुरुद्वारे का निर्माण किया गया था, लेकिन ग्रंथी गुरुद्वारे को निजी संपत्ति बनाने पर तुला था।
निशान साहिब न लगाकर गुरु महाराज के स्वरूप की मौजूदगी में पूजा पाठ करने के साथ ही तांत्रिक क्रिया भी कर रहा था। उसने धर्म विरुद्ध अपने पिता की समाधि भी गुरुद्वारा परिसर में बना दी थी। इसको लेकर सिख संगत में रोष व्याप्त था। सूचना मिलने पर धर्म की प्रचार कमेटी, स्थानीय प्रशासन और संगत की बैठक में गुरुद्वारे में गुरु महाराज के स्वरूप को वापस करने की मांग की गई।
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सहमति के आधार पर गुरु महाराज के चार स्वरूपों को मर्यादा के अनुसार गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब लाकर श्री हरमंदिर साहिब के दरबार में रखा गया है। बैठक में प्रशासन से गुरुद्वारे के लिए निर्मित भवन को गुरुद्वारे के नाम करने की मांग की गई।
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वहां गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, सचिव केहर सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के बलजिंदर सिंह, बलजीत सिंह खैरा, सुखचैन सिंह, सुखवीर सिंह लाडी, महाप्रबंधक अमरजीत सिंह, मलकीत सिंह, रणजीत सिंह, सुखवंत सिंह भुल्लर आदि थे।