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हरीनगरी के मासूमों को शिकार बनाने वाला तेंदुआ बूढ़ा या फिर बीमार.....
Updated Tue, 12 Jun 2018 11:49 PM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। जंगलों में मानव का दबाव बढ़ने, आग की घटनाओं और वन प्रभाग के जंगलों के जल स्रोतों में पानी घटने से जंगली जानवरों का रुख नब्बे के दशक के बाद से आबादी की ओर कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि वन रेंज गढ़खेत के हरीनगरी में दो मासूमों को निवाला बनाने वाला तेंदुआ या बूढ़ा है या वह अस्वस्थ हो सकता है।
जंगली जानवरों के आबादी की ओर बढ़ने का मुख्य कारण जंगलों की आग हो सकता है। वन प्रभाग बागेश्वर के जंगलों में मार्च में जब आग लगनी शुरू होती है तब तेंदुओं का रुख आबादी की ओर ज्यादा ही बढ़ जाता है। तेंदुआ 2017 में बैजनाथ और गढ़खेत रेंज में 36 मवेसियों और दो मासूमों को निवाला बना चुका है। पिछले आठ माह के अंदर अलग-अलग गांवों के नौ लोग तेंदुए के हमले में घायल हो चुके हैं। वन प्रभाग बागेश्वर के आबादी वाले इलाकों में तेंदुए के अक्सर दिखाई देने से लोग डर के कारण अब सूर्यास्त से पहले ही घर पहुंच रहे हैं।
वन प्रभाग बागेश्वर के डीएफओ आरके सिंह ने बताया कि तेंदुआ जब प्राकृतिक खाना छोड़ देता या फिर बीमार हो जाता है तो वह बड़े जानवरों को निवाला बनाने के बजाय मासूम बच्चों पर हमला करता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि अस्सी के दशक के बाद जंगलों के आसपास अधिकांश पेयजल योजनाओं का निर्माण हुआ। गर्मी के सीजन में जंगली जानवर जंगलों में पानी के लिए मोहताज हो जाते हैं और प्यास बुझाने के लिए आबादी की ओर रुख करते हैं। वन रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि बागेश्वर वन प्रभाग के जंगलों में वर्तमान 244 तेंदुए है। दस साल में आबादी में जो तेंदुए मरे पाए गए उनमें से अधिकतर ज्यादा उम्र के थे।
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अब तक 49 तेंदुओं का शिकार कर चुके शिकारी लखपत सिंह ने बताया कि हरीनगरी के मासूम दीपक और करन को निवाला बनाने वाला तेंदुआ या तो ज्यादा उम्र का होगा या फिर वह बीमार हो सकता है। बूढ़े तेंदुए के आदमखोर होने की ज्यादा संभावना होती है।
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जंगली जानवरों के आबादी की ओर बढ़ने का मुख्य कारण जंगलों की आग हो सकता है। वन प्रभाग बागेश्वर के जंगलों में मार्च में जब आग लगनी शुरू होती है तब तेंदुओं का रुख आबादी की ओर ज्यादा ही बढ़ जाता है। तेंदुआ 2017 में बैजनाथ और गढ़खेत रेंज में 36 मवेसियों और दो मासूमों को निवाला बना चुका है। पिछले आठ माह के अंदर अलग-अलग गांवों के नौ लोग तेंदुए के हमले में घायल हो चुके हैं। वन प्रभाग बागेश्वर के आबादी वाले इलाकों में तेंदुए के अक्सर दिखाई देने से लोग डर के कारण अब सूर्यास्त से पहले ही घर पहुंच रहे हैं।
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वन प्रभाग बागेश्वर के डीएफओ आरके सिंह ने बताया कि तेंदुआ जब प्राकृतिक खाना छोड़ देता या फिर बीमार हो जाता है तो वह बड़े जानवरों को निवाला बनाने के बजाय मासूम बच्चों पर हमला करता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि अस्सी के दशक के बाद जंगलों के आसपास अधिकांश पेयजल योजनाओं का निर्माण हुआ। गर्मी के सीजन में जंगली जानवर जंगलों में पानी के लिए मोहताज हो जाते हैं और प्यास बुझाने के लिए आबादी की ओर रुख करते हैं। वन रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि बागेश्वर वन प्रभाग के जंगलों में वर्तमान 244 तेंदुए है। दस साल में आबादी में जो तेंदुए मरे पाए गए उनमें से अधिकतर ज्यादा उम्र के थे।
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अब तक 49 तेंदुओं का शिकार कर चुके शिकारी लखपत सिंह ने बताया कि हरीनगरी के मासूम दीपक और करन को निवाला बनाने वाला तेंदुआ या तो ज्यादा उम्र का होगा या फिर वह बीमार हो सकता है। बूढ़े तेंदुए के आदमखोर होने की ज्यादा संभावना होती है।