{"_id":"5c8c0d17bdec221445021589","slug":"151552682263-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वायवा के बाद 60 दिन में जमा कर सकेंगे पीएचडी थीसिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायवा के बाद 60 दिन में जमा कर सकेंगे पीएचडी थीसिस
विज्ञापन
डेमो
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय से पीएचडी, डीलिट, डीएससी कर रहे शोधार्थियों को अब वायवा हो जाने के साठ दिनों के भीतर पूर्ण शोधग्रंथ (थीसिस) विवि में जमा कराना होगा। पहले शोधग्रंथ जमा कराने की समयावधि 45 दिन थी। विवि के शोध अनुभाग ने कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल से स्वीकृति मिल जाने के बाद संशोधित नियमावली शुक्रवार देर शाम जारी कर दी है।
विवि के निदेशक शोध प्रो. राजीव उपाध्याय ने बताया है कि कुलपति प्रो. नौड़ियाल की ओर से शोध नियमावली के कुछ बिंदुओं में संशोधन को लेकर आदेश मिले थे। आदेशों के क्रम में शोधार्थियों के हित में संशोधन किए गए हैं। बताया कि शोध निर्देशकों और शोधार्थी को तैयार शोधग्रंथ के सभी अध्यायों के जांच कर ही वायवा, आरडीसी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। बताया कि शोध ग्रंथ में 20 फीसदी ही अवर्णित सामग्री का प्रयोग हो सकेगा। उसके लिए उरकुंड सॉफ्टवेयर का प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य होगा। बताया कि उरकुंड से शोधग्रंथ की जांच विवि के केंद्रीय पुस्तकालय से हो सकेगी। प्रो. उपाध्याय ने बताया कि शोधार्थी की दो शोध अवधि के दौरान अनिवार्य सौ दो दिनों की उपस्थिति के लिए उपस्थिति पंजिका विभाग में तैयार करनी होगी। बताया कि उक्त महत्वपूर्ण बिंदुओं सहित 12 निर्देशों की नियमावली तैयार की गई है, जिसे दोनों परिसरों के निदेशकों को भेज दिया गया है। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने कहा कि शोधकार्यों में गुणवत्ता लाने के लिए नियमावली तैयार कर ली गई है। इससे नए शोध प्रभावी होंगे। उन्होंने कहा कि नियमावली में 12 बिंदु शामिल किए गए हैं, जिन्हें शोध के दौरान संबंधित निर्देशक, शोधार्थी को प्रयोग करना होगा।
वायवा के बाद 60 दिन में जमा कर सकेंगे पीएचडी थीसिस
कुमाऊं विवि : उरकुंड का प्रमाण पत्र और उपस्थिति पंजिका होगी अनिवार्य
विज्ञापन
विवि के निदेशक शोध प्रो. राजीव उपाध्याय ने बताया है कि कुलपति प्रो. नौड़ियाल की ओर से शोध नियमावली के कुछ बिंदुओं में संशोधन को लेकर आदेश मिले थे। आदेशों के क्रम में शोधार्थियों के हित में संशोधन किए गए हैं। बताया कि शोध निर्देशकों और शोधार्थी को तैयार शोधग्रंथ के सभी अध्यायों के जांच कर ही वायवा, आरडीसी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। बताया कि शोध ग्रंथ में 20 फीसदी ही अवर्णित सामग्री का प्रयोग हो सकेगा। उसके लिए उरकुंड सॉफ्टवेयर का प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य होगा। बताया कि उरकुंड से शोधग्रंथ की जांच विवि के केंद्रीय पुस्तकालय से हो सकेगी। प्रो. उपाध्याय ने बताया कि शोधार्थी की दो शोध अवधि के दौरान अनिवार्य सौ दो दिनों की उपस्थिति के लिए उपस्थिति पंजिका विभाग में तैयार करनी होगी। बताया कि उक्त महत्वपूर्ण बिंदुओं सहित 12 निर्देशों की नियमावली तैयार की गई है, जिसे दोनों परिसरों के निदेशकों को भेज दिया गया है। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने कहा कि शोधकार्यों में गुणवत्ता लाने के लिए नियमावली तैयार कर ली गई है। इससे नए शोध प्रभावी होंगे। उन्होंने कहा कि नियमावली में 12 बिंदु शामिल किए गए हैं, जिन्हें शोध के दौरान संबंधित निर्देशक, शोधार्थी को प्रयोग करना होगा।
विज्ञापन
वायवा के बाद 60 दिन में जमा कर सकेंगे पीएचडी थीसिस
कुमाऊं विवि : उरकुंड का प्रमाण पत्र और उपस्थिति पंजिका होगी अनिवार्य